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आसमान पर टिकी धान उत्पादकों की निगाहें
ब्यूरो/अमर उजाला,यमुनानगर
Updated Sat, 09 Jul 2016 12:11 AM IST
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खेती
- फोटो : ब्यूरो
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यमुनानगर। भले ही दो-तीन जुलाई को मानसून ने दस्तक दी, लेकिन उसके बाद बादल बिन बरसे ही लौट रहे हैं। वहीं, कई ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त बिजली आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में खासकर धान उत्पादकों को फसल की सिंचाई को लेकर चिंता सताने लगी है। ऐसे में किसानों की निगाहें आसमान पर टिक गई हैं।
जिले में इस बार 70 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई का काम चल रहा है। अब तक लगभग 80 प्रतिशत फसल की रोपाई का काम पूरा हो चुका है। खिजराबाद व साढौरा क्षेत्र में भूजल स्तर काफी नीचे है और किसान धान की सिंचाई को लेकर चिंतित हैं।
खिजराबाद के किसान संजीव, महेश, गुरबाज, दुखीराम ने बताया कि फसल की सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति भी नहीं मिल पा रही है। बदरा भी नहीं बरस रहे, ऐसे में चिंता स्वाभाविक है।
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धान उत्पादकों पर दोहरी मार
किसान विरेंद्र सिंह, राजेश, बीराराम, कृष्णपाल, संदीप सिंह, गुरमुख सिंह, कर्मबीर, हरपाल सिंह आदि का कहना है कि एक तरफ मौसम फसल के अनुकूल नहीं है, उस पर फसल की रोपाई के लिए पर्याप्त लेबर भी नहीं मिल पा रही है।
किसान को मजबूरन किसी प्रकार लेबर को ढूंढ उन्हें फसल रोपाई के लिए अधिक रेट देना पड़ रहा है। साथ ही फसल की सिंचाई के लिए भी कृत्रिम साधनों पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में धान उत्पादकों पर दोहरी मार पड़ रही है।
इससे राहत पाने को वह सुबह-शाम बरसात के लिए इंद्र देव को मनाने में लगे हैं।
लागत से डेढ़ गुना अधिक तय हो धान का रेट
भाकियू के जिला प्रधान संदीप (संजू) ने कहा कि भाकियू ने 2013 में धान की लागत पता लगाने के लिए हिसार यूनिवर्सिटी की मदद से शोध किया था, जिसमें प्रति क्विंटल धान की फसल पर 1805 रुपये लागत आने का आंकड़ा मिला था।
जबकि मौजूदा समय में लागत करीब 1900 रुपये आ रही है। बीते सीजन में धान का रेट 1430 रुपये मिला, जो कि लागत से करीब 450 रुपये कम है। अबकी बार बरसात कम होने के आसार हैं। इसके कारण किसानों को धान की सिंचाई पर और अधिक खर्च करने की जरूरत पड़ेगी।
सरकार से धान का रेट स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक लागत से डेढ़ गुना अधिक तय किए जाने की मांग होगी।
वर्जन
जिले में 70 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की जा रही है। इसमें 80 प्रतिशत धान की रोपाई का काम पूरा हो चुका है।
धान के साथ ही सीजन में विभिन्न तरह की फसली बीमारियों से बचने व धान की सीधी बिजाई के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
डॉ. अदित्य प्रताप डबास, डीडीए, कृषि विभाग
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जिले में इस बार 70 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई का काम चल रहा है। अब तक लगभग 80 प्रतिशत फसल की रोपाई का काम पूरा हो चुका है। खिजराबाद व साढौरा क्षेत्र में भूजल स्तर काफी नीचे है और किसान धान की सिंचाई को लेकर चिंतित हैं।
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खिजराबाद के किसान संजीव, महेश, गुरबाज, दुखीराम ने बताया कि फसल की सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति भी नहीं मिल पा रही है। बदरा भी नहीं बरस रहे, ऐसे में चिंता स्वाभाविक है।
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धान उत्पादकों पर दोहरी मार
किसान विरेंद्र सिंह, राजेश, बीराराम, कृष्णपाल, संदीप सिंह, गुरमुख सिंह, कर्मबीर, हरपाल सिंह आदि का कहना है कि एक तरफ मौसम फसल के अनुकूल नहीं है, उस पर फसल की रोपाई के लिए पर्याप्त लेबर भी नहीं मिल पा रही है।
किसान को मजबूरन किसी प्रकार लेबर को ढूंढ उन्हें फसल रोपाई के लिए अधिक रेट देना पड़ रहा है। साथ ही फसल की सिंचाई के लिए भी कृत्रिम साधनों पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में धान उत्पादकों पर दोहरी मार पड़ रही है।
इससे राहत पाने को वह सुबह-शाम बरसात के लिए इंद्र देव को मनाने में लगे हैं।
लागत से डेढ़ गुना अधिक तय हो धान का रेट
भाकियू के जिला प्रधान संदीप (संजू) ने कहा कि भाकियू ने 2013 में धान की लागत पता लगाने के लिए हिसार यूनिवर्सिटी की मदद से शोध किया था, जिसमें प्रति क्विंटल धान की फसल पर 1805 रुपये लागत आने का आंकड़ा मिला था।
जबकि मौजूदा समय में लागत करीब 1900 रुपये आ रही है। बीते सीजन में धान का रेट 1430 रुपये मिला, जो कि लागत से करीब 450 रुपये कम है। अबकी बार बरसात कम होने के आसार हैं। इसके कारण किसानों को धान की सिंचाई पर और अधिक खर्च करने की जरूरत पड़ेगी।
सरकार से धान का रेट स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक लागत से डेढ़ गुना अधिक तय किए जाने की मांग होगी।
वर्जन
जिले में 70 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की जा रही है। इसमें 80 प्रतिशत धान की रोपाई का काम पूरा हो चुका है।
धान के साथ ही सीजन में विभिन्न तरह की फसली बीमारियों से बचने व धान की सीधी बिजाई के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
डॉ. अदित्य प्रताप डबास, डीडीए, कृषि विभाग