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ज्ञानियों से विनम्रता से करनी चाहिए ज्ञान की प्राप्ति : शशि प्रभा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 31 Aug 2024 03:33 AM IST
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One should acquire knowledge from learned people with humility: Shashi Prabha
रादौर। अंधेरिया बाग स्थित प्राचीन शिव मंदिर में चल रही श्रीराम चरितमानस कथा के आठवें दिन कथा व्यास शशि प्रभा ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि जब भरत और अन्य सभी लोगों ने श्रीराम के समक्ष वापस अयोध्या जाकर राज्य करने का प्रस्ताव रखा। इसे श्रीराम ने पिता की आज्ञा पालन करने और रघुवंश की रीति निभाने के लिए अमान्य कर दिया।
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भरत अपने स्नेहीजनों के साथ श्रीराम की पादुका को साथ लेकर वापस अयोध्या आ गए। उन्होंने श्रीराम की पादुका को राज सिंहासन पर विराजित कर दिया और स्वयं नंदीग्राम में निवास करने लगे। कुछ काल के पश्चात श्रीराम ने चित्रकूट से प्रयाण किया और वह अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे। ऋषि अत्रि ने श्रीराम की स्तुति की और उनकी पत्नी अनसूया ने सीता को पातिव्रत धर्म का मर्म समझाया।
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वहां से फिर श्रीराम ने आगे प्रस्थान किया और शरभंग मुनि से भेंट की। शरभंग मुनि केवल श्री राम के दर्शन की कामना से वहां निवास कर रहे थे, इसलिए श्रीराम के दर्शनों की अपनी अभिलाषा पूर्ण हो जाने से योगाग्नि से अपने शरीर को जला डाला और ब्रह्मलोक को गमन किया। आगे बढ़ने पर श्रीराम को स्थान-स्थान पर हड्डियों के ढेर दिखाई पड़े। इनके विषय में मुनियों ने श्रीराम को बताया कि राक्षसों ने अनेक मुनियों को खा डाला है।
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यह उन्हीं मुनियों की हड्डियां हैं। इस पर श्रीराम ने प्रतिज्ञा की कि वे समस्त राक्षसों का वध कर पृथ्वी को राक्षस विहीन कर देंगे। श्री राम और आगे बढ़े तो पथ में सुतीक्ष्ण, अगस्त्य आदि ऋषियों से भेंट करते हुए दंडक वन में प्रवेश किया, जहां पर उनकी भेंट जटायु से हुई। श्री राम ने पंचवटी को अपना निवास स्थान बनाया। हमें भी विनम्रता से ज्ञानियों से ज्ञान की प्राप्ति करनी चाहिए।

कथा में मुख्य यजमान तेजपाल सैनी व रामपाल सैनी ने व्यास पूजा की। मंच संचालन मास्टर राजेश शास्त्री ने किया। महंत यमुना गिरी महाराज के सानिध्य में चल रहे श्री रामचरितमानस ज्ञान यज्ञ के समापन पर 31 अगस्त को भंडारे का आयोजन होगा। मौके पर इंदु शर्मा, राजेश शास्त्री, एनके शर्मा, मुख्य यजमान विनोद वर्मा, उमेश, सतीश गोयल मौजूद रहे।
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