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Yamuna Nagar News: पुलिस ने ट्रेन से कर लिया गिरफ्तार, उन्नाव में 12 दिन काटी जेल
Thu, 18 Jan 2024 02:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 18 Jan 2024 02:35 AM IST
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साहिल घई
साढौरा। पेशे से शिक्षक साढौरा के 54 वर्षीय सतपाल शर्मा बचपन में ही आरएसएस से जुड़ गए थे। श्रीराम मंदिर आंदोलन के दौरान साध्वी ऋतंभरा व उनके गुरु परमाहंस के प्रवचनों से भगवान श्रीराम के प्रति आस्था जुड़ गई। भगवान श्रीराम के प्रति आस्था के कारण ही वह 1990 में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान 12 दिन जेल में रहे। वहीं 1992 में कारसेवा में भी शामिल हुए। अब सतपाल शर्मा विहिप के प्रखंड अध्यक्ष के तौर पर श्रीराम लला प्राण प्रतिष्ठा महासंपर्क अभियान में सक्रिय हैं।
सतपाल शर्मा ने बताया 1990 में आंदोलन के दौरान वह अपने जत्थे का नेतृत्व करते हुए अयोध्या के लिए रवाना हुए थे। पुलिस ट्रेन रुकवाकर कारसेवकों को गिरफ्तार कर रही थी। उनके अनेक साथी कानपुर में गिरफ्तार कर लिए गए। लखनऊ स्टेशन पर पुलिस ने उनकी ट्रेन रोक कर धरपकड़ आरंभ कर दी। लेकिन पुलिस से छुपते हुए रेलवे काॅलोनी में छिप गए।
इसके बाद फिर वह सहयोगियों के साथ ट्रेन में वापस आए तो पुलिस ने पकड़ लिया। उनके साथ स्व. चेलाराम, स्व. लाला सत प्रकाश, सांसद स्व. रतन लाल कटारिया, पूर्व एमएलए स्व. भागमल, सुमित जैन, सोम प्रकाश पकड़े गए। उनके जत्थे को पुलिस बस में रात को लखनऊ की विभिन्न जेलों में ले जाया गया। सभी जेलें कारसेवकों से भरी थी, तो उन्हें उन्नाव ले जाया गया।
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उन्नाव के एक काॅलेज की अस्थायी जेल में उन्हें रखा गया। जहां पहले से 450 से ज्यादा कारसेवक मौजूद थे। जेल में अधिकतर कारसेवक आरएसएस से जुड़े हुए थे। इस कारण से जेल में सुबह शाम संघ की शाखा लगाई गई। चेला राम जेल में लगने वाली शाखा के प्रमुख बनने के अलावा सतपाल शर्मा, सोम प्रकाश व सुशल को शाखा का शिक्षक बनाया गया। 12 दिन के कारावास के बाद सात नवंबर 1990 को उन्हें रिहा कर दिया गया। संवाद
कार सेवा में हुए शामिल
सतपाल शर्मा सहित सुनील धीमान व अन्य कारसेवकों को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या में 1992 में कार सेवा में जाने का मौका मिला। अबकी बार रास्ते में किसी भी प्रकार की कोई बाधा नहीं मिली, वे अयोध्या पहुंच गए। पांच दिसंबर 1992 को श्रीराम जन्म भूमि के दर्शन किए। लाखों की संख्या में कारसेवक देश के विभिन्न स्थानों से अयोध्या पहुंचे हुए थे। छह दिसंबर को वे अपने जत्थे में शामिल कार सेवकों के साथ विवादित ढांचे पर पहुंचे।
ढांचे से चंद कदम ही दूर थे। ढांचे के आसपास पैर रखने की जगह नहीं थी। देखते देखते ही कारसेवकों ने ढांचा तोड़ना शुरू कर दिया। इस दौरान जब पहला ढांचा गिरा तो वहां भगदड़ मच गई। पहला ढांचा गिरने पर कारसेवकों ने जयघोष कर खुशी मनाई। पहला ढांचा गिरने से काफी कारसेवकों को चोटें भी लगी। श्रीराम मंदिर के लिए अनेक कष्ट सहने के बाद अब सपना साकार होने से वे अभिभूत हैं।
