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Yamuna Nagar News: अब फौजियों के गांव तिगरा में तैयार किए जाएंगे एथलीट
Fri, 25 Apr 2025 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 25 Apr 2025 12:26 AM IST
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राहुल शर्मा
यमुनानगर। गांव तिगरा भले दो समुदायों के बीच लंबे समय तक चले विवाद से जाना गया, पर धीरे-धीरे गांव की पहचान बदली है और अब यह फौजियों का गांव कहलाने लगा है, वहीं जल्द यहां की पहचान खेल से होगी। गांव में खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग की ओर से ग्राम पंचायत के सहयोग से एथलेटिक्स की खेल नर्सरी शुरू कर दी गई है। साथ ही कोच की नियुक्ति के साथ ट्रायल के जरिए खिलाड़ियों का चयन भी कर लिया गया है।
कोच द्वारा खिलाड़ियों को सुबह-शाम एथलेटिक्स की खेल स्पर्धाओं का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वहीं विभाग की ओर से हर खिलाड़ी को प्रतिमाह दो से तीन हजार डाइट खर्च भी देने की योजना है।
बता दें कि निजी व सरकारी शिक्षण एवं पंचायती व निजी खेल संस्थानों से अपने यहां खेल नर्सरियां शुरू करने के लिए खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग ने आवेदन मांगे थे। जिले से 31 मार्च तक 122 ऑनलाइन आवेदन थे। इनमें 30 में खेल नर्सरियां शुरू करने की अनुमति विभाग से मिल गई है। ऐसा माना जा रहा है कि खेल नर्सरियां की मंजूरी के लिए अभी पहली सूची जारी हुई है।
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जल्द अन्य सूची में आवेदन वाली दूसरी खेल नर्सरियों को भी शुरू करने की अनुमति मिल सकती है। जिन 30 खेल नर्सरियों को शुरू करने की अनुमति मिली है, उनमें सबसे ज्यादा एथलेटिक्स की आठ खेल नर्सरियां हैं। हॉकी व फुटबॉल की पांच-पांच, रेस्लिंग की चार और वॉलीबॉल की दो नर्सरियां हैं। इन्हीं में एक गांव तिगरा की एथलेटिक्स खेल नर्सरी भी है, जहां पहली बार यह नर्सरी शुरू हो रही है।
भिवानी के सोम शर्मा को कोच नियुक्त किया गया है। कोच शर्मा ने बताया कि तिगरा में पहली बार नर्सरी शुरू होने से गांव सहित आसपास के किशोर व युवा वर्ग में उत्साह देखा गया। ट्रायल में 25 खिलाड़ियों का चयन किया है। इन 25 खिलाड़ियों के बाद दस अतिरिक्त खिलाड़ी भी सूची में रखे हैं। यदि चयनित 25 खिलाड़ियों में किसी कारण कोई खिलाड़ी नर्सरी में नहीं आ पाता तो उसकी जगह अतिरिक्त खिलाड़ियों को नर्सरी में प्रशिक्षण का मौका दिया जाएगा।
नर्सरी में रोज सुबह-शाम खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसमें एथलेटिक्स की खेल स्पर्धाओं की बारीकियों से खिलाड़ियों को अवगत कराया जा रहा है। साथ ही उनका अभ्यास कराया जा रहा हे। इसके अलावा एथलेटिक्स खेल स्पर्धाओं की अलग-अलग प्रतियोगिताओं में कैसे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, इस बारे में भी बताया जा रहा है।
गांव तिगरा की एक खासियत पर हर कोई गर्व कर रहा है। वह यहां के युवाओं में देश सेवा करने का जुनून है। इसी जुनून के कारण गांव में हर सातवां घर फौजी परिवार का है। कई युवाओं ने गांव की सड़कों पर दौड़ तो कुछ ने गांव को मिले आधे-अधूरे खेल मैदान में खुद को सेना के लिए तैयार किया। गांव से करीब 40 लोग देश के रक्षक बन मातृभूमि की सेवा कर रहे हैं या कर चुके चुके हैं। सेना में जाने के लिए यहां के युवाओं का जुनून देख न सिर्फ गांव के बड़े-बुजुर्ग बल्कि जिले को भी नाज है। संवाद
