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Yamuna Nagar News: सरकारी धान के घोटाले में राइस मिलर दंपती की संपत्तियां होंगी अटैच

Sun, 16 Nov 2025 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 16 Nov 2025 01:26 AM IST
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Properties of rice miller couple to be attached in government paddy scam
प्रतापनगर ​स्थित राइस मिल में धान के बैग की गिनती करती टीम। आर्काइव - फोटो : kishatwar news
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। सात राइस मिलों में करीब 75 करोड़ रुपये के धान की हेराफेरी मामले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग सख्त हो गया है। विभाग राइस मिलर की संपत्ति अटैच करेगा। संपत्ति अटैच करने के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक ने डीएफएससी को पत्र लिखा है। इसके बाद राजस्व विभाग यह रिकॉर्ड जुटाने में जुट जाएगा कि आरोपी राइस मिलर व उनकी पत्नी के नाम पर कुल कितनी संपत्तियां हैं।
सातों राइस मिलों में मांडखेड़ी रोड निवासी संदीप सिंगला व उनकी पत्नी रितिका सिंगला पार्टनर हैं। इनकी राइस मिलों की जगह के अलावा घर व प्रतिष्ठानों की संपत्तियों को अटैच किया जाएगा। संदीप सिंगला व रितिका सिंगला के नाम प्रतापनगर में चार, रणजीतपुर में दो व छछरौली में एक राइस मिल है।
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प्रतापनगर में अंजनी नंदन एग्रो फूड्स, मैसेज बद्री विशाल एग्रो फूड्स, मोरवी नंदन एग्रो फूड्स व श्री जी एग्रो फूड्स नाम से राइस मिल हैं। इन राइस मिलों में 17,474 मीट्रिक टन धान का स्टॉक कम मिला, जिसकी कीमत करीब 45 करोड़ रुपये है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक अंशज सिंह ने खुद इन चारों मिलों में जाकर जांच की थी। जैसे-जैसे गड़बड़ी सामने आती रही तो घोटाले की परतें भी खुलती चली गई।
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इसी तरह छछरौली में स्थित सिंगला एग्रो फूड को 3995 मीट्रिक टन धान दिया गया था। जब मौके पर जांच की गई तो केवल 850 मीट्रिक टन धान मिला। शिकायत में बताया गया कि राइस मिलर द्वारा 3145 मीट्रिक टन धान का गबन किया है। रणजीतपुर स्थित श्रीश्री बाला जी एग्रो इंडस्ट्री को 5992 मीट्रिक टन धान मिलिंग के लिए दिया गया था, लेकिन जब भौतिक सत्यापन किया गया तो 2450 मीट्रिक टन धान मिला और 3542 मीट्रिक टन धान का गबन मिला। सातों राइस मिलों में 75 करोड़ रुपये का धान घोटाला सामने आया है।
अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध

राइस मिलों में धान घोटाला सामने आने के बाद अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध हो गई है। खासकर फूड इंस्पेक्टरों की नींद उड़ी हुई है जिनकी ड्यूटी खरीद के दौरान अनाज मंडियों में लगी हुई थी। सातों राइस मिलों में 24161 मीट्रिक टन धान बनता है। इसके धान के पांच लाख से ज्यादा बैग बनते हैं, क्योंकि एक बैग में केवल 37.50 किलोग्राम धान ही आता है। पांच लाख से ज्यादा बैग को किसी एक कमरे में या फिर किसी ग्राउंड में नहीं रखा जा सकता। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि मंडियों से राइस मिलों में धान गया भी या नहीं। ऐसे में फर्जी गेट पास काटे जाने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।

संदीप सिंगला व उनकी पत्नी रितिका सिंगला सात राइस मिलों में पार्टनर हैं। इन सभी में धान का बड़ा गबन सामने आया है।दोनों की संपत्तियों को अटैच किया जाएगा। इसके लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक की तरफ से हमारे पास पत्र आ गया है। यह पत्र डीसी को भेजा जाएगा। इसके बाद संपत्ति को अटैच करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। - जतिन मित्तल, डीएफएससी, यमुनानगर।
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