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अधिकारियों को प्रॉपर्टी टैक्स की नहीं जानकारी, वसूली तीन गुणा कम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Mar 2022 01:25 AM IST
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Officials do not know about property tax, recovery is three times less
नगर निगम क्षेत्र में कितनी यूनिट से प्रॉपर्टी टैक्स लेना हैं, इसकी सही जानकारी अधिकारियों के पास नहीं है। तभी तो लोगों से प्रॉपर्टी टैक्स लेने में अधिकारी साल दर साल चूक रहे हैं। वित्त वर्ष 2021-22 में अधिकारियों ने अनुमान लगाया था कि उनके पास 48 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स से आएंगे। परंतु अनुमान के आसपास भी टैक्स जमा नहीं हो पाया। अब तक 16 करोड़ पांच लाख रुपये टैक्स ही लोगों से मिल पाया है। लोगों से लिया गया टैक्स अनुमान से तीन गुणा कम है। जबकि 2022-23 में 60 करोड़ 58 लाख रुपयेे प्रॉपर्टी टैक्स का अनुमानित बजट रखा गया है।
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मेयर मदन चौहान ने 16 मार्च को नगर निगम हाउस की बजट बैठक बुलाई है। वैसे इससे पहले हाउस की आम बजट होनी थी, जिसमें शहर के विकास कार्यों को मंजूरी मिलती। शहर में चल रहे विकास कार्यों से केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के पार्षद भी खुश नहीं है। ऐसे में आम बैठक में हंगामा होने के आसार थे। मेयर आम बैठक नहीं बुलाएंगे इसका खुलासा अमर उजाला ने 18 फरवरी के अंक में ही कर दिया था। परंतु मेयर व अधिकारी पार्षदों के सवालों से बजट की बैठक में भी नहीं बचने वाले। पार्षदों ने भी उन्हें घेरने की पूरी तैयारी कर ली है।
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प्रॉपर्टी टैक्स तो सरकारी विभाग भी जमा नहीं करा रहे हैं। यदि कोई उपभोक्ता अपना बिजली का बिल नहीं भरता तो निगम उसके मीटर का कनेक्शन ही काट देते हैं। परंतु नगर निगम के अधिकारी कुछ भी नहीं कर रहे हैं। टैक्स के लिए कभी कभार नोटिस जारी कर दिया जाता है। 62 सरकारी भवनों पर नगर निगम का 14 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स कई सालों से बकाया है। अधिकारी इन विभागों को कई बार टैक्स भरने का अदायगी पत्र जारी भी कर चुके हैं। परंतु अधिकारी हैं कि इसे गंभीरता से नहीं ले रहे। लघु सचिवालय पर ही 15 लाख 91 हजार रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है।
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निजी संस्थानों पर करीब 40 करोड़ रुपये बकाया है। बकायादारों में, व्यावसायिक भवन मालिक, निजी अस्पताल, माल, शिक्षण संस्थान और धार्मिक संस्थाएं भी शामिल हैं। अधिकारियों की मानें तो प्रॉपर्टी टैक्स बकायादारों को नोटिस जारी किया जाता है। इसके बाद वे कुछ रकम जमा करा देते हैं, लेकिन किसी भी बकायादार ने अपना पूरा टैक्स जमा नहीं कराया है।

नाम न छापने की शर्त पर नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर लोग अपना प्रॉपर्टी टैक्स समय पर जमा करवा देते हैं। परंतु जो लोग टैक्स जमा नहीं करवाते उनके लिए सरकार कहीं ब्याज में छूट देती है तो कभी टैक्स में भी रियायत मिल जाती है। जो लोग समय पर टैक्स देते हैं उनके मन में एक बात घर कर गई है कि जो नियमित टैक्स दे रहे हैं उन्हें तो कोई छूट नहीं मिल रही है। जबकि डिफाल्टरों पर सरकार मेहरबानी करती है। ऐसे में नियमित टैक्स जमा कराने वाले भी अब डिफाल्टरों की श्रेणी में आने लगे हैं। जिस कारण प्रॉपर्टी टैक्स की रिकवरी पूरी नहीं हो रही। जब तक सरकार इस प्रथा को बंद नहीं करती तब तक इसमें सुधार होने वाला नहीं है।
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