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कोरोना के चलते टाले जा रहे ऑपरेशन, हालात सुधरने तक का इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 21 May 2021 02:22 AM IST
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operation postphand
कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग और सरकार ने जहां महामारी से निपटने में सारी ताकत झोंक रखी है। वहीं उन मरीजों का उपचार अटक गया है, जिनका किसी बीमारी के चलते ऑपरेशन होना था। ऐसे मरीजों को कोरोना का संक्रमण कम होने पर ऑपरेशन करने की बात कहकर दो से तीन महीने बाद आने को कहा जा रहा है। बढ़ते संक्रमण के खतरे के कारण चिकित्सक भी अपनी और मरीज दोनों की सेहत को ध्यान रखते हुए एहतियात बरत रहे हैं।
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इमरजेंसी केस में जिन मरीजों के ऑपरेशन हो भी रहे हैं तो इससे पहले कोविड-19 की जांच अनिवार्य की गई है। आलम यह है कि सामान्य दिनों की अपेक्षा 75 फीसदी ऑपरेशन कम हो गए हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में पहले जहां करीब विभिन्न बीमारियों के चार सौ आपरेशन होते थे, वहीं अब केवल 30 से 50 ऑपरेशन ही होते हैं, इनमें से 80 फीसदी ऑपरेशन दुर्घटना के केस और डिलीवरी के सिजेरियन केस होते हैं। मई महीने में केवल छह लोगों के सामान्य ऑपरेशन ही किए गए हैं। हालांकि जिले के दोनों सिविल अस्पतालों में सामान्य बीमारियों के लिए केवल चार घंटे के लिए ओपीडी चालू है। वहीं जिन सीएचसी और पीएचसी में कोविड मरीज नहीं है, वहां भी सामान्य ओपीडी चल रही है, हालांकि पहले जहां सिविल अस्पताल में पंद्रह सौ तक की ओपीडी होती थी, वो घटकर पांच सौ से छह सौ तक होती है।
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सैकड़ों मरीजों की परेशानी बढ़ी
ऑपरेशन टलने से उन मरीजों की परेशानी बढ़ गई है, जिन्हें जरूरी ऑपरेशन कराना था। इसके लिए उन्हें पहले से तिथि भी मिली हुई थी। इनमें पथरी, मोतियाबिंद, हाइड्रोसील, हर्निया, ब्रेस्ट की गांठ, बवासीर, भगंदर जैसी अन्य बीमारी शामिल हैं। ऑपरेशन बंद होने से सैकड़ों मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। शहर के वरिष्ठ लैप्रोस्कोपिक व जनरल सर्जन डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि जहां दवा से कुछ दिन तक मरीज को स्वस्थ रखा जा सकता है, वहां ऑपेरशन से बच रहे हैं, लेकिन गंभीर श्रेणी के मरीजों को ज्यादा दिन टाला नहीं जा सकता। ऐसे मामलों में कोविड जांच के बाद ऑपरेशन किया जा रहा है। ऑपरेशन थिएटर को पूरी तरह सैनिटाइज कर रहे हैं।
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निजी अस्पतालों पर एक नजर
- जिले में 100 से ज्यादा नर्सिंग होम व अस्पताल हैं।
-रोजाना 5000 की ओपीडी का फिजीशियन और महिला चिकित्सकों का औसत था।
- अब यह ओपीडी 1000 के आसपास सीमित है।
- प्रतिदिन 150 आर्थोपेडिक व जनरल ऑपरेशन होते थे, अब सिर्फ इमरजेंसी तक ही सीमित है।
- प्रतिदिन करीब 200 प्रसव होते थे। अब केवल इमरजेंसी केस में ऑपरेशन ।
- 50 प्रमुख फिजिशियन व विषय विशेषज्ञ हैं।
- 30 प्रमुख आर्थोपेडिक व जनरल सर्जन हैं।
- 30 प्रमुख महिला चिकित्सक शहर में हैं।
कोरोना संक्रमण के बाद आने को कहा जा रहा : दहिया
सीएमओ डॉ. विजय दहिया ऑपरेशन के लिए जिसे भी पहले से तिथि दी गई थी, उन्हें अब कोरोना संक्रमण के बाद आने को कहा गया है। सिर्फ इमरजेंसी केस के ही ऑपरेशन हो रहे हैं। प्रसव से जुड़े मामले में ऑपरेशन करना जरूरी है। एहतियात के रूप में मरीजों की पहले कोविड जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही ऑपरेशन हो रहे हैं। जिन मरीजों की स्थिति गंभीर नहीं है, उन्हें दवा देकर इंतजार के लिए कहा जा रहा है। ओपीडी आने वाले मरीजों को भी सलाह दी जा रही है कि मामूली तकलीफ होने पर अस्पताल आने से बचें और टेलीफोन पर सलाह लें।
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