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महंगे करंट पर भड़का इनेलो, सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Tue, 06 Oct 2015 12:21 AM IST
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बिजली के दाम लगातार बढ़ने पर भड़के इनेलो कार्यकर्ताओं ने सोमवार को भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इससे पहले दो घंटे तक जगाधरी अनाज मंडी गेट पर धरना दिया। इनेलो नेताओं ने सरकार को जमकर कोसा। धरने के बाद लघु सचिवालय में डीसी डा. एसएस फुलिया को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। बिजली के दाम कम करने की मांग की।
इनेलो नेता व पूर्व रादौर विधायक बीएल सैनी और पूर्व यमुनानगर विधायक दिलबाग सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ता सोमवार सुबह जगाधरी अनाज मंडी गेट पर एकत्रित हुए। सुबह 11 से लेकर दोपहर एक बजे तक धरना प्रदर्शन किया। इनेलो नेताओं ने सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की।
धरने के बाद दोपहर एक बजे कार्यकर्ता सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए नेशनल हाईवे 73 पर आ गए। हाईवे से प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय में पहुंचे। पूर्व विधायक दिलबाग सिंह व बीएल सैनी ने डीसी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
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प्रदर्शन में ईश्वर सिंह पलाका, जाहिद खान, दुर्गा प्रसाद, मिश्रा, गुरविंदर तेजली, डिप्टी मेयर रामपाल, विजय बब्बर, बृजपाल छप्पर, दलमीरा राम सैनी, रामपाल, राजकुमार बुबका, चरण सिंह, महीपाल, बलींद्र, बलबीर कौर, बीके मेहता, विक्रम, चवन्नी जैन, सुभाष आदि शामिल हुए।
इनेलो नेताओं ने कहा कि प्रदेश में पिछले एक साल से बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। इससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली वितरण कंपनियों ने न केवल अपनी कारगुजारियों को छिपाते हुए बिजली की दरों में वृद्धि की है, बल्कि घरेलू स्तर पर प्रति माह बिजली की 800 यूनिट उच्चतम खपत की सीमा को घटा कर पांच सौ यूनिट कर दिया है।
बिजली की पांच सौ यूनिट से अधिक खपत पर 6.75 रुपये प्रति यूनिट बिजली की दर और 1.69 रुपये फ्यूज सरचार्ज की दरें निर्धारित की हैं। बिजली शुल्क और नगर पालिका शुल्क 15 पैसे प्रति यूनिट एवं मीटर जार्ज को मिलाकर प्रति यूनिट लगभग 8.65 रुपये उपभोक्ताओं को अदा करने पड़ रहे हैं।
जबकि उपभोक्ताओं को उक्त बिजली की खपत के लिए पहले लगभग 5.50 रुपये प्रति यूनिट अदा करते होते थे। इससे स्पष्ट है कि भाजपा सरकार के समय में बिजली की दरों में लगभग 50 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक ही वृद्धि हुई है।
इनेलो नेताओं ने कहा कि बिजली और फ्यूल सरचार्ज की दरों में वृद्धि का कोई औचित्य नहीं है। पिछले दस साल में प्रदेश में बिजली की मांग को ध्यान में न रखते हुए बिजली वितरण कंपनियों ने प्राइवेट बिजली उत्पादकों के साथ बिजली खरीद के समझौते किए हैं।
जिसके कारण प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों को प्राइवेट बिजली उत्पादकों से बिजली न खरीदने की अवस्था में प्रति वर्ष दो सौ से तीन सौ करोड़ रुपये का नुकसान होता है।
इनेलो नेताओं ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक इकाइयां और व्यवसायिक संस्थाएं अपने कारोबार बंद करके दूसरे प्रदेशों में जा रही हैं। इसका मुख्य कारण बिजली की बढ़ती हुई दरें हैं। वर्तमान में इकाइयों को नौ रुपये प्रति किलोवाट से अधिक दरों के हिसाब से बिजली के बिल अदा करने पड़ते हैं, जो पूरे देश में सबसे अधिक हैं।
नेताओं ने कहा कि सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में दिसंबर, 2014 और अप्रैल, 2015 में दो बार बिजली और फ्यूल सरचार्ज की दरों में बढ़ोतरी हुई है। आमतौर पर फ्यूल सरचार्ज तब बढ़ाया जाता है जब इंधन की कीमतों में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त हरियाणा में बिजली नियामक आयोग द्वारा 2015-16 के लिए बिजली वितरण कंपनियों के लिए जो दरें निर्धारित की गई हैं वे कमरतोड़ हैं, जिसके कारण उपभोक्ताओं को महंगे बिजली बिल अदा करने पड़ते हैं।
कब-कब हुई वृद्धि :
दिसंबर, 2014 में फ्यूल सरचार्ज में 17 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि।
