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नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन
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pradarsan
- फोटो : Yamuna Nagar
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नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण के खिलाफ वीरवार को काफी संख्या में लोग उमड़े। मजलिसे अहरार मंच, भाईचारा एकता मंच, सिख यूथ मंच, भीमराव अंबेडकर युवा मंच, मुस्लिम एकता मंच की अगुवाई में प्रदर्शनकारियों ने पहले पुराने हाईवे पर बाइक रैली निकाली। उसके बाद अनाजमंडी में जनसभा कर जुलूस के रूप में नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने डीसी मुकुल कुमार को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान अराजकता फैलाने वाले तत्वों को रोकने के लिए पहले से ही पुलिस ने कमर कस ली थी और भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को हेल्मेट और बुलेट प्रूफ जैकेट के साथ तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारियों को पहले ही चेतावनी दी गई थी कि अगर कुछ गलत किया तो उनसे सख्ती से निपटने के लिए पुलिस की पूरी तैयारी है। प्रदर्शन के चलते शहर में कई जगह जाम की स्थिति बनी रही।
भाईचारा एकता मंच से संजीव वालिया, जब्बार पोसवाल वकील, चरणजीत सिंह वकील, संजीव कुमार वकील, बलबीर सिंह, सुमित पाल, कारी सईदुज्ज्मा, कांग्रेस नेता सतपाल कौशिक, जाकिर हुुसैन आदि ने कहा कि संसद के दोनों सदनों में अधिवेशन के बीच केन्द्र की भाजपा सरकार का बहुमत होने से नागरिकता संशोधन बिल पास किया गया और भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है। किसी बिल को धर्म के आधार पर कानून बनाया और एक विशेष धर्म को इस से बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि देश का संविधान धर्म निरपेक्षता का प्रतीक है और ऐसे संविधान के होते हुए एक विशेष धर्म को बिल से बाहर रखकर कानून नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार देश के संविधान को बदलने की डगर पर चल पड़ी है। जो कि देश के हित में सही नहीं है। देश के सभी धर्म और जाति के लोग प्रभावित हो रहे है, जिन्हें संविधान बनाने से पहले देश में तंग व परेशान किया जाता रहा है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से निवेदन किया कि करोड़ों भारतवासियों, सभी धर्मों व जातियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नागरिकता कानून में किए गए संशोधन को रद्द करें।
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भाईचारा एकता मंच से संजीव वालिया, जब्बार पोसवाल वकील, चरणजीत सिंह वकील, संजीव कुमार वकील, बलबीर सिंह, सुमित पाल, कारी सईदुज्ज्मा, कांग्रेस नेता सतपाल कौशिक, जाकिर हुुसैन आदि ने कहा कि संसद के दोनों सदनों में अधिवेशन के बीच केन्द्र की भाजपा सरकार का बहुमत होने से नागरिकता संशोधन बिल पास किया गया और भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है। किसी बिल को धर्म के आधार पर कानून बनाया और एक विशेष धर्म को इस से बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि देश का संविधान धर्म निरपेक्षता का प्रतीक है और ऐसे संविधान के होते हुए एक विशेष धर्म को बिल से बाहर रखकर कानून नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार देश के संविधान को बदलने की डगर पर चल पड़ी है। जो कि देश के हित में सही नहीं है। देश के सभी धर्म और जाति के लोग प्रभावित हो रहे है, जिन्हें संविधान बनाने से पहले देश में तंग व परेशान किया जाता रहा है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से निवेदन किया कि करोड़ों भारतवासियों, सभी धर्मों व जातियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नागरिकता कानून में किए गए संशोधन को रद्द करें।
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