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शहर की आधी आबादी के लिए लाइफ लाइन बनेगा पैदल पुल
yamunanagar
Updated Sun, 10 Apr 2016 01:04 AM IST
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रेलवे ट्रैक पार करते लोग
- फोटो : bueoro
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यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर बने पैदल पुल को पुराना हमीदा से जोड़ने का काम माहभर में पूरा हो जाएगा। बिजली निगम द्वारा कुरुक्षेत्र-सहारनपुर मार्ग पर पुल से लगते बिजली के तार हटाने के लिए रेलवे ने पुल पर काम करना शुरू कर दिया है। रेलवे की मानें तो माहभर में स्लैब डालने और फिनिशिंग का काम पूरा होगा और पुल लोगों के लिए चालू कर दिया जाएगा। अगर सबकुछ ठीक रहा तो पुल लाइन पार के दर्जनों गांवों व कॉलोनियों के लोगों के लिए लाइफ लाइन साबित होगा।
चूंकि शहर आने-जाने के लिए न तो उन्हें जान जोखिम में डाल लाइन क्रॉस करनी पड़ेगी और न ही रादौर रोड रेलवे फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ेगा। बता दें कि पुराना हमीदा और इसके साथ लगते दर्जनों गांवों और कॉलोनियों के हजारों लोगों को कई किलोमीटर घूमकर यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन और यमुनानगर शहर आना-जाना पड़ता है या फिर उन्हें मजबूरन रेलवे यार्ड से रेल लाइन पार करनी पड़ती हैं। इसमें कई लोग लाइन क्रॉस करते समय ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं। रेलवे सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में ट्रेन की चपेट में आकर हर माह औसत एक मौत हो जाती है।
इसी को लेकर कई वर्षों से दैनिक रेल यात्री संघ, ऑल इंडिया उद्योग व्यापार मंडल व अन्य संगठनों की ओर से पुराना हमीदा तक पैदल पुल बनाए जाने की मांग की गई। इस पर रेलवे की ओर से यमुनानगर-जगाधरी स्टेशन के माल गोदाम की ओर से स्टेशन के प्लेटफॉम तक पैदल पुल बनाया गया। इसका 15 अप्रैल 2013 को पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्य सभा सांसद कुमारी सैलजा और पूर्व राज्य सभा सांसद ईश्वर सिंह ने उद्घाटन किया। उस दौरान कुमारी सैलजा ने आश्वासन दिया कि सालभर के भीतर इस पुल को बढ़ाकर पुराना हमीदा तक पहुंचा दिया जाएगा, किंतु ढाई वर्ष से अधिक समय बीतने पर भी पुल का काम पूरा नहीं हो पाया था।
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दो विभागों में पेंच फंसने से 15 माह से रुका था काम
पुराना हमीदा की तरफ सहारनपुर- कुरुक्षेत्र मार्ग पर पैदल पुल को उतारा जाना है, वहां बिजली के तारों की ऊंचा उठाने को लेकर बिजली निगम व रेलवे के बीच पेंच फंसने से 21 जून 2014 से पुल पर काम नहीं लग पाया। तब रेलवे के ब्रिज डिपार्टमेंट शकूर बस्ती, नई दिल्ली के सीनियर सेक्शन इंजीनियर द्वारा बिजली निगम अधिकारियों को पत्र लिखकर दो घंटे का ब्लॉक मांगा गया था। किंतु बिजली निगम की ओर से जवाब में लिखे पत्र में तीन माह पहले हुई मीटिंग का हवाला दिया, जिसमें तय हुआ था कि रेलवे को बिजली के तारों को ऊपर उठाने के लिए बिजली निगम को साढ़े चार लाख रुपये जमा कराने होंगे या रेलवे स्वयं ठेकेदार से कार्य कराए। रेलवे ने दोनों ही विकल्पों पर तीन माह की अवधि में गौर नहीं किया, जब पुल का काम अंतिम पड़ाव पर आया, तब 21 जून 2014 को रेलवे ने निगम से ब्लॉक मांगना चाहा और बिजली निगम ने ब्लॉक देने से इंकार कर दिया। रेलवे व बिजली निगम के बीच कागजी कार्रवाई में ही सवा साल बीत गया। पहले रेलवे ने आधी राशि जारी की, फिर बिजली निगम को पूरी राशि जारी होने पर भी कई माह बाद बिजली के तारों को हटाया गया। इसके बाद रेलवे ने पुल के शेष हिस्से को जोड़ स्लैब डालने व अन्य फिनिशिंग का काम शुरू कर दिया है, जोकि माहभर में पूरा होने की उम्मीद है।
लाइन क्रॉसिंग करना लोगों की मजबूरी
रादौर के विपिन और रजत ने कहा कि वह शहर में पढ़ने आते हैं। पुराना हमीदा से रेलवे यार्ड व स्टेशन से होकर आने-जाने में कम समय लगता है, लेकिन इसके लिए उन्हें मजबूरन लाइन क्रास करनी पड़ती है। इसी मजबूरी में लाइन पार के लोगों को रोजाना जान जोखिम में डालनी पड़ती है, जिसमें गाड़ियोें से हादसे का भय रहता है।
लाइन क्रॉसिंग व प्लेटफॉर्म पर चढ़ते हुए गिरते लोग
पुराना हमीदा निवासी सरोज बाला ने कहा लाइन क्रॉसिंग और प्लेटफार्म पर चढ़ते समय कई बार लोग गिर जाते हैं। सबसे ज्यादा इस परेशानी से महिलाओं व बुजुर्गों को दो-चार होना पड़ता है। पुराना हमीदा तक पुल बनने से समस्या हल होती दिख रही है।
लाइन क्रॉसिंग के वक्त हाने वाले हादसों पर लगेगा अंकुश
पुराना हमीदा के त्रिलोक पुखरेजा ने कहा कि लाइन पार के लोगों के लिए पैदल पुल लाइफ लाइन साबित होगा। चूंकि शहर आने के लिए हजारों लोग रेलवे यार्ड से होते हुए स्टेशन के शॉर्ट कट रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। पुल बनने से लाइन क्रॉसिंग करते समय होने वाले हादसों के ग्राफ पर अंकुश लग सकेगा।
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चूंकि शहर आने-जाने के लिए न तो उन्हें जान जोखिम में डाल लाइन क्रॉस करनी पड़ेगी और न ही रादौर रोड रेलवे फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ेगा। बता दें कि पुराना हमीदा और इसके साथ लगते दर्जनों गांवों और कॉलोनियों के हजारों लोगों को कई किलोमीटर घूमकर यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन और यमुनानगर शहर आना-जाना पड़ता है या फिर उन्हें मजबूरन रेलवे यार्ड से रेल लाइन पार करनी पड़ती हैं। इसमें कई लोग लाइन क्रॉस करते समय ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं। रेलवे सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में ट्रेन की चपेट में आकर हर माह औसत एक मौत हो जाती है।
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इसी को लेकर कई वर्षों से दैनिक रेल यात्री संघ, ऑल इंडिया उद्योग व्यापार मंडल व अन्य संगठनों की ओर से पुराना हमीदा तक पैदल पुल बनाए जाने की मांग की गई। इस पर रेलवे की ओर से यमुनानगर-जगाधरी स्टेशन के माल गोदाम की ओर से स्टेशन के प्लेटफॉम तक पैदल पुल बनाया गया। इसका 15 अप्रैल 2013 को पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्य सभा सांसद कुमारी सैलजा और पूर्व राज्य सभा सांसद ईश्वर सिंह ने उद्घाटन किया। उस दौरान कुमारी सैलजा ने आश्वासन दिया कि सालभर के भीतर इस पुल को बढ़ाकर पुराना हमीदा तक पहुंचा दिया जाएगा, किंतु ढाई वर्ष से अधिक समय बीतने पर भी पुल का काम पूरा नहीं हो पाया था।
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दो विभागों में पेंच फंसने से 15 माह से रुका था काम
पुराना हमीदा की तरफ सहारनपुर- कुरुक्षेत्र मार्ग पर पैदल पुल को उतारा जाना है, वहां बिजली के तारों की ऊंचा उठाने को लेकर बिजली निगम व रेलवे के बीच पेंच फंसने से 21 जून 2014 से पुल पर काम नहीं लग पाया। तब रेलवे के ब्रिज डिपार्टमेंट शकूर बस्ती, नई दिल्ली के सीनियर सेक्शन इंजीनियर द्वारा बिजली निगम अधिकारियों को पत्र लिखकर दो घंटे का ब्लॉक मांगा गया था। किंतु बिजली निगम की ओर से जवाब में लिखे पत्र में तीन माह पहले हुई मीटिंग का हवाला दिया, जिसमें तय हुआ था कि रेलवे को बिजली के तारों को ऊपर उठाने के लिए बिजली निगम को साढ़े चार लाख रुपये जमा कराने होंगे या रेलवे स्वयं ठेकेदार से कार्य कराए। रेलवे ने दोनों ही विकल्पों पर तीन माह की अवधि में गौर नहीं किया, जब पुल का काम अंतिम पड़ाव पर आया, तब 21 जून 2014 को रेलवे ने निगम से ब्लॉक मांगना चाहा और बिजली निगम ने ब्लॉक देने से इंकार कर दिया। रेलवे व बिजली निगम के बीच कागजी कार्रवाई में ही सवा साल बीत गया। पहले रेलवे ने आधी राशि जारी की, फिर बिजली निगम को पूरी राशि जारी होने पर भी कई माह बाद बिजली के तारों को हटाया गया। इसके बाद रेलवे ने पुल के शेष हिस्से को जोड़ स्लैब डालने व अन्य फिनिशिंग का काम शुरू कर दिया है, जोकि माहभर में पूरा होने की उम्मीद है।
लाइन क्रॉसिंग करना लोगों की मजबूरी
रादौर के विपिन और रजत ने कहा कि वह शहर में पढ़ने आते हैं। पुराना हमीदा से रेलवे यार्ड व स्टेशन से होकर आने-जाने में कम समय लगता है, लेकिन इसके लिए उन्हें मजबूरन लाइन क्रास करनी पड़ती है। इसी मजबूरी में लाइन पार के लोगों को रोजाना जान जोखिम में डालनी पड़ती है, जिसमें गाड़ियोें से हादसे का भय रहता है।
लाइन क्रॉसिंग व प्लेटफॉर्म पर चढ़ते हुए गिरते लोग
पुराना हमीदा निवासी सरोज बाला ने कहा लाइन क्रॉसिंग और प्लेटफार्म पर चढ़ते समय कई बार लोग गिर जाते हैं। सबसे ज्यादा इस परेशानी से महिलाओं व बुजुर्गों को दो-चार होना पड़ता है। पुराना हमीदा तक पुल बनने से समस्या हल होती दिख रही है।
लाइन क्रॉसिंग के वक्त हाने वाले हादसों पर लगेगा अंकुश
पुराना हमीदा के त्रिलोक पुखरेजा ने कहा कि लाइन पार के लोगों के लिए पैदल पुल लाइफ लाइन साबित होगा। चूंकि शहर आने के लिए हजारों लोग रेलवे यार्ड से होते हुए स्टेशन के शॉर्ट कट रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। पुल बनने से लाइन क्रॉसिंग करते समय होने वाले हादसों के ग्राफ पर अंकुश लग सकेगा।