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Yamuna Nagar News: शिष्यों ने 49वें दिन पूरी की गुरु की अंतिम इच्छा

Tue, 24 Feb 2026 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 24 Feb 2026 12:55 AM IST
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On the 49th day, the disciples fulfilled the Guru's last wish
ऐतिहासिक चनेटी स्तूप पर प्रार्थना करते ​भिक्षु। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। ऐतिहासिक चनेटी स्तूप पर रिनपोछे खेनचेन सोनम ग्यात्सो की पावन स्मृति में श्रद्धापूर्ण तीर्थयात्रा और विशेष प्रार्थना समारोह का आयोजन किया गया। 1 जनवरी को बोधगया में उनके महापरिनिर्वाण के बाद बौद्ध परंपरा के अनुसार 49वां दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी क्रम में सोमवार को उनके शिष्यों ने उनकी अधूरी इच्छा को पूर्ण किया।
खेनचेन सोनम ग्यात्सो ने मार्च 2026 में बोधगया से लौटने के बाद चनेटी स्तूप पर संस्कृत में प्रज्ञापारमिता सूत्र (हृदय सूत्र) का पाठ करने की योजना बनाई थी, किंतु इससे पूर्व ही उनका महापरिनिर्वाण हो गया। शिष्यों ने गुरु की इसी पवित्र भावना को स्मरण करते हुए स्तूप परिसर में सामूहिक पाठ एवं प्रार्थना की।
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कार्यक्रम में लगभग 120 प्रतिभागियों भिक्षु, भिक्षुणियां, उपासक और उपासिकाएं ने भाग लिया। सभी ने चनेटी स्तूप के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। रिनपोछे इस स्थल को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र मानते थे। वे हरियाणा को वह पुण्यभूमि बताते थे जहां भगवान बुद्ध ने पदार्पण किया तथा जहां प्राचीन स्तूपों और अशोक स्तंभों के अवशेष प्राप्त होते हैं।
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अपने शोध और लेखन के माध्यम से उन्होंने चनेटी जैसे पुनः प्रकाश में आए बौद्ध तीर्थस्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय बौद्ध समुदाय का ध्यान इस क्षेत्र की विरासत की ओर आकर्षित हुआ। 1950 में पश्चिमी तिब्बत में जन्मे खेनचेन सोनम ग्यात्सो 1959 में भारत आए और देहरादून स्थित साक्य कॉलेज में उच्च बौद्ध अध्ययन किया। उन्होंने खेनपो के रूप में सेवा दी, वर्ष 2000 में एक ध्यान केंद्र की स्थापना की तथा 2009 में साक्य कॉलेज फॉर नन्स की स्थापना की। वे मध्यमक दर्शन और बौद्ध तर्कशास्त्र के प्रकांड विद्वान थे।

इंटक यमुनानगर चैप्टर के सह-संयोजक सिद्धार्थ गौरी ने उनके महापरिनिर्वाण पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि रिनपोछे की यात्राओं ने हरियाणा की बौद्ध धरोहर के वैश्विक महत्व को उजागर किया है। चनेटी स्तूप पर उनकी स्मृति में यह वार्षिक प्रार्थना समारोह निरंतर आयोजित किया जाता रहेगा।
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