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Yamuna Nagar News: बीता एक माह, अब तो पुल की सुध लो सरकार

Sun, 07 Jul 2024 06:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 07 Jul 2024 06:44 AM IST
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One month has passed, now the government should take care of the bridge
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। यूपी से लगे गांवों में यमुना नदी पर पुल बनाने की मांग के लिए ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया था। मतदान के दिन इसकी जानकारी मिलने पर स्थानीय प्रशासन ही नहीं, सरकार भी हरकत में आ गई थी। स्वयं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले में संज्ञान लिया। इसके बाद डीसी और एसपी ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को चुनाव आचार संहिता के बाद सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया था, लेकिन एक माह बाद भी किसी ने सुध नहीं ली है। इससे नाराज ग्रामीणों ने समस्या समाधान के लिए आंदोलन करने और आगामी विधानसभा चुनाव में फिर से मतदान के बहिष्कार का एलान किया है।
दरअसल, यमुना नदी के किनारे बसे टापू माजरी और घोड़ो पीपली के हजारों ग्रामीण वर्षों से पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, ताकि हरियाणा और यमुनानगर जिले से वो सीधे जुड़ सकें। फिलहाल पुल नहीं होने के कारण उन्हें यमुनानगर जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए यूपी के रास्ते 35 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है।
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घाेड़ो पीपली के सरपंच प्रतिनिधि सुमित ने बताया कि उक्त दोनों गांव हरियाणा प्रदेश और यमुनानगर जिले के अंतर्गत हैं, पर दशकों से अपने प्रदेश व जिले से ग्रामीणों का सीधा सड़क संपर्क नहीं है। क्योंकि बीच से यमुना नदी निकल रही है, जिससे दोनों गांवों के लोग यूपी के रास्ते मुख्य बाजार और जिला मुख्यालय आते-जाते हैं।
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दोनों गांवों के ग्रामीणों को खेतीबाड़ी, उच्च शिक्षा और अन्य कामों के लिए भी यूपी के रास्ते करीब 20 किमी. अतिरिक्त सफर करना पड़ता है, जबकि कहने को गांव से यमुनानगर जिला मुख्यालय की दूरी 12 किलोमीटर है। पिछले कई वर्षों से ग्रामीण लगातार बीबीपुर में यमुना नदी पर पुल की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर कई बार पंचायतें हुईं।
ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल डीसी और विधायक से भी मिला पर नतीजा ढाक के तीन पात। अब एकबार फिर ग्रामीण लोकतांत्रित तरीके से सरकार को जगाने के लिए आंदोलन की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि अगर शीघ्र ही प्रदेश सरकार ने समस्या की सुध नहीं ली तो वे आंदोलन के साथ ही एकबार फिर आगामी विस चुनाव का बहिष्कार करने के लिए मजबूर होंगे।

नाव पर आने-जाने में जान का जोखिम
क्षेत्रवासी संदीप कुमार, प्रदीप कुमार, अनिल, देवेंद्र, राजेंद्र ने बताया कि पुल की मांग पूरी न होने से ग्रामीण कई बार मजबूरी में नाव से यमुना नदी पार कर आवाजाही करते हैं। ऐसे में वे कीचड़ व रेत की परेशानी झेलते हैं और जान भी जोखिम में डालते हैं। कारण कि यमुना नदी का जलस्तर कब बढ़ जाए, यह पता नहीं लगता। खास तौर पर बरसात में इसका अधिक खतरा रहता है।

डीसी के आदेश पर लोकसभा चुनाव के दौरान ही मौका मुआयना किया था। तब पुल का प्रपोजल बनाकर डीसी के माध्यम से मुख्यालय भेजा गया था। फिलहाल इसके स्टेट्स की जानकारी नहीं है। - गुरविंद्र सिंह देओल, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
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