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फर्जीवाड़ा : मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने डीआरओ को भेजा 61 पेज का पुलिंदा, तब हुई एफआईआर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Dec 2020 12:38 AM IST
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Principal Secretary to Chief Minister sends DRO to 61-page bundle, FIR filed
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर सरकारी और गैरकृषि भूमि का पंजीकरण कर फसल बेचने के मामले में सरकारी विभागों की लापरवाही भी सामने आई है। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कृषि और किसान कल्याण विभाग, राजस्व विभाग और पंचायती राज विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। अधिकारी अब पोर्टल पर ही इस फर्जीवाड़े का ठीकरा फोड़ने के प्रयास में हैं, जबकि एनआईसी द्वारा की गई जांच के बाद मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने 61 पेज का पुलिंदा राजस्व विभाग को भेजा था। जिसमें जमीन के एक-एक किला नंबर से लेकर रजिस्ट्रेशन आईडी, अनाज मंडी का गेट पास और रजिस्ट्रेशन करने वाले कथित किसान का मोबाइल नंबर भी दिया गया है। यहां तक की बैंक अकाउंट नंबर, आढ़ती का नाम और ट्रांजेक्शन की तिथि भी दी गई है। इसके बावजूद जिन आरोपियों के नाम एफआईआर में दर्ज किए गए हैं। उनकी अभी तक पहचान भी नहीं की जा सकी है।
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ऐसा भी होता: एक व्यक्ति के पास पांच सौ एकड़ जमीन
हैरत इस बात की है कि जिन तीन आरोपी रोहताश, राजेश और राहुल अग्रवाल के नाम एफआईआर में दिए गए हैं। इन तीनों ने ही 1200 एकड़ में धान की फसल दिखा दी। इनमें से एक ने 500, दूसरे ने 400 और तीसरे आरोपी ने 300 एकड़ में फसल का पंजीकरण किया। फिलहाल राजस्व रिकार्ड में ऐसा कोई भी किसान नहीं है जिसने इतने बड़े पैमाने पर धान की फसल लगाई हो। यह रिकॉर्ड तक क्रॉस चेक हुआ तो धांधली पकड़ में आई।
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पंजीकरण के दौरान ही अपलोड किए गए दस्तावेज
पोर्टल पर फसल पंजीकृत करने के दौरान ही आधार कार्ड, फर्द, बैंक खाता और मोबाइल नंबर तक आनलाइन अपलोड किए गए थे। मंडी में फसल बिक्री के लिए किसान को टोकन दिया जाता है। जिसका मैसेज भी उनके पंजीकृत मोबाइल पर आता है। फसल का भुगतान भी सीधे बैंक खाते में होता है।
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इस बार हमने नहीं की वेरिफिकेशन : डीआरओ
इस संबंध में जिला राजस्व अधिकारी अभिषेक का कहना है कि मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण के बाद कृषि विभाग के साथ फसल का वेरिफिकेशन किया जाता था, लेकिन इस बार यह जिम्मेदारी राजस्व विभाग से ली गई। जबकि कृषि विभाग को इसकी वेरिफिकेशन की जानी चाहिए थे। जिले के कृषि योग्य रकबे में कौन सी फसल लगाई गई है, यह सारा डाटा कृषि विभाग के पास होता है। अब उन्होंने पोर्टल पर पंजीकरण करने वाले किसानों की फसल की जांच की या नहीं ये मुझे जानकारी नहीं है।
हमारे पास कोई आदेश नहीं : डीडीए
वहीं कृषि उपनिदेशक डॉ. सुरेंद्र यादव का कहना है कि पहले हमारे पास इस पोर्टल की जिम्मेदारी थी, लेकिन सीजन से कुछ समय पहले ही यह चंडीगढ़ मुख्यालय से आपरेट की जाने लगी। हमारे पास पोर्टल व किसान से संबंधित कोई जानकारी नहीं होती और ना ही मुख्यालय से हमें भौतिकी वेरिफिकेशन के कोई आदेश मिले।
गेट पास वाले सभी किसान फसल बेचने के लिए अधिकृत : मंडी सचिव
प्रतापनगर मंडी के सचिव अवतार सिंह का कहना है कि सरकार की तरफ से पंजीकृत किसानों के मोबाइल पर मैसेज भेजे गए थे। जिनके पास पोर्टल का गेट पास और मोबाइल का मैसेज आया था, केवल उन्हीं किसानों को पहले फसल बेचने के लिए बुलाया गया था। इस बार प्रतापनगर मंडी धान की खरीद पिछले साल से ज्यादा जरूर हुई है, लेकिन उसकी कई अन्य वजह भी हो सकती है।

इंवेस्टिगेशन किसी और के पास : एसएचओ
प्रतापनगर थाना प्रभारी सुभाष चंद का कहना है कि डीआरओ की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन इस मामले की जांच हमारे पास नहीं है। किस अधिकारी द्वारा की जा रही है, मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है।
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