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सड़क सुरक्षा के दावे, फिर भी हादसों में मरने वालों का तेजी से बढ़ रहा ग्राफ
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यमुनानगर। हर माह दो से तीन घंटे मंथन करने के बावजूद सड़क सुरक्षा पर कोई काम होता नहीं दिख रहा। अधिकारी सड़कों को सुरक्षित बनाने का चाहे लाख दावा कर लें, लेकिन इनमें सच्चाई बिल्कुल भी नहीं है। टूटी सड़कें, खराब ट्रैफिक लाइट, टूटे ब्लिंकर, हाईवे पर अवैध कट व तीव्र मोड़ पर सुरक्षा का प्रबंध नहीं होना सड़क सुरक्षा के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। यही वजह है कि खस्ताहाल सड़कों पर हादसों का ग्राफ भी दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2020 में जहां 182 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई, वहीं 2021 में 235 लोगों ने सड़क पर अपनी जान गंवाई। इन आंकड़ों को देख कर कोई भी बता देगा कि सड़कों पर सुरक्षित सफर करने के कितने इंतजाम प्रशासन ने कर रखी है।
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14 चौक में एक भी ट्रैफिक लाइट पूरी तरह से ठीक नहीं
शहर में 14 चौक पर ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम ने ट्रैफिक कंट्रोल लाइट लगा रखी है। परंतु इनमें एक भी लाइट पूरी तरह से काम नहीं करती। वीरवार को सभी लाइटों का निरीक्षण किया गया तो यह खराब या फिर बंद मिली। कई जगहों पर तो केवल रेड या ग्रीन लाइट ही जलती है। ज्यादातर लाइटों के टाइमर खराब पड़े हैं। रेड व ग्रीन लाइट को देख कर जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी भी सड़क सुरक्षा की बैठक में इन्हें सही बता देते हैं। निगम अधिकारी भी बैठक में एक बार नहीं कहते कि उनकी लाइटें खराब पड़ी हैं। जगाधरी-बिलासपुर स्टेट हाईवे पर जिला जेल के पास गत वर्ष 20 मई को 10 लाख रुपये खर्च कर नई ट्रैफिक कंट्रोल लाइट लगाई गई थी। यह लाइट एक माह भी ठीक से नहीं चली। लाइट को ब्लिंक मोड में करके छोड़ दिया था। यदि इसे ब्लिंक मोड में ही करना था तो 10 लाख रुपये का नुकसान क्यों किया। मात्र दो लाख रुपये में वहां ब्लिंकर लगाए जा सकते थे।
दिसंबर माह में हादसों में 21 लोगों ने छोड़ दी दुनियां
जिले में खराब सड़कों और अन्य यातायात कमियों के चलते गत दिसंबर माह में असमय 21 लोग सड़क हादसों में जान गंवा बैठे। जगाधरी में डॉ. भीमराव आंबेडकर चौक से लेकर पौंटा साहिब तक नेशनल हाईवे बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। हाईवे पर लगी पर न केवल ट्रैफिक कंट्रोल लाइट खराब पड़ी हैं बल्कि शहरी क्षेत्र में अवैध कट हादसों का बड़ा कारण बन रहे हैं। अवैध कट में से लोग कहीं से भी वाहन के आगे आ जाते हैं और हादसा हो जाता है। एक तरफ शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की बातें कही जा रही हैं तो दूसरी तरफ हाईवे को लेकर ही अधिकारी गंभीर नहीं है। नवंबर माह में जब सड़क सुरक्षा की मीटिंग हुई थी तो नेशनल हाईवे के अधिकारियों ने एक माह में सारे हाईवे की खामियों को दूर करने की बात कही थी। परंतु अब तक एक जगह भी अधिकारी काम शुरू नहीं कर पाए। वर्ष 2020 में जिले में अक्टूबर में 26, नवंबर में 26 व दिसंबर में 21 लोगों की हादसों में मौत हुई थी। जबकि 2021 में इन्हीं महीनों में क्रमश: 35, 35 व 21 लोगों की मौत हो चुकी है।
