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Yamuna Nagar News: राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती में चमक रहे खिलाड़ी
Sun, 14 Apr 2024 04:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 14 Apr 2024 04:38 AM IST
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राहुल शर्मा
यमुनानगर। जिले के बिलासपुर खंड में अजीजपुर कलां की पहचान कुश्ती खेल से होने लगी है। गांव में वर्ष 2021 से चल रहे अखिल शर्मा पहलवान के अखाड़े से एक के बाद एक कुश्ती के नए खिलाड़ी मिल रहे हैं।
अखाड़े खुलने के तीन वर्षों में यहां के तीन खिलाड़ी राष्ट्र स्तर पर मुकाम हासिल कर चुके हैं, वहीं सात खिलाड़ी राज्य स्तर पर व 25 खिलाड़ी जिला स्तर पर पदक जीत चुके हैं। सभी का सपना देश के लिए खेलने व पदक जीतने का है, जिसके लिए अखाड़े में सुबह-शाम तीन-तीन घंटे कड़ा अभ्यास कर रहे हैं।
अखाड़े के संचालक सुशील शास्त्री ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2021 में यह अखाड़ा शुरू किया। इसके पीछे सोच यही थी कि किशोर व युवा वर्ग नशे से दूर रहे। कुश्ती जैसा खेल में एक ओर खिलाड़ी शरीर को स्वस्थ रखता है, वहीं विभिन्न स्तर पर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर पदक व नौकरी भी हासिल कर सकता है।
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ऐसे ही देश में सबसे ज्यादा हरियाणा के खिलाड़ी इस खेल में अंतर राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत पहचान बना रहे हैं, इसलिए इस खेल में अधिक से अधिक किशोर व युवा वर्ग को आना चाहिए। उन्होंने बताया कि वह खुद भी हफ्ते में एक दिन खिलाड़ियों को संस्कारवान बनने की शिक्षा देते हैं। संवाद
कोच बोले - खिलाड़ियों की सुविधा के लिए हॉस्टल भी शुरू
अखाड़े के कोच 24 वर्षीय निखिल शर्मा अखाड़े के संचालक सुशील शास्त्री के बेटे हैं। निखिल एनआईएस सर्टिफाइड कोच हैं। जिन्होंने पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान से स्पोर्ट्स परफॉरमेंस एनेलाइस का डिप्लोमा किया है। वह जिले में अकेले ऐसे कोच हैं, जिसने यह डिप्लोमा किया। निखिल खुद भी खेल में कई पदक अपने नाम कर चुके हैं। निखिल ने बताया कि शुरू में अखाड़े में 20 खिलाड़ी थे, जिनकी मौजूदा समय में संख्या दोगुना है। जिन्हें खेल की हर तकनीक बारे बताया जाता है। उनके मार्गदर्शन के साथ खिलाड़ियों की मेहनत व उनके अभिभावकों के सहयोग से कई खिलाड़ी जिला, राज्य, राष्ट्र स्तर पर पदक जीत लाए हैं। जनवरी-2024 से अखाड़े में हॉस्टल भी शुरू कर दिया है, जिससे खिलाड़ी यहीं रहकर पूरा फोकस खेल पर बना सकें।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीत का अरमान
19 वर्षीय इशिका ने बताया कि करीब तीन वर्षों से अखाड़े में कोच निखिल शर्मा से खेल की हर बारीकी सीखी। साथ ही सुबह-शाम चार-चार घंटे खेलाभ्यास किया। परिवार का भी पूरा सहयोग मिला। जिससे वह राष्ट्र स्तर पर दो बार रजत व दो बार कांस्य पदक जीत चुकी हूं। साथ ही ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स भी खेल चुकी हूं। इस तरह राष्ट्र स्तर पर पहचान बनी है, पर उसे यही तक रुकना नहीं है। बल्कि उसका अरमान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेलने व पदक जीतने का है। जिसके लिए और कड़ा प्रयास कर यह करके दिखाऊंगी।
