{"_id":"5f6505248ebc3eb7052db382","slug":"pradarsan-yamuna-nagar-news-knl44680152","type":"story","status":"publish","title_hn":"पानीपत से पहले भी बिना किट के शव यहां आते रहे हैं। कर्मचारियों ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इससे परिजनों के साथ एंबुलेंस कर्मियों, दाह संस्कार करने वालों, साथ आने वाले नाते रिश्तेदारों के भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पानीपत से पहले भी बिना किट के शव यहां आते रहे हैं। कर्मचारियों ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इससे परिजनों के साथ एंबुलेंस कर्मियों, दाह संस्कार करने वालों, साथ आने वाले नाते रिश्तेदारों के भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।
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pradarsan
- फोटो : Yamuna Nagar
बाइक चोरी के आरोप में जिला जेल में निरुद्ध यूपी के गांव बरथा ग्याजूद्दीन निवासी हिमांशु की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। दो दिन पहले ही उसे करनाल से जगाधरी जेल में लाया गया था, जहां उसकी तबियत बिगड़ गई। परिजनों ने आरोप लगाया है कि हिमांशु की मौत कस्टडी में पुलिस की दी गई थर्ड डिग्री टॉर्चर की वजह से हुई है। उसके शरीर पर जगह जगह बड़े जख्म थे। परिजनों ने उसके फोटो मीडिया कर्मियों को दिखाए। युवक की टांगों से मांस छिलके की तरह अलग था। उसकी मौत की सूचना मिलते ही परिजन काफी संख्या में ग्रामीण के साथ अस्पताल पहुंचे। उन्होंने थर्ड डिग्री देने वाले पुलिस कर्मियों पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग को लेकर दो घंटे तक विरोध जताया और जज की मौजूदगी में युवक के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी की मांग रखी है। युवक का ड्यूटी मजिस्ट्रेट संदीप कौर की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया है। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने व जांच के बाद पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने का आश्वासन देकर शांत किया।
युवक के ताऊ ईश्वर सिंह ने बताया कि 11 सितंबर की सुबह साढ़े सात बजे डिटेक्टिव पुलिस उसके भतीजे हिमांशु को बाइक चोरी के मामले में अपने साथ ले गई थी। इसके बाद वे पुलिस से मिलने गए, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। उसे छुड़वाने के नाम पर धनराशि की मांग की गई। बाद में उन्हें पता लगा कि भतीजे को जेल भेज दिया गया है। शुक्रवार को पुलिस का फोन आया कि उनके भतीजे की हालत गंभीर है। सूचना पर अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है। उन्होंने हिमांशु के शव को देखा तो शरीर पर दिल दहला देने वाले जख्म मिले। आरोप है कि उसके भतीजे को पुलिस कस्टडी में बुरी तरह से पीटा गया। जिससे उसके शरीर पर गहरे घाव थी। पुलिस की मारपीट से ही उसके भतीजे की जेल में तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।
परिजनों का कहना है कि अगर हिमांशु ने चोरी की भी थी तो उसको सजा देना कोर्ट का काम है। हैवानियत करने का हक पुलिस को नहीं है। हंगामे की सूचना पर सिटी जगाधरी एसएचओ सुखबीर सिंह, खिजराबाद एसएचओ सुभाष चन्द, एसआई जोगेन्द्र सिंह, एसआई जगबीर समेत अन्य पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
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परिजनों ने ये भी आरोप लगाया कि पुलिस ने सात अन्य को भी गिरफ्तार किया। आरोप है कि पुलिस ने सौदेबाजी कर एक एक करके छह युवकों को छोड़ दिया। हिमांशु को भी पूरा केस बंद करने के लिए डेढ़ लाख मंगाने के लिए बोला गया। लेकिन उसके परिजन इतने रुपये जुटाने में असमर्थ थे। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने उसे बुरी तरह से पीटा। उसके बाद पुलिस ने उसे कोरोना टेस्ट कर क्वारंटीन के लिए करनाल भेजा। जहां से 16 सितंबर को जिला जेल लाया गया।
