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पोर्टल में सब्जी की फसल को बताया धान
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मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल से प्राप्त सत्यापित फसल की रसीद। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। उद्यान विभाग की ओर से किसानों को दलहन फसल उगाने को लेकर जागरूक करने के साथ बीज भी उपलब्ध करवाए गए थे। किसानों ने गन्ना, धान व गेहूं की जगह लौकी, तोरी व अन्य दलहन फसल उगाई थीं। यह फसल लगाने पर सरकार से किसान को प्रति एकड़ सात हजार रुपये अनुदान देने की बात कही थी। लेकिन किसानों को अनुदान देने की बात तो दूर, मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर सब्जी को धान की फसल बताई जा रही है।
एडीसी कार्यालय की ओर से इसे सत्यापित भी कर दिया गया है, जबकि खेतों में सब्जी लगी हुई है। जिसका रिकॉर्ड उद्यान विभाग और पटवारी के गिरदावरी में लिखा हुआ है। पोर्टल पर किसान की ओर से दर्ज विवरण 30 मई को एडीसी की ओर से भरे गए खसरा नंबर में धान की फसल सत्यापित कर दी गई है। प्रशासन की इस गलती के कारण किसान को दलहन फसल के अनुदान का लाभ लेने के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है। सरकार ने गन्ना, धान व गेहूं की जगह लौकी, तोरी व अन्य दलहन फसल उगाने पर अनुदान देने की बात कही थी।
शेरपुर निवासी किसान ओमप्रकाश ने बताया कि जब उद्यान विभाग की तरफ से उन्हें दलहन फसल उगाने के लिए कहा गया तो उन्हें बीज के लिए दो हजार तुरंत देने की बात कही थी। बाकी पांच हजार फसल के बाद दिए जाएंगे। जब उन्होंने दलहन फसल उगाई तो एडीसी कार्यालय से पोर्टल में धान व गन्ना सत्यापित कर दिया गया है।
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इस बारे में कृषि अधिकारी यमुनानगर जसविंद्र सैनी ने बताया कि सरकार की योजना के अनुसार जिन किसानों ने दलहन खेती की है, उन्हें सरकार की ओर से सात हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान दिया जाता है। यदि किसी किसान का गिरदावरी या खसरा नंबर में कोई कमी आई है तो उसके बारे में तो संबंधित विभाग से मिलकर इसे ठीक करवा सकता है। डॉ. सैनी ने कहा कि यह तकनीकी खामी प्रतीत होती है, संभव है पोर्टल पर दर्ज जानकारी सही से सेव नहीं हो पाई हो। जांच कर इसे दुरुस्त करवा दिया जाएगा।
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छछरौली। उद्यान विभाग की ओर से किसानों को दलहन फसल उगाने को लेकर जागरूक करने के साथ बीज भी उपलब्ध करवाए गए थे। किसानों ने गन्ना, धान व गेहूं की जगह लौकी, तोरी व अन्य दलहन फसल उगाई थीं। यह फसल लगाने पर सरकार से किसान को प्रति एकड़ सात हजार रुपये अनुदान देने की बात कही थी। लेकिन किसानों को अनुदान देने की बात तो दूर, मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर सब्जी को धान की फसल बताई जा रही है।
एडीसी कार्यालय की ओर से इसे सत्यापित भी कर दिया गया है, जबकि खेतों में सब्जी लगी हुई है। जिसका रिकॉर्ड उद्यान विभाग और पटवारी के गिरदावरी में लिखा हुआ है। पोर्टल पर किसान की ओर से दर्ज विवरण 30 मई को एडीसी की ओर से भरे गए खसरा नंबर में धान की फसल सत्यापित कर दी गई है। प्रशासन की इस गलती के कारण किसान को दलहन फसल के अनुदान का लाभ लेने के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है। सरकार ने गन्ना, धान व गेहूं की जगह लौकी, तोरी व अन्य दलहन फसल उगाने पर अनुदान देने की बात कही थी।
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शेरपुर निवासी किसान ओमप्रकाश ने बताया कि जब उद्यान विभाग की तरफ से उन्हें दलहन फसल उगाने के लिए कहा गया तो उन्हें बीज के लिए दो हजार तुरंत देने की बात कही थी। बाकी पांच हजार फसल के बाद दिए जाएंगे। जब उन्होंने दलहन फसल उगाई तो एडीसी कार्यालय से पोर्टल में धान व गन्ना सत्यापित कर दिया गया है।
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इस बारे में कृषि अधिकारी यमुनानगर जसविंद्र सैनी ने बताया कि सरकार की योजना के अनुसार जिन किसानों ने दलहन खेती की है, उन्हें सरकार की ओर से सात हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान दिया जाता है। यदि किसी किसान का गिरदावरी या खसरा नंबर में कोई कमी आई है तो उसके बारे में तो संबंधित विभाग से मिलकर इसे ठीक करवा सकता है। डॉ. सैनी ने कहा कि यह तकनीकी खामी प्रतीत होती है, संभव है पोर्टल पर दर्ज जानकारी सही से सेव नहीं हो पाई हो। जांच कर इसे दुरुस्त करवा दिया जाएगा।