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Yamuna Nagar News: साध्वी सुचेता ने उत्तम क्षमा धर्म के बारे में बताया
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 16वें दिन साध्वी सुचेता महाराज ने उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि दिगंबर परंपरा में 10 धर्मों की चर्चा होती है और 10 धर्मों की उपासना जैन श्रावक 10 दिन जैसे उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन एवं उत्तम ब्रह्मचर्य करते हैं, जिन्हें 10 लक्षण धर्म भी कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि हर धर्म चाहे वो बौद्ध धर्म हो, चाहे सनातन वैदिक धर्म, चाहे ईसाई धर्म, चाहे इस्लाम धर्म, चाहे जैन धर्म हो सभी ने धर्म के लक्षणों को विभिन्न नाम से पुकारा है। हर धर्म में मैत्री भाव को मनाने के विभिन्न तौर तरीके होते हैं। सनातन वैदिक धर्म में होली मिलन त्योहार है जब हम दिल के गलत ख्यालों को छोड़कर गले मिलते हैं, तो उसको होली मिलन कहते हैं। चेहरा भी गंदा, कपड़े भी गंदे लेकिन मन गंदा नहीं होता उसे ही होली मिलन कहते हैं। मुस्लिम में ईद मिलन त्योहार है, प्रेम भरा पर्व है। जिसे हम मीठी ईद बोलते हैं। ईसाइयों में अप्रैल डे मनाया जाता है।
आपस की रंजिश भुला कर गले लगा कर दूर करते हैं। इसी प्रकार जैन धर्म में भी उत्तम क्षमा, क्षमावाणी धर्म मनाया जाता है। ये धर्म दूरियां मिटाने का और नजदीकियां बढ़ाने का है। तो धर्म के तौर-तरीके रास्ते विभिन्न हो सकते हैं लेकिन मंजिल तो एक ही है। अंत में सभी धर्म की शरण में ही पहुंचते हैं। आराधना का प्रथम दिन उत्तम क्षमा पर्युषण महापर्व का पहला दिन उत्तम क्षमा का दिन होता है। जिस प्रकार एक मां क्षमाशील होती है, उसी प्रकार धर्म के प्रमुख दस लक्षणों में उत्तम क्षमा की शक्ति अनंत और अतुल्य है।
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 16वें दिन साध्वी सुचेता महाराज ने उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि दिगंबर परंपरा में 10 धर्मों की चर्चा होती है और 10 धर्मों की उपासना जैन श्रावक 10 दिन जैसे उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन एवं उत्तम ब्रह्मचर्य करते हैं, जिन्हें 10 लक्षण धर्म भी कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि हर धर्म चाहे वो बौद्ध धर्म हो, चाहे सनातन वैदिक धर्म, चाहे ईसाई धर्म, चाहे इस्लाम धर्म, चाहे जैन धर्म हो सभी ने धर्म के लक्षणों को विभिन्न नाम से पुकारा है। हर धर्म में मैत्री भाव को मनाने के विभिन्न तौर तरीके होते हैं। सनातन वैदिक धर्म में होली मिलन त्योहार है जब हम दिल के गलत ख्यालों को छोड़कर गले मिलते हैं, तो उसको होली मिलन कहते हैं। चेहरा भी गंदा, कपड़े भी गंदे लेकिन मन गंदा नहीं होता उसे ही होली मिलन कहते हैं। मुस्लिम में ईद मिलन त्योहार है, प्रेम भरा पर्व है। जिसे हम मीठी ईद बोलते हैं। ईसाइयों में अप्रैल डे मनाया जाता है।
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आपस की रंजिश भुला कर गले लगा कर दूर करते हैं। इसी प्रकार जैन धर्म में भी उत्तम क्षमा, क्षमावाणी धर्म मनाया जाता है। ये धर्म दूरियां मिटाने का और नजदीकियां बढ़ाने का है। तो धर्म के तौर-तरीके रास्ते विभिन्न हो सकते हैं लेकिन मंजिल तो एक ही है। अंत में सभी धर्म की शरण में ही पहुंचते हैं। आराधना का प्रथम दिन उत्तम क्षमा पर्युषण महापर्व का पहला दिन उत्तम क्षमा का दिन होता है। जिस प्रकार एक मां क्षमाशील होती है, उसी प्रकार धर्म के प्रमुख दस लक्षणों में उत्तम क्षमा की शक्ति अनंत और अतुल्य है।
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