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धर्म है दीपक और जीवन उसका तेल : सुचेता
Sun, 27 Jul 2025 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 27 Jul 2025 12:31 AM IST
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एसएस जैन सभा में प्रवचन सुनने पहुंची महिला श्रद्धालु। प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा माॅडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 17वें दिन महा साध्वी सुचेता महाराज ने कहा कि धर्म एक दीपक के समान होता है जो रोशनी देता है। उन्होंने कहा कि यह जीवन उस दीपक के तेल समान है।
यदि समाज में धर्म रूपी दीपक न हो तो व्यसनों, मोह-माया और पाप का अंधकार इतना बढ़ जाएगा कि कुछ भी दिखाई नहीं देगा। उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग से जीवन का सार समझाते हुए बताया कि एक आदमी नौका से नदी पार कर रहा था। उसने नौका चलाने वाले व्यक्ति से पूछा क्या तुम रसायन विज्ञान जानते हो तो व्यक्ति ने कहा नहीं तो।
उन्होंने कहा तुम्हारा तो 25 प्रतिशत जीवन बेकार हो गया। फिर उसने कहा क्या तुम भौतिक विज्ञान जानते हो उसने कहा नहीं, तो उसने कहा तुम्हारा तो 50 प्रतिशत जीवन खराब हो गया। फिर उसने पूछा कि क्या तुम जीव विज्ञान के बारे में जानते हो तो नाविक ने फिर कहा नहीं तो वह बोला आपका 75 प्रतिशत जीवन खराब हो गया। इतने में तूफान आया तो नाविक ने पूछा कि क्या आप तैरना जानते हो, तो उस व्यक्ति ने कहा नहीं तो, उसने कहा चलो आपका तो सारा ही जीवन बर्बाद हो गया। साध्वी समीक्षा महाराज ने जीना है दिन चार, किससे करता है तू प्यार, भजन से माहौल को भक्तिमय कर दिया।
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यदि सुखों में जीते रहोगे तो दुखी रहोगे और अपने शरीर को यदि कष्ट दोगे भक्ति में लगाओगे, धर्म मार्ग पर लगाओगे तो आपको परमात्मा की प्राप्ति होगी। उन्होंने कहा कि जब तक आपका नियंत्रण दूसरों के हाथ में है तब तक आप परेशान ही रहोगे। क्योंकि जब आप अपना नियंत्रण दूसरों के हाथ में दे देते हैं तो उनकी निंदा करने से आप दुखी होते हैं। उनकी प्रशंसा करने से आप खुश होते हैं जबकि अपने जीवन की गाड़ी के वास्तविक चालक तुम खुद होने चाहिए।
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा माॅडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 17वें दिन महा साध्वी सुचेता महाराज ने कहा कि धर्म एक दीपक के समान होता है जो रोशनी देता है। उन्होंने कहा कि यह जीवन उस दीपक के तेल समान है।
यदि समाज में धर्म रूपी दीपक न हो तो व्यसनों, मोह-माया और पाप का अंधकार इतना बढ़ जाएगा कि कुछ भी दिखाई नहीं देगा। उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग से जीवन का सार समझाते हुए बताया कि एक आदमी नौका से नदी पार कर रहा था। उसने नौका चलाने वाले व्यक्ति से पूछा क्या तुम रसायन विज्ञान जानते हो तो व्यक्ति ने कहा नहीं तो।
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उन्होंने कहा तुम्हारा तो 25 प्रतिशत जीवन बेकार हो गया। फिर उसने कहा क्या तुम भौतिक विज्ञान जानते हो उसने कहा नहीं, तो उसने कहा तुम्हारा तो 50 प्रतिशत जीवन खराब हो गया। फिर उसने पूछा कि क्या तुम जीव विज्ञान के बारे में जानते हो तो नाविक ने फिर कहा नहीं तो वह बोला आपका 75 प्रतिशत जीवन खराब हो गया। इतने में तूफान आया तो नाविक ने पूछा कि क्या आप तैरना जानते हो, तो उस व्यक्ति ने कहा नहीं तो, उसने कहा चलो आपका तो सारा ही जीवन बर्बाद हो गया। साध्वी समीक्षा महाराज ने जीना है दिन चार, किससे करता है तू प्यार, भजन से माहौल को भक्तिमय कर दिया।
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यदि सुखों में जीते रहोगे तो दुखी रहोगे और अपने शरीर को यदि कष्ट दोगे भक्ति में लगाओगे, धर्म मार्ग पर लगाओगे तो आपको परमात्मा की प्राप्ति होगी। उन्होंने कहा कि जब तक आपका नियंत्रण दूसरों के हाथ में है तब तक आप परेशान ही रहोगे। क्योंकि जब आप अपना नियंत्रण दूसरों के हाथ में दे देते हैं तो उनकी निंदा करने से आप दुखी होते हैं। उनकी प्रशंसा करने से आप खुश होते हैं जबकि अपने जीवन की गाड़ी के वास्तविक चालक तुम खुद होने चाहिए।