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Yamuna Nagar News: बुजुर्ग की दुकान हड़पने में रिश्तेदारों पर प्राथमिकी दर्ज
Wed, 17 Dec 2025 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 17 Dec 2025 12:45 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। संतपुरा रोड के रहने वाले 80 वर्षीय बुजुर्ग गुरचरण सिंह की दुकान को उनके ही रिश्तेदारों की ओर से फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने मामला सामने आया है। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी भाई-बहन के खिलाफ धोखाधड़ी और विश्वासघात की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज ली है।
मामला इंद्रा मार्केट स्थित दुकान नंबर 22 से जुड़ा है, जिसे वर्ष 1977 में नगर परिषद ने खुली बोली के माध्यम से गुरचरण सिंह को अलॉट किया था। मामले का खुलासा तब हुआ जब गुरचरण सिंह ने प्रदेश सरकार की स्वामित्व योजना के तहत दुकान अपने नाम करवाने नगर निगम पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि दुकान 18 जनवरी 2010 से आरोपियों के नाम दर्ज है। निगम अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब न देने पर उन्होंने कष्ट निवारण समिति की बैठक में शिकायत की। इस पर कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी के आदेश पर जांच कराई गई।
शिकायत में बुजुर्ग गुरचरण सिंह ने बताया कि वह वर्षों तक दुकान पर फर्टिलाइजर, खाद और खेती-बाड़ी से संबंधित सामान का कारोबार करते रहे। वर्ष 2003 तक उन्होंने स्वयं दुकान संभाली, लेकिन इसके बाद गंभीर बीमारी के चलते उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। दिल की बीमारी बढ़ने पर हार्ट सर्जरी भी करानी पड़ी, जिसके कारण वे नियमित रूप से दुकान पर नहीं बैठ पाए।
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बीमारी के दौरान सहयोग के उद्देश्य से उन्होंने अपने रिश्तेदार मनमोहन सिंह को दुकान के काम में शामिल किया। मनमोहन की बहन सुरेंद्र कौर ने भी इस पूरे प्रकरण में शामिल बताई गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार मनमोहन सिंह के पास पहले से ही इंद्रा मार्किट में दुकान नंबर 23, 24 और 25 अलॉट थीं।
गुरचरण सिंह का आरोप है कि उनकी अस्वस्थता का फायदा उठाकर मनमोहन सिंह ने साजिश रच फर्जी दस्तावेज के आधार पर दुकान नंबर 22 पहले मनमोहन सिंह और बाद में उसकी बहन सुरेंद्र कौर के नाम ट्रांसफर कर दी गई। उधर, थाना शहर पुलिस प्रभारी नरेंद्र ने बताया कि मामले में आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
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यमुनानगर। संतपुरा रोड के रहने वाले 80 वर्षीय बुजुर्ग गुरचरण सिंह की दुकान को उनके ही रिश्तेदारों की ओर से फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने मामला सामने आया है। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी भाई-बहन के खिलाफ धोखाधड़ी और विश्वासघात की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज ली है।
मामला इंद्रा मार्केट स्थित दुकान नंबर 22 से जुड़ा है, जिसे वर्ष 1977 में नगर परिषद ने खुली बोली के माध्यम से गुरचरण सिंह को अलॉट किया था। मामले का खुलासा तब हुआ जब गुरचरण सिंह ने प्रदेश सरकार की स्वामित्व योजना के तहत दुकान अपने नाम करवाने नगर निगम पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि दुकान 18 जनवरी 2010 से आरोपियों के नाम दर्ज है। निगम अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब न देने पर उन्होंने कष्ट निवारण समिति की बैठक में शिकायत की। इस पर कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी के आदेश पर जांच कराई गई।
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शिकायत में बुजुर्ग गुरचरण सिंह ने बताया कि वह वर्षों तक दुकान पर फर्टिलाइजर, खाद और खेती-बाड़ी से संबंधित सामान का कारोबार करते रहे। वर्ष 2003 तक उन्होंने स्वयं दुकान संभाली, लेकिन इसके बाद गंभीर बीमारी के चलते उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। दिल की बीमारी बढ़ने पर हार्ट सर्जरी भी करानी पड़ी, जिसके कारण वे नियमित रूप से दुकान पर नहीं बैठ पाए।
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बीमारी के दौरान सहयोग के उद्देश्य से उन्होंने अपने रिश्तेदार मनमोहन सिंह को दुकान के काम में शामिल किया। मनमोहन की बहन सुरेंद्र कौर ने भी इस पूरे प्रकरण में शामिल बताई गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार मनमोहन सिंह के पास पहले से ही इंद्रा मार्किट में दुकान नंबर 23, 24 और 25 अलॉट थीं।
गुरचरण सिंह का आरोप है कि उनकी अस्वस्थता का फायदा उठाकर मनमोहन सिंह ने साजिश रच फर्जी दस्तावेज के आधार पर दुकान नंबर 22 पहले मनमोहन सिंह और बाद में उसकी बहन सुरेंद्र कौर के नाम ट्रांसफर कर दी गई। उधर, थाना शहर पुलिस प्रभारी नरेंद्र ने बताया कि मामले में आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।