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हादसों का ग्राफ बढ़ा, लघु सचिवालय तक सिमटे सड़क सुरक्षा के दावे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2022 01:42 AM IST
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Road safety claims confined to mini secretariat
यमुनानगर। सड़क हादसे दिनोंदिन बढ़ रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब हादसे में किसी की जान न जा रही हो। फिर भी सड़क सुरक्षा को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। सड़क सुरक्षा की बातें केवल लघु सचिवालय के सभागार की चहारदीवारी तक सिमट कर रह गई हैं। लोगों की जान बचाने व हादसों को कम करने के लिए जितने भी दावे व वादे अधिकारियों द्वारा किए जाते हैं वह धरातल पर नजर नहीं आ रहे है।
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वर्ष 2021 में जिले में एक साल में 459 हादसे हुए, जिनमें 235 लोगों की मौत हुई। 368 लोग घायल हुए। इससे पहले 2020 में एक साल में 400 हादसों में 182 लोगों की मौत हुई और 319 लोग घायल हुए। इस साल तीन माह में 70 लोगों की हादसों में जान जा चुकी है। 26 मार्च को हुई सड़क सुरक्षा की बैठक में नगर निगम के एक्सईएन ने दावा किया था कि तीन दिन में विश्वकर्मा चौक पर नई ट्रैफिक कंट्रोल लाइट लगाने का टेंडर लग जाएगा। एक माह बीत गया, अब तक टेंडर नहीं लग पाया।
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जगाधरी-पौंटा साहिब हाईवे पर जगह-जगह खतरा
जगाधरी-पौंटा साहिब नेशनल हाईवे पर कदम-कदम पर वाहन चालकों के लिए खतरा है। यह हाईवे बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। महाराजा अग्रसेन चौक से लेकर प्रतापनगर तक सड़क कई जगहों से क्षतिग्रस्त है। चूना भट्ठी चौक पर टूटी सड़क का मामला खुद विधायक घनश्याम दास अरोड़ा उठा चुके हैं। यहां लगी ट्रैफिक कंट्रोल लाइट भी अरसे से खराब हैं। इसके बाद हाईवे से जेल की तरफ मुड़ते ही सड़क एक साल से टूट कर बिखरी पड़ी है। जबकि यह मोड़ हाईवे से जुड़ा है। अधिकारियों के पास इतना भी बजट नहीं है कि इस 20 फुट के इस टुकड़े की मरम्मत करवा सकें। इसके साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग-73ए पर जगाधरी से हथिनीकुंड लाल डांग पर रोड इंजीनियरिंग का कार्य होना था, लेकिन यह कार्य अब तक नहीं हुआ।
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ट्रैफिक कंट्रोल लाइटें भी पड़ीं खराब
सड़कों पर पहले की तरह गड्ढे हैं। चौक चौराहों पर लगी अधिकतर ट्रैफिक कंट्रोल लाइट खराब हैं या फिर जो लगी हैं, वह पूरी तरह से काम नहीं करती। अधिकतर लाइट टाइमर व येलो लाइट ही नहीं है। जिले में 54 ब्लैक स्पॉट व 19 दुर्घटना संभावित प्वाइंट हैं। इन पर संबंधित विभाग को अपनी सड़कों पर कैटआई, जेब्रा क्रॉसिंग, सफेद पट्टी, चेतावनी बोर्ड लगवाने हैं। वह भी अधिकारी नहीं करवा पा रहे। नियमानुसार यदि कहीं सड़क टूटी है या तीव्र मोड़ है उससे काफी पहले चेतावनी बोर्ड लगाना होता है। इससे वाहन चालक सचेत हो जाता है और वाहन को धीमा कर लेता है। लेकिन इस दिशा में पहल नहीं की गई।

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मीटिंग में रिपोर्ट ली जाएगी: सुभाष चंद्र
जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र का कहना है कि सड़क सुरक्षा की बैठक में संबंधित विभाग को बताया जाता है कि उनके विभाग से संबंधित कौन सी खामियां हैं। अगली बैठक से पहले विभाग को अपनी एटीआर देनी होती है। जो काम नहीं करेगा डीसी उनसे जवाब लेंगे।
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