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साढौरा। पेशे से शिक्षक साढौरा के 54 वर्षीय सतपाल शर्मा बचपन में ही आरएसएस से जुड़ गए थे। श्रीराम मंदिर आंदोलन के दौरान साध्वी ऋतंभरा व उनके गुरु परमाहंस के प्रवचनों से भगवान श्रीराम के प्रति आस्था जुड़ गई। भगवान श्रीराम के प्रति आस्था के कारण ही वह 1990 में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान 12 दिन जेल में रहे। वहीं 1992 में कारसेवा में भी शामिल हुए। अब सतपाल शर्मा विहिप के प्रखंड अध्यक्ष के तौर पर श्रीराम लला प्राण प्रतिष्ठा महासंपर्क अभियान में सक्रिय हैं।
सतपाल शर्मा ने बताया 1990 में आंदोलन के दौरान वह अपने जत्थे का नेतृत्व करते हुए अयोध्या के लिए रवाना हुए थे। पुलिस ट्रेन रुकवाकर कारसेवकों को गिरफ्तार कर रही थी। उनके अनेक साथी कानपुर में गिरफ्तार कर लिए गए। लखनऊ स्टेशन पर पुलिस ने उनकी ट्रेन रोक कर धरपकड़ आरंभ कर दी। लेकिन पुलिस से छुपते हुए रेलवे काॅलोनी में छिप गए।
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इसके बाद फिर वह सहयोगियों के साथ ट्रेन में वापस आए तो पुलिस ने पकड़ लिया। उनके साथ स्व. चेलाराम, स्व. लाला सत प्रकाश, सांसद स्व. रतन लाल कटारिया, पूर्व एमएलए स्व. भागमल, सुमित जैन, सोम प्रकाश पकड़े गए। उनके जत्थे को पुलिस बस में रात को लखनऊ की विभिन्न जेलों में ले जाया गया। सभी जेलें कारसेवकों से भरी थी, तो उन्हें उन्नाव ले जाया गया।
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उन्नाव के एक काॅलेज की अस्थायी जेल में उन्हें रखा गया। जहां पहले से 450 से ज्यादा कारसेवक मौजूद थे। जेल में अधिकतर कारसेवक आरएसएस से जुड़े हुए थे। इस कारण से जेल में सुबह शाम संघ की शाखा लगाई गई। चेला राम जेल में लगने वाली शाखा के प्रमुख बनने के अलावा सतपाल शर्मा, सोम प्रकाश व सुशल को शाखा का शिक्षक बनाया गया। 12 दिन के कारावास के बाद सात नवंबर 1990 को उन्हें रिहा कर दिया गया। संवाद
कार सेवा में हुए शामिल
सतपाल शर्मा सहित सुनील धीमान व अन्य कारसेवकों को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या में 1992 में कार सेवा में जाने का मौका मिला। अबकी बार रास्ते में किसी भी प्रकार की कोई बाधा नहीं मिली, वे अयोध्या पहुंच गए। पांच दिसंबर 1992 को श्रीराम जन्म भूमि के दर्शन किए। लाखों की संख्या में कारसेवक देश के विभिन्न स्थानों से अयोध्या पहुंचे हुए थे। छह दिसंबर को वे अपने जत्थे में शामिल कार सेवकों के साथ विवादित ढांचे पर पहुंचे।
ढांचे से चंद कदम ही दूर थे। ढांचे के आसपास पैर रखने की जगह नहीं थी। देखते देखते ही कारसेवकों ने ढांचा तोड़ना शुरू कर दिया। इस दौरान जब पहला ढांचा गिरा तो वहां भगदड़ मच गई। पहला ढांचा गिरने पर कारसेवकों ने जयघोष कर खुशी मनाई। पहला ढांचा गिरने से काफी कारसेवकों को चोटें भी लगी। श्रीराम मंदिर के लिए अनेक कष्ट सहने के बाद अब सपना साकार होने से वे अभिभूत हैं।