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प्रकृति पर अत्याचार बनेगा विनाश का कारण : मीना
Mon, 05 Aug 2024 04:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 05 Aug 2024 04:41 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मीना भारती ने प्रवचन किया। सत्संग में साध्वी मीना ने पर्यावरण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि सृष्टि परमात्मा की सुंदर रचना है और मनुष्य सृष्टि का सिरमौर है।
परमात्मा ने सृष्टि का संरक्षण करने के लिए उसका निर्माण किया है, लेकिन विडंबना यह है कि आज रक्षक ही भक्षक बन गया है। साध्वी ने कहा कि हमारी प्रकृति जिस पीड़ा से गुज़र रही है उसका कारण केवल मानव है। चूंकि मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का दोहन कर रहा है। मानव यह भी भूल गया है कि उसका अस्तित्व प्रकृति पर ही आधारित है।
अगर वह प्रकृति का संरक्षण करने में असफल होता है, तो वह अपने लिए ही भयावह स्थितियों का निर्माण कर रहा है। आज धरती की करुण पुकार इसके असंतुलित पर्यावरण के रूप में सुनाई दे रही है। कहीं अधिक शीत तो कहीं अधिक गर्मी, कहीं जल की कमी और कहीं बाढ़ जैसी परिस्थितियां संपूर्ण मानव जाति के लिए चेतावनी है।
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समय-समय पर वह परम शक्ति परमात्मा स्वयं धरा पर अवतरित होकर इसे अपना सान्निध्य एवं संरक्षण प्रदान करते हैं और मानव जाति को ब्रह्मज्ञान व अध्यात्म से स्वार्थ के दायरे से बाहर निकाल कर उसे उसके कर्तव्यों का बोध करवाते हैं। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संरक्षण प्रकल्प से प्रकृति का संरक्षण और धरती को उसकी गरिमा लौटाने का अथक प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आशुतोष महाराज ने कहा है कि यदि हम प्रकृति की रक्षा करते हैं तो प्रकृति सदैव हमारी रक्षा करेगी। परंतु स्वार्थयुक्त होकर अगर हम प्रकृति का उपभोग करेंगे तो प्रकृति संपूर्ण जीव जगत के संहार का कारण बन जाएगी। परमात्मा ने प्रकृति को ऐसा बनाया है कि वह प्रत्येक जीव की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, परंतु मनुष्य अपनी इच्छाओं के लिए प्रकृति को पीड़ा देता है।
प्लास्टिक और पॉलीथिन इत्यादि पदार्थों का उपयोग कर हम अपनी धरती के लिए बहुत बड़ा संकट पैदा कर रहे हैं। यदि समय रहते प्रकृति मां की रक्षा नहीं की गई तो पृथ्वी से जीवन का विनाश हो जाएगा। चूंकि मनुष्य की स्वार्थपरायणता के फलस्वरूप जीव जगत की कई प्रजातियां तो धरती से विलुप्त हो चुकी है। यदि ऐसा ही रहा तो मानव जाति भी विलुप्त हो जाएगी। सत्संग में साध्वियों ने भजनों से ईश्वर व गुरु की महिमा का गुणगान किया।
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मीना भारती ने प्रवचन किया। सत्संग में साध्वी मीना ने पर्यावरण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि सृष्टि परमात्मा की सुंदर रचना है और मनुष्य सृष्टि का सिरमौर है।
परमात्मा ने सृष्टि का संरक्षण करने के लिए उसका निर्माण किया है, लेकिन विडंबना यह है कि आज रक्षक ही भक्षक बन गया है। साध्वी ने कहा कि हमारी प्रकृति जिस पीड़ा से गुज़र रही है उसका कारण केवल मानव है। चूंकि मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का दोहन कर रहा है। मानव यह भी भूल गया है कि उसका अस्तित्व प्रकृति पर ही आधारित है।
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अगर वह प्रकृति का संरक्षण करने में असफल होता है, तो वह अपने लिए ही भयावह स्थितियों का निर्माण कर रहा है। आज धरती की करुण पुकार इसके असंतुलित पर्यावरण के रूप में सुनाई दे रही है। कहीं अधिक शीत तो कहीं अधिक गर्मी, कहीं जल की कमी और कहीं बाढ़ जैसी परिस्थितियां संपूर्ण मानव जाति के लिए चेतावनी है।
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समय-समय पर वह परम शक्ति परमात्मा स्वयं धरा पर अवतरित होकर इसे अपना सान्निध्य एवं संरक्षण प्रदान करते हैं और मानव जाति को ब्रह्मज्ञान व अध्यात्म से स्वार्थ के दायरे से बाहर निकाल कर उसे उसके कर्तव्यों का बोध करवाते हैं। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संरक्षण प्रकल्प से प्रकृति का संरक्षण और धरती को उसकी गरिमा लौटाने का अथक प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आशुतोष महाराज ने कहा है कि यदि हम प्रकृति की रक्षा करते हैं तो प्रकृति सदैव हमारी रक्षा करेगी। परंतु स्वार्थयुक्त होकर अगर हम प्रकृति का उपभोग करेंगे तो प्रकृति संपूर्ण जीव जगत के संहार का कारण बन जाएगी। परमात्मा ने प्रकृति को ऐसा बनाया है कि वह प्रत्येक जीव की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, परंतु मनुष्य अपनी इच्छाओं के लिए प्रकृति को पीड़ा देता है।
प्लास्टिक और पॉलीथिन इत्यादि पदार्थों का उपयोग कर हम अपनी धरती के लिए बहुत बड़ा संकट पैदा कर रहे हैं। यदि समय रहते प्रकृति मां की रक्षा नहीं की गई तो पृथ्वी से जीवन का विनाश हो जाएगा। चूंकि मनुष्य की स्वार्थपरायणता के फलस्वरूप जीव जगत की कई प्रजातियां तो धरती से विलुप्त हो चुकी है। यदि ऐसा ही रहा तो मानव जाति भी विलुप्त हो जाएगी। सत्संग में साध्वियों ने भजनों से ईश्वर व गुरु की महिमा का गुणगान किया।