राज्य स्तर पर पदक, राष्ट्र स्तर की तैयारी
17 वर्षीय हर्षित ने बताया कि अखाड़े में खेल में कोच निखिल शर्मा के बताए अनुसार सुबह शाम खेल अभ्यास कर रहा हूं। जिससे अंडर-19 आयु वर्ग की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीत लिया है। आगे भी राज्य व राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी चल रही है, जहां पदक जीतने हैं। उसका भी सपना अंतर राष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेलने व पदक जीतने का है। जिसके लिए अभ्यास को कड़ा कर रहा हूं।
हॉस्टल में रहकर खेल पर फोकस
19 वर्षीय देवेंद्र ने बताया कि अखाड़े में अभ्यास व कोच निखिल शर्मा के सही मार्गदर्शन से इंटर कॉलेज कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र में स्वर्ण पदक जीतकर रोहतक में नोर्थ जोन यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में भी प्रतिस्पर्धा की। अब राष्ट्र व अंतर राष्ट्रीय स्तर पर खेलने व पदक जीतने का लक्ष्य लेकर अखाड़े में बने होस्टल में रहने लगा हूं। जिससे पूरा सिर्फ फोकस खेल पर रहे।
राज्य स्तर पर दो रजत व एक कांस्य जीता
14 वर्षीय कुशाल ने बताया कि अखाड़े में किए खेलाभ्यास व कोच निखिल शर्मा द्वारा खेल की हर बारीकी बताने से राज्य स्तर पर दो बार रजत और एक बार कांस्य पदक जीत चुका हूं। अब राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता की तैयारी चल रही है, जिसमें सुबह-शाम तीन-तीन घंटे का कड़ा अभ्यास है। पूरा विश्वास है कि राष्ट्र स्तर पर पदक जीत अंतर राष्ट्रीय स्तर पर भी देश के लिए खेलूंगा और पदक जीतूंगा।
बेटी से ओलंपिक में पदक का विश्वास
इशिका की माता मंजू ने बताया कि बेटी ने जो खेल में कर दिखाया है, उस पर पूरा नाज है। साथ ही विश्वास भी है कि वह अपने सपने को पूरा कर ओलिंपिक में जरूर पदक जीतकर लाएगी। इसमें उसका हर संभव सहयोग कर रहे हैं। बेटी के चार बार राष्ट्र स्तर पर पदक जीतने का श्रेय अखाड़े के कोच निखिल शर्मा को जाता है, जिन्होंने बेटी को खेल में आगे बढ़ाने में पूरा प्रयास किया है।
बच्चे पदक जीत बढ़ा रहे क्षेत्र का मान
देवेंद्र के पिता अशोक कुमार ने बताया कि गांव में यह अखाड़ा खुलने पर ग्रामीणों को बहुत खुशी हुई। क्योंकि इससे गांव व अन्य जगह से आने वाले बच्चे गलत लत से दूर रहकर खेल में अपनी पहचान बनाएंगे। इसलिए काफी संख्या में ग्रामीण बच्चों को अखाड़े में खेलाभ्यास के लिए भेज रहे हैं। कोच निखिल के मार्गदर्शन में वह पदक जीत गांव व क्षेत्र का मान बढ़ा रहे हैं।
खुद को स्वस्थ रखने के साथ जीता पदक
हर्षित के पिता अंग्रेज कुमार ने कहा कि समाज में किशोर व युवाओं में नशे की लत बढ़ रही है। ये देख बेटे को पहले ही शारीरिक व मानसिक तौर पर तंदुरुस्त बनाने वाले कुश्ती जैसे से जोड़ दिया। अजीजपुर कलां में अखाड़ा शुरू होते ही बेटे को यहां अभ्यास के लिए भेजा। जहां से खेल अभ्यास से हर्षित ने खुद को स्वस्थ रखने के साथ पदक भी जीता है। साथ ही अखाड़े में उसे संस्कारवान बनने की भी शिक्षा मिल रही है।
