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श्रावण शिवरात्रि को लेकर मंदिरों में धूमधाम, जलाभिषेक के लिए तैयार
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पातालेश्वर महादेव मंदिर में सावन के सोमवार को पूजा करते श्रद्धालु।
- फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। श्रावण की शिवरात्रि को लेकर जिले भर के शिवालय सज गए हैं। इस बार महादेव का जलाभिषेक दो दिन होगा। चूंकि चतुर्दशी तिथि दो दिन रहेगी। शिवरात्रि को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है और तमाम मंदिरों में जलाभिषेक को लेकर तैयारी हो रही है। शिवरात्रि पर कांवड़ियों के साथ अन्य भक्त भी महादेव का अभिषेक करने पहुंचेंगे। जिसके चलते मंगलवार को मंदिरों में भारी भीड़ रहेगी। इसे लेकर सभी मंदिर प्रबंधक समितियों सहित जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है।
पुलिस की ओर से जिले के सभी मंदिरों में कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। जिले के प्राचीनतम मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ होगी। जिसे नियंत्रित करने करने के लिए पुलिस के साथ गृहरक्षी, एनसीसी कैडेट्स सहित मंदिर कमेटी की ओर से स्वयंसेवक लगाए गए हैं। यातायात व्यवस्था न बिगड़े इसलिए सभी चौराहों पर कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। इस दौरान कलेसर स्थित कालेश्वर महादेव मंदिर, बूड़िया पातालेश्वर महादेव मंदिर, भाटली शिव मंदिर, सूर्यकुंड मंदिर अमादलपुर मंदिरों में सबसे ज्यादा भीड़ होगी। जिसे देखते हुए यहां पर विशेष प्रबंध किए गए हैं। पातालेश्वर महादेव मंदिर कमेटी के डॉ. सुधीर शर्मा ने बताया कि जलाभिषेक को लेकर विशेष प्रबंध किए गए हैं।
दो दिन होगा जलाभिषेक
इस साल भक्त दो दिन महादेव का जलाभिषेक कर सकेंगे। चूंकि जलाभिषेक की तिथि मंगलवार व बुधवार को पड़ रही है। बूडिया निवासी पंडित ललित शर्मा ने बताया कि शिवरात्रि श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस बार चतुर्दशी मंगलवार शाम को प्रारंभ होगी जो बुधवार रात तक रहेगी। ऐसे में मंगलवार व बुधवार दो दिन भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा।
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यह रहेगा तिथि व जलाभिषेक क्रम
सावन शिवरात्रि तिथि प्रारंभ : 26 जुलाई शाम 06 बजकर 46 मिनट से शुरू
सावन शिवरात्रि तिथि समाप्त : 27 जुलाई रात 09 बजकर 11 मिनट तक
जलाभिषेक मुहूर्त : 26 जुलाई शाम 07:24 बजे से रात 09:28 तक
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक (26 जुलाई)
अमृत काल : शाम 04 बजकर 53 मिनट से शाम 6 बजकर 41 मिनट तक (26 जुलाई)
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 03 बजकर 58 मिनट से 04 बजकर 46 मिनट तक (26 जुलाई)
निशिता काल पूजा समय : 27 जुलाई मध्यरात्रि 12:07 से 12:49 मिनट तक
सावन शिवरात्रि व्रत पारण : 27 जुलाई प्रात: 05.39 से 03.51 मध्याह्न
इस तरह करें पूजा
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि महादेव की पूजा के लिए सबसे पहले प्रात: स्नान आदि के बाद भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में भगवान शंकर का जलाभिषेक करें। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। सावन शिवरात्रि में मां पार्वती और गणेश की पूजा भी करें। भगवान शिव को गंगाजल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गन्ने का रस इत्यादि अर्पित करें। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर रोली, पुष्प, सफेद चंदन, बेलपत्र, धतूरा, कपूर, फल अर्पित करें। धूप, दीप, फल व फूल चढ़ाकर महादेव का ध्यान करें। शिव चालीसा, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव का पंचाक्षरी मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद महादेव की आरती करें।
इन बातों का रखें ध्यान
