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Yamuna Nagar News: खैर के पेड़ चोरी करने के दोषी को एक साल की कैद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। छछरौली रेंज के सरकारी जंगल से खैर के पेड़ चोरी करने के दोषी नगली-32 निवासी तासीम को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय आरपी सिंह की कोर्ट ने एक साल कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर दो हजार रुपये जुर्माना भी किया है। इस केस के अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्यावरण कोर्ट में मुकदमा चल रहा है।
एक अगस्त 2022 को छछरौली रेंज की चिक्कन बीट के वन रक्षक इंचार्ज देवव्रत ने प्रतापनगर थाने में शिकायत दी थी कि उन्हें सूचना मिली थी कि सरकारी जंगलों से कटी खैर के पेड़ों की लकड़ी लेकर कुछ व्यक्ति ट्रक में भरकर बेचने के लिए निकलेंगे। इंचार्ज देवव्रत ने वन दरोगा, साथी कर्मचारियों के साथ गांव बनियावाला के नजदीक सड़क पर बैरिकेड लगा कर नाकाबंदी शुरू कर दी। इसी दौरान एक ट्रक ने बैरिकेड तोड़ दिया और नाकाबंदी टीम के सदस्यों पर ट्रक चढ़ाने का प्रयास किया। कर्मचारियों ने भाग कर अपनी जान बचाई। पीछा करने पर आरोपी ट्रक को छोड़कर फरार हो गए थे। भागते हुए व्यक्तियों की पहचान नगली-32 निवासी तासीम, कांसली निवासी रासीद और जाटांवाला निवासी तालिब के रूप में की गई थी। ट्रक से खैर के छिले हुए 298 टुकड़े बरामद हुए थे। यह लकड़ी सरकारी जंगलों से खैर के पेड़ों को चोरी से काटकर लाई गई थी। आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 32,33,52 तथा वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की 1972 की धारा 27,29,51, आईपीसी की धारा 379, 307 के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी तासीम के खिलाफ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में केस चल रहा था। कोर्ट ने उसे आईपीसी की धारा 379 के तहत दोषी करार दिया है।
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यमुनानगर। छछरौली रेंज के सरकारी जंगल से खैर के पेड़ चोरी करने के दोषी नगली-32 निवासी तासीम को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय आरपी सिंह की कोर्ट ने एक साल कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर दो हजार रुपये जुर्माना भी किया है। इस केस के अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्यावरण कोर्ट में मुकदमा चल रहा है।
एक अगस्त 2022 को छछरौली रेंज की चिक्कन बीट के वन रक्षक इंचार्ज देवव्रत ने प्रतापनगर थाने में शिकायत दी थी कि उन्हें सूचना मिली थी कि सरकारी जंगलों से कटी खैर के पेड़ों की लकड़ी लेकर कुछ व्यक्ति ट्रक में भरकर बेचने के लिए निकलेंगे। इंचार्ज देवव्रत ने वन दरोगा, साथी कर्मचारियों के साथ गांव बनियावाला के नजदीक सड़क पर बैरिकेड लगा कर नाकाबंदी शुरू कर दी। इसी दौरान एक ट्रक ने बैरिकेड तोड़ दिया और नाकाबंदी टीम के सदस्यों पर ट्रक चढ़ाने का प्रयास किया। कर्मचारियों ने भाग कर अपनी जान बचाई। पीछा करने पर आरोपी ट्रक को छोड़कर फरार हो गए थे। भागते हुए व्यक्तियों की पहचान नगली-32 निवासी तासीम, कांसली निवासी रासीद और जाटांवाला निवासी तालिब के रूप में की गई थी। ट्रक से खैर के छिले हुए 298 टुकड़े बरामद हुए थे। यह लकड़ी सरकारी जंगलों से खैर के पेड़ों को चोरी से काटकर लाई गई थी। आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 32,33,52 तथा वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की 1972 की धारा 27,29,51, आईपीसी की धारा 379, 307 के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी तासीम के खिलाफ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में केस चल रहा था। कोर्ट ने उसे आईपीसी की धारा 379 के तहत दोषी करार दिया है।
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