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गुरु कृपा बिना वास्तविक सुख असंभव : वंशिका भारती
Mon, 30 Jun 2025 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 30 Jun 2025 12:43 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में साप्ताहिक सत्संग हुआ। साध्वी वंशिका भारती ने सत्संग में गुरु कृपा की महिमा समझाई। कहा कि हम अपने जीवन में सुखी रहने के लिए कितने ही प्रयास करते हैं, पर आजीवन क्षणिक सुख रूपी भ्रम में फंस कर वास्तविक सुख से वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने बताया कि जिसे आज हम सुख की संज्ञा देते हैं, वह केवल सुख की छाया मात्र है। जीवन में गुरु कृपा की अनुभूति किए बिना वास्तविक सुख का अनुभव होना असंभव है, क्योंकि जिन सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए हम पूरा जीवन लगा देते हैं, वे सुख गुरु कृपा से एक क्षण में ही शिष्य की झोली में आ गिरते हैं।
साध्वी ने कहा कि पूर्ण गुरु की शरण में जाकर उनसे ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति करनी है। इसके पश्चात निरंतर ध्यान, साधना व गुरु आज्ञा में चलते हुए इस बात का भली-भांति अनुभव कर पाते हैं कि गुरु कृपा के बिना मानव जीवन सूखे वृक्ष जैसा है। गुरु के सानिध्य में जाकर जब हम मन, वचन व कर्म को गुरु के महान व दिव्य आदर्शों में ढालते हैं, तभी मन व मस्तिष्क के विचार सुंदर होते हैं। इस दौरान साध्वी वंशिका भारती व अन्य साध्वी बहनों ने भजन संकीर्तन से भक्तों को भाव विभोर कर दिया।
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जगाधरी। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में साप्ताहिक सत्संग हुआ। साध्वी वंशिका भारती ने सत्संग में गुरु कृपा की महिमा समझाई। कहा कि हम अपने जीवन में सुखी रहने के लिए कितने ही प्रयास करते हैं, पर आजीवन क्षणिक सुख रूपी भ्रम में फंस कर वास्तविक सुख से वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने बताया कि जिसे आज हम सुख की संज्ञा देते हैं, वह केवल सुख की छाया मात्र है। जीवन में गुरु कृपा की अनुभूति किए बिना वास्तविक सुख का अनुभव होना असंभव है, क्योंकि जिन सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए हम पूरा जीवन लगा देते हैं, वे सुख गुरु कृपा से एक क्षण में ही शिष्य की झोली में आ गिरते हैं।
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साध्वी ने कहा कि पूर्ण गुरु की शरण में जाकर उनसे ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति करनी है। इसके पश्चात निरंतर ध्यान, साधना व गुरु आज्ञा में चलते हुए इस बात का भली-भांति अनुभव कर पाते हैं कि गुरु कृपा के बिना मानव जीवन सूखे वृक्ष जैसा है। गुरु के सानिध्य में जाकर जब हम मन, वचन व कर्म को गुरु के महान व दिव्य आदर्शों में ढालते हैं, तभी मन व मस्तिष्क के विचार सुंदर होते हैं। इस दौरान साध्वी वंशिका भारती व अन्य साध्वी बहनों ने भजन संकीर्तन से भक्तों को भाव विभोर कर दिया।
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