पंडित ललित ने बताया कि श्रावण शिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक करते समय मुख उत्तर दिशा की ओर रखें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल न चढ़ाएं। चूंकि यह दिशा भगवान शिव का प्रवेश द्वार मानी जाती है। सावन शिवरात्रि की पूजा के समय तांबे के लोटे से ही जलार्पित करें। दूध चढ़ाने के लिए स्टील या पीतल का लौटा लें। शिवलिंग पर जल की धारा बनाकर अर्पित करें।
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पुलिस की ओर से जिले के सभी मंदिरों में कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। जिले के प्राचीनतम मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ होगी। जिसे नियंत्रित करने करने के लिए पुलिस के साथ गृहरक्षी, एनसीसी कैडेट्स सहित मंदिर कमेटी की ओर से स्वयंसेवक लगाए गए हैं। यातायात व्यवस्था न बिगड़े इसलिए सभी चौराहों पर कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। इस दौरान कलेसर स्थित कालेश्वर महादेव मंदिर, बूड़िया पातालेश्वर महादेव मंदिर, भाटली शिव मंदिर, सूर्यकुंड मंदिर अमादलपुर मंदिरों में सबसे ज्यादा भीड़ होगी। जिसे देखते हुए यहां पर विशेष प्रबंध किए गए हैं। पातालेश्वर महादेव मंदिर कमेटी के डॉ. सुधीर शर्मा ने बताया कि जलाभिषेक को लेकर विशेष प्रबंध किए गए हैं।
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दो दिन होगा जलाभिषेक
इस साल भक्त दो दिन महादेव का जलाभिषेक कर सकेंगे। चूंकि जलाभिषेक की तिथि मंगलवार व बुधवार को पड़ रही है। बूडिया निवासी पंडित ललित शर्मा ने बताया कि शिवरात्रि श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस बार चतुर्दशी मंगलवार शाम को प्रारंभ होगी जो बुधवार रात तक रहेगी। ऐसे में मंगलवार व बुधवार दो दिन भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा।
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यह रहेगा तिथि व जलाभिषेक क्रम
सावन शिवरात्रि तिथि प्रारंभ : 26 जुलाई शाम 06 बजकर 46 मिनट से शुरू
सावन शिवरात्रि तिथि समाप्त : 27 जुलाई रात 09 बजकर 11 मिनट तक
जलाभिषेक मुहूर्त : 26 जुलाई शाम 07:24 बजे से रात 09:28 तक
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक (26 जुलाई)
अमृत काल : शाम 04 बजकर 53 मिनट से शाम 6 बजकर 41 मिनट तक (26 जुलाई)
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 03 बजकर 58 मिनट से 04 बजकर 46 मिनट तक (26 जुलाई)
निशिता काल पूजा समय : 27 जुलाई मध्यरात्रि 12:07 से 12:49 मिनट तक
सावन शिवरात्रि व्रत पारण : 27 जुलाई प्रात: 05.39 से 03.51 मध्याह्न
इस तरह करें पूजा
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि महादेव की पूजा के लिए सबसे पहले प्रात: स्नान आदि के बाद भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में भगवान शंकर का जलाभिषेक करें। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। सावन शिवरात्रि में मां पार्वती और गणेश की पूजा भी करें। भगवान शिव को गंगाजल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गन्ने का रस इत्यादि अर्पित करें। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर रोली, पुष्प, सफेद चंदन, बेलपत्र, धतूरा, कपूर, फल अर्पित करें। धूप, दीप, फल व फूल चढ़ाकर महादेव का ध्यान करें। शिव चालीसा, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव का पंचाक्षरी मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद महादेव की आरती करें।
इन बातों का रखें ध्यान
पंडित ललित ने बताया कि श्रावण शिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक करते समय मुख उत्तर दिशा की ओर रखें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल न चढ़ाएं। चूंकि यह दिशा भगवान शिव का प्रवेश द्वार मानी जाती है। सावन शिवरात्रि की पूजा के समय तांबे के लोटे से ही जलार्पित करें। दूध चढ़ाने के लिए स्टील या पीतल का लौटा लें। शिवलिंग पर जल की धारा बनाकर अर्पित करें।