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अब स्कूलों में पढ़ाया जाएगा स्वच्छता का पाठ

Tue, 24 Sep 2013 12:40 AM IST
यमुनानगर।
यमुनानगर। Updated Tue, 24 Sep 2013 12:40 AM IST
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now the hygine lesson taught will be the student
सीबीएसई ने अब स्कूलों को स्वच्छता के आधार पर ग्रेड देने का निर्णय लिया है। इस फैसले को सभी के लिए अनिवार्य नहीं किया है, लेकिन स्वेच्छा से इसमें शामिल होने वाले स्कूलों को बिल्डिंग की साफ सफाई के पैरामीटर के आधार पर रेटिंग दी जाएगी, जो ऑनलाइन होगी। बोर्ड द्वारा दी जाने वाले ग्रेड में विद्यार्थियों को भी साफ सुथरा रहना अनिवार्य होगा।
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सकारात्मक बदलाव आएगा
सीबीएसई के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रोग्राम मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलेपमेंट और मिनिस्ट्री ऑफ अर्बन डेवलेपमेंट की ओर से लांच किया गया है। जिसे जल्द ही ऑनलाइन कर दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जिस प्रकार विद्यार्थी परीक्षा में पास होने के लिए अपनी तैयारी करते हैं, वैसे ही रेटिंग और ग्रेडिंग के लिए स्कूलों को तैयारी करनी पडे़गी। इस योजना में शामिल होने वाले स्कूलों को अपने यहां बिल्डिंग की स्वच्छता से जुड़े सभी पैरामीटर में सुधार करना पडे़गा, इससे एक सकारात्मक बदलाव तो आएगा ही, साथ ही बचपन से विद्यार्थियों को साफ सफाई के लिए जागरूक किया जा सकेगा।
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स्कूल में हेल्थ क्लब अनिवार्य
अधिकारियों का कहना है कि जो स्कूल इस योजना में शामिल होंगे, उन्हें अपने यहां पर बच्चों के लिए हेल्थ एंड वेलनेस क्लब का गठन करना होगा, जो समय-समय पर बच्चों को स्वास्थ्य व साफ सफाई से जुड़े जागरूक करने के लिए अभियान चलाएगा। इसके अलावा स्कूल में लड़कियों के लिए सही प्रकार से सेनिटेशन की सुविधा पर भी पूरा ध्यान दिया जाएगा। इतना ही नहीं स्कूल वाटर मैनेजमेंट के अलावा अन्य सुविधाओं में भी सुधार करना अनिवार्य होगा। इसके आधार पर स्कूल को रेटिंग प्रदान की जाएगी।
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सबने बताया सराहनीय कदम
सरस्वती पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल दीपक सिंगला का कहना है कि सीबीएसई ने स्वच्छता के आधार पर स्कूलों की ग्रेडिंग शुरू कर सराहनीय कदम उठाया है। इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा विद्यार्थियों को मिलेगा। बच्चों को बचपन से ही साफ सफाई के प्रति जागरूक किया जा सकेगा। स्कूल अपने स्तर पर समय समय पर बच्चों को जागरूक करते हैं, लेकिन ग्रेड प्राप्त करने के चक्कर में स्कूल इस ओर पहले से ज्यादा ध्यान देंगे। इसके अलावा स्कूल में जिन स्तरों पर कमी है, वह भी दूर हो पाएगी, वहीं अभिभावक सुमन व रजनी का कहना है कि कई बार बच्चे बाहर मिट्टी में खेलने व गंदी चीजें खाने से बीमार पड़ जाते हैं, लेकिन जब उन्हें स्वच्छता के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी, तो वे अपने स्वास्थ्य की ओर पहले से ज्यादा ध्यान दे पाएंगे। उन्होंने कहा की सीबीएसई ने विद्यार्थियों को हितों में ध्यान में रखकर सराहनीय पहल की है। सीबीएसई के अधिकारियों का कहना है कि फूड एंड न्यट्रीशियन, पर्सनल एन्वॉयरमेंट, हाईजिन एंड सेनिटेशन, बिहेवियर एंड लाइफ स्किल्स, फिजिकल फिटनेस, बीइंग रिस्पांसिबल एंड सेफ के स्तरों की जांच करने के बाद स्कूल को ग्रेड प्रदान की जाएगी।


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