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पिंक बस : छात्राओं का नहीं एकाधिकार, पुरुष भी हो रहे सवार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jun 2022 02:09 AM IST
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Pink Bus: Not the monopoly of girl students, men are also riding
Pink Bus: Not the monopoly of girl students, men are also riding - फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। हरियाणा रोडवेज की पिंक बसों पर छात्राओं को एकाधिकार नहीं मिल पाया है, क्योंकि पिंक बसों में पुरुष भी सवार हो रहे हैं। जबकि पिंक बसें दो साल पहले छात्राओं के लिए आईं थी, जिन पर करोड़ों रुपये खर्च के बावजूद छात्राएं पुरुषों की भीड़ के बीच बसों में चढ़ने व सफर करने पर मजबूर हैं।
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बता दें फरवरी-2020 में यमुनानगर डिपो पर 32 सीटर पांच पिंक बसें आईं थी, पर पहले इंश्योरेंस जैसी औपचारिकताएं पूरी करने तक कोरोना के चलते लॉकडाउन लग गया फिर पांचों पिंक बसें कोरोना राहत कार्यों में लगी रहीं। अब जब दो साल इन पिंक बसों को चलाया गया तो छात्राओं के साथ पुरुषों को भी यात्रा करवाई जा रही है।
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दो साल बाद मेरठ व ग्रामीण रूटों पर चलाईं बसें
पिंक बसें दो साल बाद केवल छात्राओं के लिए न चलाकर मेरठ सहित यमुनानगर के ग्रामीण रूटों पर सभी सवारियों के लिए लगा दी हैं। इससे पहले जब यह बसें डिपो आईं, तब कोरोना के चलते लॉकडाउन में स्कूल-कॉलेज बंद थे फिर कोरोना की दूसरी लहर में मई-2021 में लाखों रुपये खर्च कर पिंक बसों को एंबुलेंस बना दिया गया। इसमें चार-चार बेड, स्ट्रक्चर, ऑक्सीजन सिलिंडर व अन्य सामान लगाकर स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया था, किंतु एंबुलेंस के तौर पर भी बहुत कम इस्तेमाल हुईं फिर जुलाई-अगस्त में कोरोना केस कम होने पर पिंक बसे वापस रोडवेज वर्कशॉप में आ गईं, जहां कोरोना की तीसरी लहर की आशंका में यह एंबुलेंस बन धूल फांकती रहीं।
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ये थी योजना
वर्ष-2020 में डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन (डीएचई) ने सरकारी कॉलेजों से उनके यहां पढ़ रही छात्राओं के रूट मांगे गए थे। जिसकी रिपोर्ट बनाकर ट्रांसपोर्ट विभाग को भेजी गई थी। इसी मुताबिक पहले 52 सीटर रोडवेज बसों को केवल छात्राओं के लिए चलाया गया, पर बसों में कई रूटों पर छात्राओं की संख्या कम होने के चलते आधी बसें खाली रहती थीं। ये देख रोडवेज विभाग ने प्रदेश के लिए 150 मिनी पिंक बसें खरीदीं, जिसमें यमुनानगर डिपो के हिस्से में पांच बसें आईं थी। इन बसों में महिला कंडक्टर या अटेंडेंट रखे जाने का प्लान था, यह भी अधूरा है। बसों में चालक-परिचालक तय रूट पर चल रहे हैं या नहीं और कितनी गति से चला रहे हैं, इसके लिए भी जीपीएस व स्पीड गवर्नर लगे हैं। साथ ही इनमें सीसीटीवी कैमरा, इमरजेंसी डोर, अलार्म, फायर सेफ्टी सुरक्षा के भी यंत्र लगे हैं।
इन्हें परेशानी
रोडवेज से महिला स्पेशल बसे न चलने से सरकारी कॉलेजों के अलावा पॉलिटेक्निक, आईटीआई समेत निजी शिक्षण संस्थाओं की छात्राओं को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ज्यादा दिक्कत ग्रामीण एरिया की छात्राओं के लिए है। पिंक बसें इन्हीं छात्राओं के लिए थीं वहीं, सीट बचने पर अन्य युवतियों व महिलाओं को भी बसों में बैठाए जाने की योजना थी, पर सिरे नहीं चढ़ पाई।

डिपो की पांचों पिंक बसें चला दी हैं। ये अलग-अलग रूटों पर चल रही हैं। इनमें पुरुष व महिला दोनों तरह की सवारी बैठा रहे हैं। महिलाओं के लिए जरूरत के अनुसार अलग से छोटी या बड़ी बस भेज देते हैं।
- बालकराम, महाप्रबंधक, रोडवेज, यमुनानगर।
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