अप्रैल 2015 में आठ प्रतिशत की बिजली दरों में वृद्धि।
अगस्त में फ्यूल सरचार्ज में पांच पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि।
सितंबर माह में 20 प्रतिशत की बिजली दरों में वृद्धि।
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इनेलो नेता व पूर्व रादौर विधायक बीएल सैनी और पूर्व यमुनानगर विधायक दिलबाग सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ता सोमवार सुबह जगाधरी अनाज मंडी गेट पर एकत्रित हुए। सुबह 11 से लेकर दोपहर एक बजे तक धरना प्रदर्शन किया। इनेलो नेताओं ने सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की।
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धरने के बाद दोपहर एक बजे कार्यकर्ता सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए नेशनल हाईवे 73 पर आ गए। हाईवे से प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय में पहुंचे। पूर्व विधायक दिलबाग सिंह व बीएल सैनी ने डीसी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
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प्रदर्शन में ईश्वर सिंह पलाका, जाहिद खान, दुर्गा प्रसाद, मिश्रा, गुरविंदर तेजली, डिप्टी मेयर रामपाल, विजय बब्बर, बृजपाल छप्पर, दलमीरा राम सैनी, रामपाल, राजकुमार बुबका, चरण सिंह, महीपाल, बलींद्र, बलबीर कौर, बीके मेहता, विक्रम, चवन्नी जैन, सुभाष आदि शामिल हुए।
इनेलो नेताओं ने कहा कि प्रदेश में पिछले एक साल से बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। इससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली वितरण कंपनियों ने न केवल अपनी कारगुजारियों को छिपाते हुए बिजली की दरों में वृद्धि की है, बल्कि घरेलू स्तर पर प्रति माह बिजली की 800 यूनिट उच्चतम खपत की सीमा को घटा कर पांच सौ यूनिट कर दिया है।
बिजली की पांच सौ यूनिट से अधिक खपत पर 6.75 रुपये प्रति यूनिट बिजली की दर और 1.69 रुपये फ्यूज सरचार्ज की दरें निर्धारित की हैं। बिजली शुल्क और नगर पालिका शुल्क 15 पैसे प्रति यूनिट एवं मीटर जार्ज को मिलाकर प्रति यूनिट लगभग 8.65 रुपये उपभोक्ताओं को अदा करने पड़ रहे हैं।
जबकि उपभोक्ताओं को उक्त बिजली की खपत के लिए पहले लगभग 5.50 रुपये प्रति यूनिट अदा करते होते थे। इससे स्पष्ट है कि भाजपा सरकार के समय में बिजली की दरों में लगभग 50 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक ही वृद्धि हुई है।
इनेलो नेताओं ने कहा कि बिजली और फ्यूल सरचार्ज की दरों में वृद्धि का कोई औचित्य नहीं है। पिछले दस साल में प्रदेश में बिजली की मांग को ध्यान में न रखते हुए बिजली वितरण कंपनियों ने प्राइवेट बिजली उत्पादकों के साथ बिजली खरीद के समझौते किए हैं।
जिसके कारण प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों को प्राइवेट बिजली उत्पादकों से बिजली न खरीदने की अवस्था में प्रति वर्ष दो सौ से तीन सौ करोड़ रुपये का नुकसान होता है।
इनेलो नेताओं ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक इकाइयां और व्यवसायिक संस्थाएं अपने कारोबार बंद करके दूसरे प्रदेशों में जा रही हैं। इसका मुख्य कारण बिजली की बढ़ती हुई दरें हैं। वर्तमान में इकाइयों को नौ रुपये प्रति किलोवाट से अधिक दरों के हिसाब से बिजली के बिल अदा करने पड़ते हैं, जो पूरे देश में सबसे अधिक हैं।
नेताओं ने कहा कि सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में दिसंबर, 2014 और अप्रैल, 2015 में दो बार बिजली और फ्यूल सरचार्ज की दरों में बढ़ोतरी हुई है। आमतौर पर फ्यूल सरचार्ज तब बढ़ाया जाता है जब इंधन की कीमतों में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त हरियाणा में बिजली नियामक आयोग द्वारा 2015-16 के लिए बिजली वितरण कंपनियों के लिए जो दरें निर्धारित की गई हैं वे कमरतोड़ हैं, जिसके कारण उपभोक्ताओं को महंगे बिजली बिल अदा करने पड़ते हैं।
कब-कब हुई वृद्धि :
दिसंबर, 2014 में फ्यूल सरचार्ज में 17 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि।
अप्रैल 2015 में आठ प्रतिशत की बिजली दरों में वृद्धि।
अगस्त में फ्यूल सरचार्ज में पांच पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि।
सितंबर माह में 20 प्रतिशत की बिजली दरों में वृद्धि।