जिला जेल अधीक्षक संजीव पातड़ का कहना है कि हिमांशु जेल में 16 सितंबर को करनाल से शिफ्ट होकर आया था। 17 सितंबर को उसकी तबीयत बिगड़ने पर मेडिकल ऑफिसर को बुलाया और उपचार दिया गया। तबीयत अधिक बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए सिविल अस्पताल भिजवा दिया गया। जहां उसकी मौत हो गई। जेल के स्तर पर उसे इलाज दिलाने में कोई देरी हुई और न ही कोई खामी बरती गई। परिवार को भी पूरी घटना से अवगत करवाया गया।
जेल में तबीयत बिगड़ने से कस्टोडियन की मौत की सूचना पर हम अस्पताल गए थे। शव का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी व डॉक्टरों के पैनल से ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में करवाया गया है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट कार्रवाई कर रहे हैं। उन्हीं की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जोगिंद्र सिंह, स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट।
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युवक के ताऊ ईश्वर सिंह ने बताया कि 11 सितंबर की सुबह साढ़े सात बजे डिटेक्टिव पुलिस उसके भतीजे हिमांशु को बाइक चोरी के मामले में अपने साथ ले गई थी। इसके बाद वे पुलिस से मिलने गए, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। उसे छुड़वाने के नाम पर धनराशि की मांग की गई। बाद में उन्हें पता लगा कि भतीजे को जेल भेज दिया गया है। शुक्रवार को पुलिस का फोन आया कि उनके भतीजे की हालत गंभीर है। सूचना पर अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है। उन्होंने हिमांशु के शव को देखा तो शरीर पर दिल दहला देने वाले जख्म मिले। आरोप है कि उसके भतीजे को पुलिस कस्टडी में बुरी तरह से पीटा गया। जिससे उसके शरीर पर गहरे घाव थी। पुलिस की मारपीट से ही उसके भतीजे की जेल में तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।
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परिजनों का कहना है कि अगर हिमांशु ने चोरी की भी थी तो उसको सजा देना कोर्ट का काम है। हैवानियत करने का हक पुलिस को नहीं है। हंगामे की सूचना पर सिटी जगाधरी एसएचओ सुखबीर सिंह, खिजराबाद एसएचओ सुभाष चन्द, एसआई जोगेन्द्र सिंह, एसआई जगबीर समेत अन्य पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
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परिजनों ने ये भी आरोप लगाया कि पुलिस ने सात अन्य को भी गिरफ्तार किया। आरोप है कि पुलिस ने सौदेबाजी कर एक एक करके छह युवकों को छोड़ दिया। हिमांशु को भी पूरा केस बंद करने के लिए डेढ़ लाख मंगाने के लिए बोला गया। लेकिन उसके परिजन इतने रुपये जुटाने में असमर्थ थे। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने उसे बुरी तरह से पीटा। उसके बाद पुलिस ने उसे कोरोना टेस्ट कर क्वारंटीन के लिए करनाल भेजा। जहां से 16 सितंबर को जिला जेल लाया गया।
जिला जेल अधीक्षक संजीव पातड़ का कहना है कि हिमांशु जेल में 16 सितंबर को करनाल से शिफ्ट होकर आया था। 17 सितंबर को उसकी तबीयत बिगड़ने पर मेडिकल ऑफिसर को बुलाया और उपचार दिया गया। तबीयत अधिक बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए सिविल अस्पताल भिजवा दिया गया। जहां उसकी मौत हो गई। जेल के स्तर पर उसे इलाज दिलाने में कोई देरी हुई और न ही कोई खामी बरती गई। परिवार को भी पूरी घटना से अवगत करवाया गया।
जेल में तबीयत बिगड़ने से कस्टोडियन की मौत की सूचना पर हम अस्पताल गए थे। शव का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी व डॉक्टरों के पैनल से ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में करवाया गया है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट कार्रवाई कर रहे हैं। उन्हीं की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जोगिंद्र सिंह, स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट।