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Yamuna Nagar News: कक्षा तीन के बच्चों का नहीं हुआ मौखिक पठन आकलन
Mon, 24 Aug 2026 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 24 Aug 2026 12:45 AM IST
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जिला शिक्षा सदन। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शिक्षकों के बीएलओ ड्यूटी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा असर प्राथमिक विद्यालय की पढ़ाई पर पड़ा है। इसके चलते जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा तीसरी के विद्यार्थियों का मौखिक पठन प्रवाह आकलन शनिवार को नहीं हो पाया है।
निर्वाचन आयोग की ओर से बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मतदाता सूची से संबंधित कार्यों के लिए बूथों पर मौजूद रहने के निर्देश दिए गए थे। आदेशों के कारण अधिकांश शिक्षक बीएलओ की ड्यूटी में व्यस्त रहे। वे कक्षा तीन के विद्यार्थियों का निर्धारित मौखिक पठन आकलन नहीं कर पाए।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान सुरेंद्र कांबोज ने बताया कि विभागीय निर्देश के अनुसार कक्षा तीन के सभी विद्यार्थियों का मौखिक पठन प्रवाह आकलन निर्धारित कार्यक्रम के तहत करवाया जाना था। इसके लिए हर बच्चे को अलग से पढ़ने का अवसर देना जरूरी है। जिले में अधिकांश प्राथमिक शिक्षक बीएलओ की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
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निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार उन्हें निर्धारित दिन अपने बूथ पर बैठकर मतदाता सूची और वोट से संबंधित कार्य करना था। ऐसे में इन शिक्षकों के लिए एक ही समय पर विद्यालय में रहकर विद्यार्थियों का आकलन करवाना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि कई प्राथमिक विद्यालयों में पहले ही शिक्षकों की संख्या कम है।
ऐसे में यदि किसी शिक्षक की बीएलओ ड्यूटी लग जाती है तो विद्यालय में उपलब्ध स्टाफ पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाती है। कक्षा तीन के बच्चों का आकलन ऐसा कार्य है, जिसे जल्दबाजी में पूरा नहीं किया जा सकता। हर बच्चे को शांत वातावरण में व्यक्तिगत रूप से पढ़ने का अवसर देना पड़ता है।
संघ कोषाध्यक्ष अनिल कांबोज ने कहा कि बीएलओ ड्यूटी के कारण कई शिक्षक विद्यालय से बाहर रहे, जिससे निर्धारित समय में आकलन पूरा करना संभव नहीं हो सका। पूर्व राज्य सचिव कृष्ण पाल राणा ने कहा कि मौखिक पठन प्रवाह आकलन सामान्य लिखित परीक्षा की तरह नहीं है।
इसमें बच्चे को सामने बैठाकर उससे पढ़वाना होता है और उसकी पढ़ने की गति तथा प्रवाह का आकलन किया जाता है। इसके लिए शांत वातावरण और शिक्षक का व्यक्तिगत ध्यान आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा विभाग से मांग की है कि जिन विद्यालयों में बीएलओ ड्यूटी अथवा अन्य अनिवार्य निर्वाचन कार्यों के कारण कक्षा तीन के बच्चों का मौखिक पठन आकलन निर्धारित समय पर नहीं हो।
कक्षा तीन के बच्चों का मौखिक पठन आकलन करना था। कई स्कूलों में काम प्रभावित रहा। अभी निदेशालय की ओर से इस संबंधी निर्देश नहीं दिए गए हैं। निदेशालय के निर्देश पर काम किया जाएगा। -अशोक राणा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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यमुनानगर। शिक्षकों के बीएलओ ड्यूटी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा असर प्राथमिक विद्यालय की पढ़ाई पर पड़ा है। इसके चलते जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा तीसरी के विद्यार्थियों का मौखिक पठन प्रवाह आकलन शनिवार को नहीं हो पाया है।
निर्वाचन आयोग की ओर से बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मतदाता सूची से संबंधित कार्यों के लिए बूथों पर मौजूद रहने के निर्देश दिए गए थे। आदेशों के कारण अधिकांश शिक्षक बीएलओ की ड्यूटी में व्यस्त रहे। वे कक्षा तीन के विद्यार्थियों का निर्धारित मौखिक पठन आकलन नहीं कर पाए।
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राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान सुरेंद्र कांबोज ने बताया कि विभागीय निर्देश के अनुसार कक्षा तीन के सभी विद्यार्थियों का मौखिक पठन प्रवाह आकलन निर्धारित कार्यक्रम के तहत करवाया जाना था। इसके लिए हर बच्चे को अलग से पढ़ने का अवसर देना जरूरी है। जिले में अधिकांश प्राथमिक शिक्षक बीएलओ की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
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निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार उन्हें निर्धारित दिन अपने बूथ पर बैठकर मतदाता सूची और वोट से संबंधित कार्य करना था। ऐसे में इन शिक्षकों के लिए एक ही समय पर विद्यालय में रहकर विद्यार्थियों का आकलन करवाना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि कई प्राथमिक विद्यालयों में पहले ही शिक्षकों की संख्या कम है।
ऐसे में यदि किसी शिक्षक की बीएलओ ड्यूटी लग जाती है तो विद्यालय में उपलब्ध स्टाफ पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाती है। कक्षा तीन के बच्चों का आकलन ऐसा कार्य है, जिसे जल्दबाजी में पूरा नहीं किया जा सकता। हर बच्चे को शांत वातावरण में व्यक्तिगत रूप से पढ़ने का अवसर देना पड़ता है।
संघ कोषाध्यक्ष अनिल कांबोज ने कहा कि बीएलओ ड्यूटी के कारण कई शिक्षक विद्यालय से बाहर रहे, जिससे निर्धारित समय में आकलन पूरा करना संभव नहीं हो सका। पूर्व राज्य सचिव कृष्ण पाल राणा ने कहा कि मौखिक पठन प्रवाह आकलन सामान्य लिखित परीक्षा की तरह नहीं है।
इसमें बच्चे को सामने बैठाकर उससे पढ़वाना होता है और उसकी पढ़ने की गति तथा प्रवाह का आकलन किया जाता है। इसके लिए शांत वातावरण और शिक्षक का व्यक्तिगत ध्यान आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा विभाग से मांग की है कि जिन विद्यालयों में बीएलओ ड्यूटी अथवा अन्य अनिवार्य निर्वाचन कार्यों के कारण कक्षा तीन के बच्चों का मौखिक पठन आकलन निर्धारित समय पर नहीं हो।
कक्षा तीन के बच्चों का मौखिक पठन आकलन करना था। कई स्कूलों में काम प्रभावित रहा। अभी निदेशालय की ओर से इस संबंधी निर्देश नहीं दिए गए हैं। निदेशालय के निर्देश पर काम किया जाएगा। -अशोक राणा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।