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यमुनानगर। जिले के बिलासपुर खंड में अजीजपुर कलां की पहचान कुश्ती खेल से होने लगी है। गांव में वर्ष 2021 से चल रहे अखिल शर्मा पहलवान के अखाड़े से एक के बाद एक कुश्ती के नए खिलाड़ी मिल रहे हैं।
अखाड़े खुलने के तीन वर्षों में यहां के तीन खिलाड़ी राष्ट्र स्तर पर मुकाम हासिल कर चुके हैं, वहीं सात खिलाड़ी राज्य स्तर पर व 25 खिलाड़ी जिला स्तर पर पदक जीत चुके हैं। सभी का सपना देश के लिए खेलने व पदक जीतने का है, जिसके लिए अखाड़े में सुबह-शाम तीन-तीन घंटे कड़ा अभ्यास कर रहे हैं।
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अखाड़े के संचालक सुशील शास्त्री ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2021 में यह अखाड़ा शुरू किया। इसके पीछे सोच यही थी कि किशोर व युवा वर्ग नशे से दूर रहे। कुश्ती जैसा खेल में एक ओर खिलाड़ी शरीर को स्वस्थ रखता है, वहीं विभिन्न स्तर पर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर पदक व नौकरी भी हासिल कर सकता है।
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ऐसे ही देश में सबसे ज्यादा हरियाणा के खिलाड़ी इस खेल में अंतर राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत पहचान बना रहे हैं, इसलिए इस खेल में अधिक से अधिक किशोर व युवा वर्ग को आना चाहिए। उन्होंने बताया कि वह खुद भी हफ्ते में एक दिन खिलाड़ियों को संस्कारवान बनने की शिक्षा देते हैं। संवाद
कोच बोले - खिलाड़ियों की सुविधा के लिए हॉस्टल भी शुरू
अखाड़े के कोच 24 वर्षीय निखिल शर्मा अखाड़े के संचालक सुशील शास्त्री के बेटे हैं। निखिल एनआईएस सर्टिफाइड कोच हैं। जिन्होंने पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान से स्पोर्ट्स परफॉरमेंस एनेलाइस का डिप्लोमा किया है। वह जिले में अकेले ऐसे कोच हैं, जिसने यह डिप्लोमा किया। निखिल खुद भी खेल में कई पदक अपने नाम कर चुके हैं। निखिल ने बताया कि शुरू में अखाड़े में 20 खिलाड़ी थे, जिनकी मौजूदा समय में संख्या दोगुना है। जिन्हें खेल की हर तकनीक बारे बताया जाता है। उनके मार्गदर्शन के साथ खिलाड़ियों की मेहनत व उनके अभिभावकों के सहयोग से कई खिलाड़ी जिला, राज्य, राष्ट्र स्तर पर पदक जीत लाए हैं। जनवरी-2024 से अखाड़े में हॉस्टल भी शुरू कर दिया है, जिससे खिलाड़ी यहीं रहकर पूरा फोकस खेल पर बना सकें।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीत का अरमान
19 वर्षीय इशिका ने बताया कि करीब तीन वर्षों से अखाड़े में कोच निखिल शर्मा से खेल की हर बारीकी सीखी। साथ ही सुबह-शाम चार-चार घंटे खेलाभ्यास किया। परिवार का भी पूरा सहयोग मिला। जिससे वह राष्ट्र स्तर पर दो बार रजत व दो बार कांस्य पदक जीत चुकी हूं। साथ ही ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स भी खेल चुकी हूं। इस तरह राष्ट्र स्तर पर पहचान बनी है, पर उसे यही तक रुकना नहीं है। बल्कि उसका अरमान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेलने व पदक जीतने का है। जिसके लिए और कड़ा प्रयास कर यह करके दिखाऊंगी।