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रोड कट भी बढ़ा रहे हादसे
शहरी क्षेत्र में जगह-जगह सड़कों पर रोड कट देेखने को मिल जाएंगे। लोग नगर निगम से एनओसी लिए बिना ही सड़क में कट लगा देते हैं। काम होने पर इनमें थोड़ी बहुत मिट्टी भर दी जाती है। जैसे ही कोई दोपहिया वाहन रोड कट से निकलता है तो दिखाई न देने पर वह हादसे का शिकार हो जाता है। जबकि रोड कट का मामला शहर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा भी मीटिंग में उठा चुके हैं।
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14 चौक में एक भी ट्रैफिक लाइट पूरी तरह से ठीक नहीं
शहर में 14 चौक पर ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम ने ट्रैफिक कंट्रोल लाइट लगा रखी है। परंतु इनमें एक भी लाइट पूरी तरह से काम नहीं करती। वीरवार को सभी लाइटों का निरीक्षण किया गया तो यह खराब या फिर बंद मिली। कई जगहों पर तो केवल रेड या ग्रीन लाइट ही जलती है। ज्यादातर लाइटों के टाइमर खराब पड़े हैं। रेड व ग्रीन लाइट को देख कर जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी भी सड़क सुरक्षा की बैठक में इन्हें सही बता देते हैं। निगम अधिकारी भी बैठक में एक बार नहीं कहते कि उनकी लाइटें खराब पड़ी हैं। जगाधरी-बिलासपुर स्टेट हाईवे पर जिला जेल के पास गत वर्ष 20 मई को 10 लाख रुपये खर्च कर नई ट्रैफिक कंट्रोल लाइट लगाई गई थी। यह लाइट एक माह भी ठीक से नहीं चली। लाइट को ब्लिंक मोड में करके छोड़ दिया था। यदि इसे ब्लिंक मोड में ही करना था तो 10 लाख रुपये का नुकसान क्यों किया। मात्र दो लाख रुपये में वहां ब्लिंकर लगाए जा सकते थे।
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दिसंबर माह में हादसों में 21 लोगों ने छोड़ दी दुनियां
जिले में खराब सड़कों और अन्य यातायात कमियों के चलते गत दिसंबर माह में असमय 21 लोग सड़क हादसों में जान गंवा बैठे। जगाधरी में डॉ. भीमराव आंबेडकर चौक से लेकर पौंटा साहिब तक नेशनल हाईवे बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। हाईवे पर लगी पर न केवल ट्रैफिक कंट्रोल लाइट खराब पड़ी हैं बल्कि शहरी क्षेत्र में अवैध कट हादसों का बड़ा कारण बन रहे हैं। अवैध कट में से लोग कहीं से भी वाहन के आगे आ जाते हैं और हादसा हो जाता है। एक तरफ शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की बातें कही जा रही हैं तो दूसरी तरफ हाईवे को लेकर ही अधिकारी गंभीर नहीं है। नवंबर माह में जब सड़क सुरक्षा की मीटिंग हुई थी तो नेशनल हाईवे के अधिकारियों ने एक माह में सारे हाईवे की खामियों को दूर करने की बात कही थी। परंतु अब तक एक जगह भी अधिकारी काम शुरू नहीं कर पाए। वर्ष 2020 में जिले में अक्टूबर में 26, नवंबर में 26 व दिसंबर में 21 लोगों की हादसों में मौत हुई थी। जबकि 2021 में इन्हीं महीनों में क्रमश: 35, 35 व 21 लोगों की मौत हो चुकी है।
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रोड कट भी बढ़ा रहे हादसे
शहरी क्षेत्र में जगह-जगह सड़कों पर रोड कट देेखने को मिल जाएंगे। लोग नगर निगम से एनओसी लिए बिना ही सड़क में कट लगा देते हैं। काम होने पर इनमें थोड़ी बहुत मिट्टी भर दी जाती है। जैसे ही कोई दोपहिया वाहन रोड कट से निकलता है तो दिखाई न देने पर वह हादसे का शिकार हो जाता है। जबकि रोड कट का मामला शहर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा भी मीटिंग में उठा चुके हैं।