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Yamuna Nagar News: एनसीआर से आईं पुरानी बसें कुछ महीने में कंडम
Wed, 16 Jul 2025 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 16 Jul 2025 12:59 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। हरियाणा रोडवेज के यमुनानगर डिपो में आई नई बसों को एनसीआर में चलाया जा रहा है। इसके बदले में एनसीआर से पुरानी बसों को जिले के डिपो में भेजा जा रहा है। एनसीआर से आई बसें कुछ माह चलती हैं और कंडम हो जाती हैं।
कुछ माह पहले एनसीआर से आई बसों में से आठ कंडम हो चुकी हैं, हालांकि इन बसों को अभी सड़कों पर चलाया जा रहा है। बसों को कंडम करने की फाइल मुख्यालय में भेजी गई है। जहां से मंजूरी मिलते ही इन बसों को रोडवेज वर्कशॉप में खड़ा कर दिया जाएगा। जिससे एक बार फिर से रोडवेज में बसों की संख्या घट जाएगी।
दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण न फैले इसलिए वहां पर यूरो-3 व 4 की बसों को चलाने की अनुमति नहीं है। इसलिए एनसीआर में आने वाले जिलों से रोडवेज बसों को हटा कर दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है। वहीं सरकार से जो नई बीएस-6 बसें मिलती हैं उन्हें एनसीआर के जिलों में शिफ्ट कर दिया जाता है।
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इसी प्रक्रिया में कुछ माह पहले एनसीआर से करीब 40 बसों को यमुनानगर डिपो में भेजा गया था। जिनमें से कई तो काफी पहले कंडम हो गई थी। अब आठ बसें और कंडम हो चुकी हैं। दरअसल 10 लाख किलोमीटर चलने पर सरकार द्वारा बस को कंडम घोषित कर दिया जाता है। यह आठ बसें किलोमीटर के हिसाब से तो कंडम हो चुकी हैं, लेकिन कागजों में अभी भी दौड़ रही हैं।
यह वजह है कि यह बसें कई बार बीच सड़क में ही खराब हो जाती हैं। जिसके बाद सवारियों को दूसरी बस में भेजना पड़ता है। सर्विस आदि करके इन बसों को किसी तरह सड़कों पर चलाया जा रहा है। अब यमुनानगर डिपो में रोडवेज की कुल 160 बसें हैं।
इनमें से औसतन 10 बसें तो हर वक्त मरम्मत या फिर सर्विस के चलते वर्कशॉप में ही खड़ी रहती हैं। अब जब तक नई बसें नहीं आएंगी तब तक आठ और बसें कम हो जाएंगी।
दिल्ली एनसीआर से बीएस-3 व 4 की जो बसें आई थी उनमें से कई निर्धारित किलोमीटर सफर पूरा कर चुकी हैं। इसलिए इन्हें कंडम करने के लिए फाइल मुख्यालय भेजी है। बसों का कंडम होना रूटीन प्रक्रिया है। नई बसें आती रहती हैं। - संजय रावल, महाप्रबंधक, यमुनानगर रोडवेज।
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यमुनानगर। हरियाणा रोडवेज के यमुनानगर डिपो में आई नई बसों को एनसीआर में चलाया जा रहा है। इसके बदले में एनसीआर से पुरानी बसों को जिले के डिपो में भेजा जा रहा है। एनसीआर से आई बसें कुछ माह चलती हैं और कंडम हो जाती हैं।
कुछ माह पहले एनसीआर से आई बसों में से आठ कंडम हो चुकी हैं, हालांकि इन बसों को अभी सड़कों पर चलाया जा रहा है। बसों को कंडम करने की फाइल मुख्यालय में भेजी गई है। जहां से मंजूरी मिलते ही इन बसों को रोडवेज वर्कशॉप में खड़ा कर दिया जाएगा। जिससे एक बार फिर से रोडवेज में बसों की संख्या घट जाएगी।
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दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण न फैले इसलिए वहां पर यूरो-3 व 4 की बसों को चलाने की अनुमति नहीं है। इसलिए एनसीआर में आने वाले जिलों से रोडवेज बसों को हटा कर दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है। वहीं सरकार से जो नई बीएस-6 बसें मिलती हैं उन्हें एनसीआर के जिलों में शिफ्ट कर दिया जाता है।
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इसी प्रक्रिया में कुछ माह पहले एनसीआर से करीब 40 बसों को यमुनानगर डिपो में भेजा गया था। जिनमें से कई तो काफी पहले कंडम हो गई थी। अब आठ बसें और कंडम हो चुकी हैं। दरअसल 10 लाख किलोमीटर चलने पर सरकार द्वारा बस को कंडम घोषित कर दिया जाता है। यह आठ बसें किलोमीटर के हिसाब से तो कंडम हो चुकी हैं, लेकिन कागजों में अभी भी दौड़ रही हैं।
यह वजह है कि यह बसें कई बार बीच सड़क में ही खराब हो जाती हैं। जिसके बाद सवारियों को दूसरी बस में भेजना पड़ता है। सर्विस आदि करके इन बसों को किसी तरह सड़कों पर चलाया जा रहा है। अब यमुनानगर डिपो में रोडवेज की कुल 160 बसें हैं।
इनमें से औसतन 10 बसें तो हर वक्त मरम्मत या फिर सर्विस के चलते वर्कशॉप में ही खड़ी रहती हैं। अब जब तक नई बसें नहीं आएंगी तब तक आठ और बसें कम हो जाएंगी।
दिल्ली एनसीआर से बीएस-3 व 4 की जो बसें आई थी उनमें से कई निर्धारित किलोमीटर सफर पूरा कर चुकी हैं। इसलिए इन्हें कंडम करने के लिए फाइल मुख्यालय भेजी है। बसों का कंडम होना रूटीन प्रक्रिया है। नई बसें आती रहती हैं। - संजय रावल, महाप्रबंधक, यमुनानगर रोडवेज।