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Yamuna Nagar News: संपत्ति कर ः छूट के बाद भी लक्ष्य से आठ करोड़ कम रही नगर निगम की आय
Tue, 02 Apr 2024 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 02 Apr 2024 02:39 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सालभर ब्याज तो कभी मूल में छूट देने के बाद भी नगर निगम की संपत्ति कर से आठ करोड़ रुपये की आय कम हुई। क्योंकि वित्तवर्ष 2023-24 के निगम बजट में संपत्ति कर से 25 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य था, पर 31 मार्च को वित्तवर्ष खत्म होने तक 16.84 करोड़ रुपये की आय हो पाई।
आय लक्ष्य में पिछड़ने में निवर्तमान पार्षद निगम अफसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका आरोप है कि बड़े बकायेदारों पर कार्रवाई नोटिस से आगे नहीं बढ़ रही, तभी हर वर्ष आय लक्ष्य में नगर निगम पिछड़ रहा है। नितर्वमान पार्षद रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने कहा कि सरकारी विभागों से लेकर अन्य संपत्ति कर के कई बड़े बकायेदार हैं। इन पर संपत्ति कर की करोड़ों रुपये की राशि बकाया हैं।
इनसे संपत्ति कर की रिकवरी के लिए वर्षों से नगर निगम की कार्रवाई पत्राचार करने या नोटिस देने तक सिमटी है। जबकि मामले में कोर्ट के जरिए रिकवरी कराए जाने की जरूरत हैं। लेकिन ऐसा न कर संपत्ति कर के बड़े बकायेदारों पर अफसर मेहरबान नजर आते हैं। यही वजह है कि हर वित्तवर्ष के बजट में संपत्ति कर से आय के लक्ष्य में नगर निगम पिछड़ जाता है।
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इस बार भी लक्ष्य से आठ करोड़ आय कम हुई, जिसकी रिकवरी होती तो यही राशि शहर के विकास कार्यों में काम आती। इस तरह शहर का विकास भी प्रभावित होता है। इसलिए मामले को गंभीरता से लेकर अफसरों को संपत्ति कर के बड़े बकायेदारों से कोर्ट के जरिए रिकवरी कराने के प्रयास होने चाहिए।
वित्तवर्ष में संपत्ति कर से 25 करोड़ आय का लक्ष्य था। 31 मार्च तक 16.84 करोड़ आय हो पाई। 31 मार्च को संपत्ति कर भुगतान करने पर पूरा ब्याज माफ सहित मूल में 15 फीसद छूट की स्कीम खत्म हो गई है। अब संपत्ति मालिकों से ब्याज सहित पूरा संपत्ति कर लिया जाएगा। न देने पर नोटिस देकर संपत्ति सील की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। - अजय वालिया, क्षेत्रीय कराधान अधिकारी, नगर निगम।
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यमुनानगर। सालभर ब्याज तो कभी मूल में छूट देने के बाद भी नगर निगम की संपत्ति कर से आठ करोड़ रुपये की आय कम हुई। क्योंकि वित्तवर्ष 2023-24 के निगम बजट में संपत्ति कर से 25 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य था, पर 31 मार्च को वित्तवर्ष खत्म होने तक 16.84 करोड़ रुपये की आय हो पाई।
आय लक्ष्य में पिछड़ने में निवर्तमान पार्षद निगम अफसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका आरोप है कि बड़े बकायेदारों पर कार्रवाई नोटिस से आगे नहीं बढ़ रही, तभी हर वर्ष आय लक्ष्य में नगर निगम पिछड़ रहा है। नितर्वमान पार्षद रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने कहा कि सरकारी विभागों से लेकर अन्य संपत्ति कर के कई बड़े बकायेदार हैं। इन पर संपत्ति कर की करोड़ों रुपये की राशि बकाया हैं।
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इनसे संपत्ति कर की रिकवरी के लिए वर्षों से नगर निगम की कार्रवाई पत्राचार करने या नोटिस देने तक सिमटी है। जबकि मामले में कोर्ट के जरिए रिकवरी कराए जाने की जरूरत हैं। लेकिन ऐसा न कर संपत्ति कर के बड़े बकायेदारों पर अफसर मेहरबान नजर आते हैं। यही वजह है कि हर वित्तवर्ष के बजट में संपत्ति कर से आय के लक्ष्य में नगर निगम पिछड़ जाता है।
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इस बार भी लक्ष्य से आठ करोड़ आय कम हुई, जिसकी रिकवरी होती तो यही राशि शहर के विकास कार्यों में काम आती। इस तरह शहर का विकास भी प्रभावित होता है। इसलिए मामले को गंभीरता से लेकर अफसरों को संपत्ति कर के बड़े बकायेदारों से कोर्ट के जरिए रिकवरी कराने के प्रयास होने चाहिए।
वित्तवर्ष में संपत्ति कर से 25 करोड़ आय का लक्ष्य था। 31 मार्च तक 16.84 करोड़ आय हो पाई। 31 मार्च को संपत्ति कर भुगतान करने पर पूरा ब्याज माफ सहित मूल में 15 फीसद छूट की स्कीम खत्म हो गई है। अब संपत्ति मालिकों से ब्याज सहित पूरा संपत्ति कर लिया जाएगा। न देने पर नोटिस देकर संपत्ति सील की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। - अजय वालिया, क्षेत्रीय कराधान अधिकारी, नगर निगम।