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दहशत: इब्राहिमपुरा गांव में घुसा तेंदुआ, बकरी को बनाया शिकार
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पहाड़ी की तलहटी में बसे गांव इब्राहिमपुरा व रिडे के माजरा में वीरवार सुबह एक तेंदुआ घुस आया। तेंदुए ने बाड़े में बंधी दो बकरों को मार दिया। पशुओं के चिल्लाने की आवाज सुनकर ग्रामीण उठे, तो वह भाग गया। तेंदुआ घुसने के बाद से गांव के लोगों में दहशत है। ग्रामीणों का कहना है कि एक महीने में तेंदुआ दर्जनों बकरियों व कुत्तों को शिकार बना चुका है।
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए के खौफ के कारण ग्रामीणों ने घरों से बाहर निकलना बंद कर दिया है। सूरज ढलने के साथ ही ग्रामीण घर में दुबक जाते हैं। वहीं बाहर भी लोग झुंड बनाकर निकल रहे हैं। बकरियों पर हमला करने के बाद से ग्रामीणों को अपने बच्चों की चिंता सताने लगी है। दो दिन से ग्रामीणों ने छोटे बच्चों को घरों में कैद करके रखा हुआ है। वहीं वन्य प्राणी विभाग का कहना है कि गांव के साथ ही एक बांध बना हुआ है। जहां पर तेंदुएं, हाथी सहित तमाम जानवर पानी पीने आते हैं। जब जंगली जानवरों को आबादी में पालतू कुत्ते, भेड़ बकरियों व अन्य पशु दिखते हैं तो वे उन्हें अपना शिकार बना लेते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तेंदुए से बचने के पुख्ता इंतजाम करने की गुहार लगाई है। वीरवार सुबह भी सत्तार पुत्र रहमतुल्लाह के दो बकरों पर तेंदुए ने हमला कर उन्हें मार दिया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर तेंदुआ जंगल में घुस गया।
विभाग को दी सूचना
ग्रामीणों ने इस बारे में वन्य प्राणी विभाग के कर्मचारियों को कई बार अवगत कराया है। लेकिन समस्या ज्यों की त्यों है। रिडे का माजरा निवासी सत्तार ने बताया कि वीरवार तड़के जंगल से तेंदुआ आया और उनके बकरे को उठाकर ले जाने लगा। जानवरों के चिल्लाने की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने शोर मचाया तो तेंदुआ मृत बकरा वहीं छोड़कर जंगल में भाग गया।
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सर्तकता ही है उपाय
वन्य प्राणी विभाग के निरीक्षक लीलू राम ने कहा कि इसका उपाय सर्तकता ही है। ये क्षेत्र तीन तरफ जंगल से घिरा हुआ है। इन गांवों के पास बांध बना हुआ है। यहां पर तेंदुआ ही नहीं भेड़िये, लक्कड़बग्गा, बाहरसिंगा, हाथी सहित तमाम जानवर पानी पीने आते हैं। यह जंगल उनका घर है, उन्हें यहां घूमने व बांध के पास आने से रोका नहीं जा सकता। ऐसे में ग्रामीणों को चौकसी बरतनी चाहिए। रात में गांव के बाहरी क्षेत्रों में रोशनी रखी जाए। जानवरों के बाड़े में रोशनी हो, मशाल जलाकर रखी जाए। वहीं पटाखों इत्यादि का प्रयोग करना चाहिए। इससे जंगली जानवर पास नहीं आते हैं। वहीं विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए के खौफ के कारण ग्रामीणों ने घरों से बाहर निकलना बंद कर दिया है। सूरज ढलने के साथ ही ग्रामीण घर में दुबक जाते हैं। वहीं बाहर भी लोग झुंड बनाकर निकल रहे हैं। बकरियों पर हमला करने के बाद से ग्रामीणों को अपने बच्चों की चिंता सताने लगी है। दो दिन से ग्रामीणों ने छोटे बच्चों को घरों में कैद करके रखा हुआ है। वहीं वन्य प्राणी विभाग का कहना है कि गांव के साथ ही एक बांध बना हुआ है। जहां पर तेंदुएं, हाथी सहित तमाम जानवर पानी पीने आते हैं। जब जंगली जानवरों को आबादी में पालतू कुत्ते, भेड़ बकरियों व अन्य पशु दिखते हैं तो वे उन्हें अपना शिकार बना लेते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तेंदुए से बचने के पुख्ता इंतजाम करने की गुहार लगाई है। वीरवार सुबह भी सत्तार पुत्र रहमतुल्लाह के दो बकरों पर तेंदुए ने हमला कर उन्हें मार दिया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर तेंदुआ जंगल में घुस गया।
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विभाग को दी सूचना
ग्रामीणों ने इस बारे में वन्य प्राणी विभाग के कर्मचारियों को कई बार अवगत कराया है। लेकिन समस्या ज्यों की त्यों है। रिडे का माजरा निवासी सत्तार ने बताया कि वीरवार तड़के जंगल से तेंदुआ आया और उनके बकरे को उठाकर ले जाने लगा। जानवरों के चिल्लाने की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने शोर मचाया तो तेंदुआ मृत बकरा वहीं छोड़कर जंगल में भाग गया।
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सर्तकता ही है उपाय
वन्य प्राणी विभाग के निरीक्षक लीलू राम ने कहा कि इसका उपाय सर्तकता ही है। ये क्षेत्र तीन तरफ जंगल से घिरा हुआ है। इन गांवों के पास बांध बना हुआ है। यहां पर तेंदुआ ही नहीं भेड़िये, लक्कड़बग्गा, बाहरसिंगा, हाथी सहित तमाम जानवर पानी पीने आते हैं। यह जंगल उनका घर है, उन्हें यहां घूमने व बांध के पास आने से रोका नहीं जा सकता। ऐसे में ग्रामीणों को चौकसी बरतनी चाहिए। रात में गांव के बाहरी क्षेत्रों में रोशनी रखी जाए। जानवरों के बाड़े में रोशनी हो, मशाल जलाकर रखी जाए। वहीं पटाखों इत्यादि का प्रयोग करना चाहिए। इससे जंगली जानवर पास नहीं आते हैं। वहीं विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है।