{"_id":"68cc5dbc28c24b257706788a","slug":"parking-arrangement-deteriorated-in-the-district-civil-hospital-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-144060-2025-09-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: जिला नागरिक अस्पताल में बिगड़ गई पार्किंग व्यवस्था","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: जिला नागरिक अस्पताल में बिगड़ गई पार्किंग व्यवस्था
Fri, 19 Sep 2025 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 19 Sep 2025 01:00 AM IST
विज्ञापन
जिला अस्पताल के रास्ते में खड़े निजी वाहन। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में पार्किंग का ठेका न होने से वाहन अस्पताल के दरवाजे तक पहुंच गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीज व उनके तीमारदार अपने मर्जी से जहां देखा वहीं वाहनों को खड़ा कर रहे हैं।
कई बार तो हालात ऐसे हो जाते हैं कि किसी मरीज को लेकर आई एंबुलेंस को भी अंदर जाने का रास्ता नहीं मिल पाता। जहां एंबुलेंस खड़ी होनी चाहिए वहां लोगों की कार व बाइक खड़ी हो रही है। जहां पार्किंग के लिए जगह है वहां खाली पड़ा है। अस्पताल में जहां नजर जाती है बेतरतीब खड़े वाहन ही दिखाई देते हैं।
जिला अस्पताल में हर साल लाखों रुपये में पार्किंग का ठेका दिया जाता है। इस साल ठेका पिछले साल 31 मार्च को खत्म हो गया था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ठेका खत्म होने से पहले निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं की। जिस कारण ठेकेदार का ठेका दो माह के लिए आगे बढ़ा दिया गया। पहले लोकसभा चुनाव के कारण लगी आचार संहिता के कारण ठेका नहीं दिया जा सका।
विज्ञापन
इसके बाद तीन माह का समय भी मिला फिर भी अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। फिर विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लगी होने का हवाला देकर टेंडर नहीं लगाया गया। इसके बाद टेंडर लगा तो उसमें स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अधिकारियों ने ऐसी शर्तें जोड़ दी जिन्हें पूरा करना हर किसी के बस की बात नहीं थी।
ठेका नहीं हो सका तो अधिकारियों ने टेंडर की शर्तों में संशोधन करने की बात कही। करीब छह माह बीत चुके हैं अस्पताल प्रबंधन पार्किंग का ठेका नहीं लगा पा रहा है। टेंडर न लगने से अस्पताल को हर माह लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
ओपीडी में रोजाना आते हैं 1500 से अधिक मरीज
अस्पताल में रोजाना औसतन 1500 या इससे अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। करीब 60 प्रतिशत मरीज अपने वाहनों पर आते हैं। अस्पताल के नए भवन में गेट से एंट्री करते ही मरीजों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई है। कोई भी वहां वाहन खड़ा नहीं करता। इसलिए सारे अपने वाहन को लेकर अंदर ही जाते हैं। जिसका जहां मन किया, वहीं वाहन को खड़ा कर देता है। इससे रास्ता संकरा हो जाता है। अन्य वाहनों को भी निकलने में दिक्कत होती है।
जिला अस्पताल में पार्किंग की निविदा प्रक्रिया चल रही है। इसकी कुछ शर्तों में बदलाव कर रहे हैं। जब तक टेंडर नहीं लगता तब तक वाहनों को सुव्यवस्थित तरीके से खड़ा करवाया जाएगा।
- डॉ. जितेंद्र सिंह, पीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल।
विज्ञापन
यमुनानगर। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में पार्किंग का ठेका न होने से वाहन अस्पताल के दरवाजे तक पहुंच गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीज व उनके तीमारदार अपने मर्जी से जहां देखा वहीं वाहनों को खड़ा कर रहे हैं।
कई बार तो हालात ऐसे हो जाते हैं कि किसी मरीज को लेकर आई एंबुलेंस को भी अंदर जाने का रास्ता नहीं मिल पाता। जहां एंबुलेंस खड़ी होनी चाहिए वहां लोगों की कार व बाइक खड़ी हो रही है। जहां पार्किंग के लिए जगह है वहां खाली पड़ा है। अस्पताल में जहां नजर जाती है बेतरतीब खड़े वाहन ही दिखाई देते हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में हर साल लाखों रुपये में पार्किंग का ठेका दिया जाता है। इस साल ठेका पिछले साल 31 मार्च को खत्म हो गया था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ठेका खत्म होने से पहले निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं की। जिस कारण ठेकेदार का ठेका दो माह के लिए आगे बढ़ा दिया गया। पहले लोकसभा चुनाव के कारण लगी आचार संहिता के कारण ठेका नहीं दिया जा सका।
विज्ञापन
इसके बाद तीन माह का समय भी मिला फिर भी अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। फिर विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लगी होने का हवाला देकर टेंडर नहीं लगाया गया। इसके बाद टेंडर लगा तो उसमें स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अधिकारियों ने ऐसी शर्तें जोड़ दी जिन्हें पूरा करना हर किसी के बस की बात नहीं थी।
ठेका नहीं हो सका तो अधिकारियों ने टेंडर की शर्तों में संशोधन करने की बात कही। करीब छह माह बीत चुके हैं अस्पताल प्रबंधन पार्किंग का ठेका नहीं लगा पा रहा है। टेंडर न लगने से अस्पताल को हर माह लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
ओपीडी में रोजाना आते हैं 1500 से अधिक मरीज
अस्पताल में रोजाना औसतन 1500 या इससे अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। करीब 60 प्रतिशत मरीज अपने वाहनों पर आते हैं। अस्पताल के नए भवन में गेट से एंट्री करते ही मरीजों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई है। कोई भी वहां वाहन खड़ा नहीं करता। इसलिए सारे अपने वाहन को लेकर अंदर ही जाते हैं। जिसका जहां मन किया, वहीं वाहन को खड़ा कर देता है। इससे रास्ता संकरा हो जाता है। अन्य वाहनों को भी निकलने में दिक्कत होती है।
जिला अस्पताल में पार्किंग की निविदा प्रक्रिया चल रही है। इसकी कुछ शर्तों में बदलाव कर रहे हैं। जब तक टेंडर नहीं लगता तब तक वाहनों को सुव्यवस्थित तरीके से खड़ा करवाया जाएगा।
- डॉ. जितेंद्र सिंह, पीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल।