{"_id":"6a416b64fb6776646b01c197","slug":"optimistic-thinking-is-essential-in-life-sumanya-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-158577-2026-06-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन में आशावादी सोच अति आवश्यक : सुमान्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीवन में आशावादी सोच अति आवश्यक : सुमान्या
विज्ञापन
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम व्यासपुर सत्संग सुनते श्रद्धालु। प्रवक्ता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग एवं संकीर्तन का आयोजन किया गया। साध्वी सुमान्या भारती ने कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण व आशावादी सोच जीवन में अति आवश्यक है। जिसने आज अपना वर्तमान सुधार लिया उसका भविष्य भी उज्ज्वल होगा।
उन्होंने कहा कि जो समय आज हमारे पास है वो ही अच्छा समय है। यदि हमारा दृष्टिकोण ही नकारात्मक है तो हमारे जीवन में चाहे कितने भी सकारात्मक क्षण क्यों न आ जाएं तब भी हम परमात्मा के प्रति कभी कृतज्ञ नहीं हो पाते। अच्छे दिन बाहरी परिस्थितियों से नहीं अपितु मनुष्य की चेतना, संस्कार और कर्मों से आते हैं।
साध्वी ने क हा कि आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति अच्छे दिनों की प्रतीक्षा कर रहा है। कोई उन्हें आर्थिक समृद्धि में खोजता है, कोई पद-प्रतिष्ठा में, तो कोई सुविधाओं में खोजता है किंतु अच्छे दिन किसी बाहरी परिवर्तन का नाम नहीं अपितु स्वयं के भीतर होने वाले सकारात्मक परिवर्तन का परिणाम है। जब मनुष्य अपने विचारों को शुद्ध करता है, इंद्रियों पर संयम रखता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग एवं संकीर्तन का आयोजन किया गया। साध्वी सुमान्या भारती ने कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण व आशावादी सोच जीवन में अति आवश्यक है। जिसने आज अपना वर्तमान सुधार लिया उसका भविष्य भी उज्ज्वल होगा।
उन्होंने कहा कि जो समय आज हमारे पास है वो ही अच्छा समय है। यदि हमारा दृष्टिकोण ही नकारात्मक है तो हमारे जीवन में चाहे कितने भी सकारात्मक क्षण क्यों न आ जाएं तब भी हम परमात्मा के प्रति कभी कृतज्ञ नहीं हो पाते। अच्छे दिन बाहरी परिस्थितियों से नहीं अपितु मनुष्य की चेतना, संस्कार और कर्मों से आते हैं।
विज्ञापन
साध्वी ने क हा कि आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति अच्छे दिनों की प्रतीक्षा कर रहा है। कोई उन्हें आर्थिक समृद्धि में खोजता है, कोई पद-प्रतिष्ठा में, तो कोई सुविधाओं में खोजता है किंतु अच्छे दिन किसी बाहरी परिवर्तन का नाम नहीं अपितु स्वयं के भीतर होने वाले सकारात्मक परिवर्तन का परिणाम है। जब मनुष्य अपने विचारों को शुद्ध करता है, इंद्रियों पर संयम रखता है।
विज्ञापन