राज्य स्तर पर पदक, राष्ट्र स्तर की तैयारी
17 वर्षीय हर्षित ने बताया कि अखाड़े में खेल में कोच निखिल शर्मा के बताए अनुसार सुबह शाम खेल अभ्यास कर रहा हूं। जिससे अंडर-19 आयु वर्ग की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीत लिया है। आगे भी राज्य व राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी चल रही है, जहां पदक जीतने हैं। उसका भी सपना अंतर राष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेलने व पदक जीतने का है। जिसके लिए अभ्यास को कड़ा कर रहा हूं।
हॉस्टल में रहकर खेल पर फोकस
19 वर्षीय देवेंद्र ने बताया कि अखाड़े में अभ्यास व कोच निखिल शर्मा के सही मार्गदर्शन से इंटर कॉलेज कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र में स्वर्ण पदक जीतकर रोहतक में नोर्थ जोन यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में भी प्रतिस्पर्धा की। अब राष्ट्र व अंतर राष्ट्रीय स्तर पर खेलने व पदक जीतने का लक्ष्य लेकर अखाड़े में बने होस्टल में रहने लगा हूं। जिससे पूरा सिर्फ फोकस खेल पर रहे।
राज्य स्तर पर दो रजत व एक कांस्य जीता
14 वर्षीय कुशाल ने बताया कि अखाड़े में किए खेलाभ्यास व कोच निखिल शर्मा द्वारा खेल की हर बारीकी बताने से राज्य स्तर पर दो बार रजत और एक बार कांस्य पदक जीत चुका हूं। अब राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता की तैयारी चल रही है, जिसमें सुबह-शाम तीन-तीन घंटे का कड़ा अभ्यास है। पूरा विश्वास है कि राष्ट्र स्तर पर पदक जीत अंतर राष्ट्रीय स्तर पर भी देश के लिए खेलूंगा और पदक जीतूंगा।
बेटी से ओलंपिक में पदक का विश्वास
इशिका की माता मंजू ने बताया कि बेटी ने जो खेल में कर दिखाया है, उस पर पूरा नाज है। साथ ही विश्वास भी है कि वह अपने सपने को पूरा कर ओलिंपिक में जरूर पदक जीतकर लाएगी। इसमें उसका हर संभव सहयोग कर रहे हैं। बेटी के चार बार राष्ट्र स्तर पर पदक जीतने का श्रेय अखाड़े के कोच निखिल शर्मा को जाता है, जिन्होंने बेटी को खेल में आगे बढ़ाने में पूरा प्रयास किया है।
बच्चे पदक जीत बढ़ा रहे क्षेत्र का मान
देवेंद्र के पिता अशोक कुमार ने बताया कि गांव में यह अखाड़ा खुलने पर ग्रामीणों को बहुत खुशी हुई। क्योंकि इससे गांव व अन्य जगह से आने वाले बच्चे गलत लत से दूर रहकर खेल में अपनी पहचान बनाएंगे। इसलिए काफी संख्या में ग्रामीण बच्चों को अखाड़े में खेलाभ्यास के लिए भेज रहे हैं। कोच निखिल के मार्गदर्शन में वह पदक जीत गांव व क्षेत्र का मान बढ़ा रहे हैं।
खुद को स्वस्थ रखने के साथ जीता पदक
हर्षित के पिता अंग्रेज कुमार ने कहा कि समाज में किशोर व युवाओं में नशे की लत बढ़ रही है। ये देख बेटे को पहले ही शारीरिक व मानसिक तौर पर तंदुरुस्त बनाने वाले कुश्ती जैसे से जोड़ दिया। अजीजपुर कलां में अखाड़ा शुरू होते ही बेटे को यहां अभ्यास के लिए भेजा। जहां से खेल अभ्यास से हर्षित ने खुद को स्वस्थ रखने के साथ पदक भी जीता है। साथ ही अखाड़े में उसे संस्कारवान बनने की भी शिक्षा मिल रही है।