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बाढ़ और पेयजल संकट से निपटने में कारगर सरस्वती के पैलियो चैनल
यमुनानगर
Updated Wed, 16 Oct 2013 04:34 PM IST
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हजारों वर्ष पहले आए भूकंप से जमीन में समा गई सरस्वती नदी के जल मार्ग प्रदेश में बाढ़ कंट्रोल और पेयजल संकट को दूर करने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।
भू वैज्ञानिकों द्वारा की गई रिसर्च में जमीन के नीचे मौजूद पैलियो चैनल (जमीन के नीचे मौजूद प्राचीन जलमार्ग) का पता चला है। इस पर उत्तरी हरियाणा में सर्वे करने के बाद अब वैज्ञानिक शेष हरियाणा में सर्वे कर रहे हैं। हजारों वर्ष पूर्व सरस्वती आदिबदरी से निकलकर प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर गुजरती थी।
उपग्रहों चित्रों की मदद से भू वैज्ञानिकों ने हरियाणा प्रदेश में जमीन के नीचे गहराई में मौजूद सरस्वती नदी के प्राचीन जलमार्गों का पता लगाया है। अधिकतर चैनल सूखे हुए हैं, जिनमें मानसून सीजन के दौरान पानी आता है। भू वैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तरी हरियाणा के यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और कैथल में इन चैनलों की भरमार है। ये चैनल इतने लंबे और विशाल हैं कि इनमें अथाह जल स्टोर किया जा सकता है।
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मानसून सीजन में बाढ़ आने पर बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह जाता है। इस पानी को स्टोर करने का अभी तक कोई इंतजाम नहीं है। भू वैज्ञानिकों के मुताबिक बाढ़ आने पर बोरवेल के जरिये इन चैनल में पानी पहुंचाया जा सकता है और इसे लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है।
पानी की कमी होने पर इसे पंपिंग कर बाहर निकाला जा सकता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन हरियाणा स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर ने उत्तरी हरियाणा में जमीन के नीचे मौजूद चैनलों का सर्वे किया है। भू वैज्ञानिकों के मुताबिक इन चैनल का नेटवर्क तैयार कर पानी को नदी तक भी पहुंचाया जा सकता है।
हर साल बाढ़ और पेयजल संकट
यमुना नदी में लगभग हर साल बाढ़ आती है। इस दौरान पहाड़ों से आने वाला यमुना का पानी यमुनानगर और अन्य जिलों में यमुना के किनारे हजारों एकड़ जमीन में खड़ी फसल को बर्बाद कर देता है। वहीं, दक्षिण हरियाणा के अधिकतर जिलों में साल भर पेयजल संकट बना रहता है। इन जिलों में यमुना नहर के माध्यम से पीने का पानी पहुंचाया जाता है।
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भू वैज्ञानिकों द्वारा की गई रिसर्च में जमीन के नीचे मौजूद पैलियो चैनल (जमीन के नीचे मौजूद प्राचीन जलमार्ग) का पता चला है। इस पर उत्तरी हरियाणा में सर्वे करने के बाद अब वैज्ञानिक शेष हरियाणा में सर्वे कर रहे हैं। हजारों वर्ष पूर्व सरस्वती आदिबदरी से निकलकर प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर गुजरती थी।
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उपग्रहों चित्रों की मदद से भू वैज्ञानिकों ने हरियाणा प्रदेश में जमीन के नीचे गहराई में मौजूद सरस्वती नदी के प्राचीन जलमार्गों का पता लगाया है। अधिकतर चैनल सूखे हुए हैं, जिनमें मानसून सीजन के दौरान पानी आता है। भू वैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तरी हरियाणा के यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और कैथल में इन चैनलों की भरमार है। ये चैनल इतने लंबे और विशाल हैं कि इनमें अथाह जल स्टोर किया जा सकता है।
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मानसून सीजन में बाढ़ आने पर बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह जाता है। इस पानी को स्टोर करने का अभी तक कोई इंतजाम नहीं है। भू वैज्ञानिकों के मुताबिक बाढ़ आने पर बोरवेल के जरिये इन चैनल में पानी पहुंचाया जा सकता है और इसे लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है।
पानी की कमी होने पर इसे पंपिंग कर बाहर निकाला जा सकता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन हरियाणा स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर ने उत्तरी हरियाणा में जमीन के नीचे मौजूद चैनलों का सर्वे किया है। भू वैज्ञानिकों के मुताबिक इन चैनल का नेटवर्क तैयार कर पानी को नदी तक भी पहुंचाया जा सकता है।
हर साल बाढ़ और पेयजल संकट
यमुना नदी में लगभग हर साल बाढ़ आती है। इस दौरान पहाड़ों से आने वाला यमुना का पानी यमुनानगर और अन्य जिलों में यमुना के किनारे हजारों एकड़ जमीन में खड़ी फसल को बर्बाद कर देता है। वहीं, दक्षिण हरियाणा के अधिकतर जिलों में साल भर पेयजल संकट बना रहता है। इन जिलों में यमुना नहर के माध्यम से पीने का पानी पहुंचाया जाता है।