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Yamuna Nagar News: अब रोजाना 50 किलो कूड़ा निकालने इकाइयों को भी बनानी होगी खाद
Sat, 27 Dec 2025 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 27 Dec 2025 01:08 AM IST
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गुलाब नगर के डंपिंग स्थल पर कूड़ा लेकर पहुंची नगर निगम की गाड़ी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम क्षेत्र में कूड़ा फैलाने वाले संस्थानों की अब खैर नहीं। अब तक रोजाना 100 किलोग्राम कूड़ा निकालने वालों को ही अपने स्तर पर खाद बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने पर नगर निगम ने बल्क वेस्ट मैनेजमेंट (बीडब्ल्यूजी) के तहत अब 50 किलोग्राम रोजाना कूड़ा निकालने वाले संस्थानों को भी नियमों के दायरे में लाने का फैसला किया है।
नगर निगम जल्द ही पूरे शहरी क्षेत्र में विशेष सर्वे कराएगा। इस सर्वे के जरिए उन सभी संस्थानों की पहचान की जाएगी, जिनके यहां से रोजाना 50 किलोग्राम या उससे अधिक कूड़ा निकलता है। सर्वे पूरा होते ही ऐसे सभी संस्थानों को अपने परिसर में ही गीले कूड़े से खाद बनाना अनिवार्य होगा। नियमों की अनदेखी करने वालों पर न केवल जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।
फिलहाल शहर में 100 किलोग्राम से अधिक कूड़ा निकालने वाले संस्थानों की संख्या सिर्फ 44 है। इनमें होटल, मैरिज पैलेस, रेस्टोरेंट और शिक्षण संस्थान शामिल हैं।
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नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह आंकड़ा वास्तविक स्थिति से काफी कम है। क्योंकि अन्य जिलों में यमुनानगर की तुलना में ऐसे संस्थानों की संख्या कई गुणा ज्यादा है। बीडब्ल्यूजी के तहत पंजीकृत संस्थानों की संख्या बेहद कम होना इस बात का संकेत है कि कई संस्थान नियमों से बचने के लिए गलत जानकारी दे रहे हैं।
कई संस्थान जानबूझकर 100 किलो से कम कूड़ा निकलने का दावा करते रहे हैं और चोरी छिपे कूड़ा सड़कों, खाली प्लॉटों और सार्वजनिक स्थानों पर फेंक देते हैं। इससे न केवल सफाई व्यवस्था चरमराती है, बल्कि शहर की छवि भी खराब होती है।
बार-बार शिकायतों और निरीक्षण में यह गड़बड़ी सामने आने के बाद निगम को मापदंड सख्त करने का निर्णय लेना पड़ा। अब 50 किलोग्राम की सीमा तय होने से निगम को ऐसे संस्थानों पर नकेल कसने में आसानी होगी। कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी अब निगम की नहीं, बल्कि कूड़ा पैदा करने वाले संस्थानों की होगी। मौके पर खाद बनाने की व्यवस्था न मिलने पर संबंधित संस्थान पर कार्रवाई होगी।
अभी तक केवल रोजाना 100 किलोग्राम कूड़ा निकालने वालों को ही अपने स्तर पर खाद बनानी होती थी। अब 50 किलो कूड़ा वाले संस्थानों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। कूड़ा सड़कों पर फेंकने की आदत अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बीडब्ल्यूजी नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इससे डंपिंग साइट पर दबाव घटेगा और शहर की सफाई व्यवस्था पहले से बेहतर होगी। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।
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यमुनानगर। नगर निगम क्षेत्र में कूड़ा फैलाने वाले संस्थानों की अब खैर नहीं। अब तक रोजाना 100 किलोग्राम कूड़ा निकालने वालों को ही अपने स्तर पर खाद बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने पर नगर निगम ने बल्क वेस्ट मैनेजमेंट (बीडब्ल्यूजी) के तहत अब 50 किलोग्राम रोजाना कूड़ा निकालने वाले संस्थानों को भी नियमों के दायरे में लाने का फैसला किया है।
नगर निगम जल्द ही पूरे शहरी क्षेत्र में विशेष सर्वे कराएगा। इस सर्वे के जरिए उन सभी संस्थानों की पहचान की जाएगी, जिनके यहां से रोजाना 50 किलोग्राम या उससे अधिक कूड़ा निकलता है। सर्वे पूरा होते ही ऐसे सभी संस्थानों को अपने परिसर में ही गीले कूड़े से खाद बनाना अनिवार्य होगा। नियमों की अनदेखी करने वालों पर न केवल जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।
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फिलहाल शहर में 100 किलोग्राम से अधिक कूड़ा निकालने वाले संस्थानों की संख्या सिर्फ 44 है। इनमें होटल, मैरिज पैलेस, रेस्टोरेंट और शिक्षण संस्थान शामिल हैं।
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नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह आंकड़ा वास्तविक स्थिति से काफी कम है। क्योंकि अन्य जिलों में यमुनानगर की तुलना में ऐसे संस्थानों की संख्या कई गुणा ज्यादा है। बीडब्ल्यूजी के तहत पंजीकृत संस्थानों की संख्या बेहद कम होना इस बात का संकेत है कि कई संस्थान नियमों से बचने के लिए गलत जानकारी दे रहे हैं।
कई संस्थान जानबूझकर 100 किलो से कम कूड़ा निकलने का दावा करते रहे हैं और चोरी छिपे कूड़ा सड़कों, खाली प्लॉटों और सार्वजनिक स्थानों पर फेंक देते हैं। इससे न केवल सफाई व्यवस्था चरमराती है, बल्कि शहर की छवि भी खराब होती है।
बार-बार शिकायतों और निरीक्षण में यह गड़बड़ी सामने आने के बाद निगम को मापदंड सख्त करने का निर्णय लेना पड़ा। अब 50 किलोग्राम की सीमा तय होने से निगम को ऐसे संस्थानों पर नकेल कसने में आसानी होगी। कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी अब निगम की नहीं, बल्कि कूड़ा पैदा करने वाले संस्थानों की होगी। मौके पर खाद बनाने की व्यवस्था न मिलने पर संबंधित संस्थान पर कार्रवाई होगी।
अभी तक केवल रोजाना 100 किलोग्राम कूड़ा निकालने वालों को ही अपने स्तर पर खाद बनानी होती थी। अब 50 किलो कूड़ा वाले संस्थानों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। कूड़ा सड़कों पर फेंकने की आदत अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बीडब्ल्यूजी नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इससे डंपिंग साइट पर दबाव घटेगा और शहर की सफाई व्यवस्था पहले से बेहतर होगी। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।