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यमुनानगर। गांव तिगरा भले दो समुदायों के बीच लंबे समय तक चले विवाद से जाना गया, पर धीरे-धीरे गांव की पहचान बदली है और अब यह फौजियों का गांव कहलाने लगा है, वहीं जल्द यहां की पहचान खेल से होगी। गांव में खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग की ओर से ग्राम पंचायत के सहयोग से एथलेटिक्स की खेल नर्सरी शुरू कर दी गई है। साथ ही कोच की नियुक्ति के साथ ट्रायल के जरिए खिलाड़ियों का चयन भी कर लिया गया है।
कोच द्वारा खिलाड़ियों को सुबह-शाम एथलेटिक्स की खेल स्पर्धाओं का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वहीं विभाग की ओर से हर खिलाड़ी को प्रतिमाह दो से तीन हजार डाइट खर्च भी देने की योजना है।
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बता दें कि निजी व सरकारी शिक्षण एवं पंचायती व निजी खेल संस्थानों से अपने यहां खेल नर्सरियां शुरू करने के लिए खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग ने आवेदन मांगे थे। जिले से 31 मार्च तक 122 ऑनलाइन आवेदन थे। इनमें 30 में खेल नर्सरियां शुरू करने की अनुमति विभाग से मिल गई है। ऐसा माना जा रहा है कि खेल नर्सरियां की मंजूरी के लिए अभी पहली सूची जारी हुई है।
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जल्द अन्य सूची में आवेदन वाली दूसरी खेल नर्सरियों को भी शुरू करने की अनुमति मिल सकती है। जिन 30 खेल नर्सरियों को शुरू करने की अनुमति मिली है, उनमें सबसे ज्यादा एथलेटिक्स की आठ खेल नर्सरियां हैं। हॉकी व फुटबॉल की पांच-पांच, रेस्लिंग की चार और वॉलीबॉल की दो नर्सरियां हैं। इन्हीं में एक गांव तिगरा की एथलेटिक्स खेल नर्सरी भी है, जहां पहली बार यह नर्सरी शुरू हो रही है।
भिवानी के सोम शर्मा को कोच नियुक्त किया गया है। कोच शर्मा ने बताया कि तिगरा में पहली बार नर्सरी शुरू होने से गांव सहित आसपास के किशोर व युवा वर्ग में उत्साह देखा गया। ट्रायल में 25 खिलाड़ियों का चयन किया है। इन 25 खिलाड़ियों के बाद दस अतिरिक्त खिलाड़ी भी सूची में रखे हैं। यदि चयनित 25 खिलाड़ियों में किसी कारण कोई खिलाड़ी नर्सरी में नहीं आ पाता तो उसकी जगह अतिरिक्त खिलाड़ियों को नर्सरी में प्रशिक्षण का मौका दिया जाएगा।
नर्सरी में रोज सुबह-शाम खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसमें एथलेटिक्स की खेल स्पर्धाओं की बारीकियों से खिलाड़ियों को अवगत कराया जा रहा है। साथ ही उनका अभ्यास कराया जा रहा हे। इसके अलावा एथलेटिक्स खेल स्पर्धाओं की अलग-अलग प्रतियोगिताओं में कैसे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, इस बारे में भी बताया जा रहा है।
गांव तिगरा की एक खासियत पर हर कोई गर्व कर रहा है। वह यहां के युवाओं में देश सेवा करने का जुनून है। इसी जुनून के कारण गांव में हर सातवां घर फौजी परिवार का है। कई युवाओं ने गांव की सड़कों पर दौड़ तो कुछ ने गांव को मिले आधे-अधूरे खेल मैदान में खुद को सेना के लिए तैयार किया। गांव से करीब 40 लोग देश के रक्षक बन मातृभूमि की सेवा कर रहे हैं या कर चुके चुके हैं। सेना में जाने के लिए यहां के युवाओं का जुनून देख न सिर्फ गांव के बड़े-बुजुर्ग बल्कि जिले को भी नाज है। संवाद