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न पानी, न निकासी की सही व्यवस्था, बना दिया डेयरी कांप्लेक्स
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
Updated Sun, 19 Feb 2017 11:53 PM IST
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नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी की महत्वकांक्षी डेयरी शिफ्टिंग योजना के 12 साल बाद भी औरंगाबांद डेयरी कांप्लेक्स में आधी-अधूरी सुविधाएं हैं। नगर निगम ने विकास के नाम पर यहां करोड़ों रुपये खर्च कर दिए, लेकिन डेयरी संचालकों को फिर भी सुविधाएं नहीं मिल पाईं। यहां न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही सबसे जरूरी पानी निकासी की व्यवस्था है। करीब 125 डेयरी संचालकों के प्लॉट दिए गए, लेकिन एक दशक में करीब 15 डेयरी संचालक ही आ सके। वह भी सुविधाएं न होने से दिक्कतों से दो-चार हो रहे हैं। उधर, नगर निगम अधिकारी अन्य डेयरी संचालकों पर कांप्लेक्स में शिफ्टिंग का दवाब बना रहे हैं।
निगम का कमर्श्यल प्रोजेक्ट, न सीवरेज न पाइप लाइन:
किसी भी कमर्शियल प्रोजेक्ट में सबसे महत्वपूर्ण व आधारभूत ढांचे के तहत पेयजल पाइप लाइन और निकासी के लिए सीवरेज पाइप लाइन होती है। 12 साल से प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, लेकिन यहां पर न तो पेयजल पाइप लाइन डाली गई और न ही सीवरेज लाइन। ऐसे में डेयरी संचालक भी परेशान हैं। एक डेयरी संचालक ने बताया कि अधिकारी कहते हैं कि पेयजल पाइप लाइन है, मगर किसी भी डेयरी संचालक के पास कनेक्शन नहीं है।
पानी निकासी के लिए इंतजाम, लेकिन अधूरे.....
नगर निगम की ओर से पानी निकासी के लिए कांप्लेक्स के बाहर दो होद और उससे आगे नाले का निर्माण करवाया गया है। योजना है कि गंदा पानी को होद में एकत्रित किया जाए। पहले होद में गोबर रह जाए और दूसरे होद से होते हुए पानी होकर आगे नाले से निकल जाए। लेकिन निगम की सारी जुगत आधी अधूरी है। निगम ने कांप्लेक्स के बाहर होद व उससे आगे नाला बनाया है। मगर होद तक गंदे पानी आने के लिए कांप्लेक्स में नालियां ही नहीं है। इसी तरह कुछ लोग ने होद पर मिट्टी के कट्टे लगाकर पानी निकासी ही रोक रखी है। ऐसे में होद भर कर ओवरफ्लो हो गए हैं और गंदा पानी कांप्लेक्स में ही फैल रहा है। एक डेयरी संचालक ने बताया कि होद व उससे आगे नाला बनाया गया है, लेकिन डेयरी से गंदे पानी की निकासी के लिए नालियां या सीवरेज लाइन नहीं है। जिस कारण अधिकतर डेयरियों का पानी इधर-उधर खाली प्लाट या गलियों में ही बह दिया जाता है।
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सबमर्सिबल से चल रहा है काम:
नगर निगम की ओर से कांप्लेक्स में पेयजल आपूर्ति के लिए नलकूप लगाने के लिए कमरा बनाया गया, लेकिन यहां नलकूप नहीं लगाया गया। ऐसे में नलकूप के कमरे में लगे ताले पर भी जंग लग गया है। जिसकी वजह से डेयरी संचालकों ने लाखों रुपये खर्च कर अपने स्तर पर सबमर्सिबल पंप लगवा रखे हैं। डेयरी संचालक ने बताया कि डेयरी शिफ्ट कर चुके हैं, इसलिए पंप भी लगवाना पड़ा। नलकूप लगाने व पाइप लाइन डालने का काम कांप्लेक्स बनने से पहले ही लगाना चाहिए था।
बेवक्त के बिजली कट से भी परेशानी:
औरंगाबाद का डेयरी कांप्लेक्स नगर निगम क्षेत्र में है, लेकिन यहां पर डेयरी संचालकों के सामने सबसे बड़ी परेशानी बिजली कट्स को लेकर है। डेयरी संचालकों ने बताया कि यहां पर बिजली की आपूर्ति ग्रामीण क्षेत्र के मुताबिक होती है। उसके बावजूद यहां पर बिजली के आने व जाने का कोई समय नही है। कई बार मवेशियों को पानी भी नहीं पिला पाते हैं। कट्स की वजह से हरे चारे की बजाए तूड़ी से काम चलना पड़ता है। गर्मियों के समय में ये परेशानी और भी बढ़ जाती है।
प्रॉपर्टी टैक्स मिलने से भी बड़ी परेशानी:
डेयरी संचालकों की परेशानी इन दिनों और भी बढ़ गई है। निगम की ओर से कांप्लेक्स में डेयरी संचालकों को प्रापर्टी टैक्स नोटिस भी भेज दिए गए हैं। पांच सौ गज वाले प्लाट के मालिक को निगम की ओर से करीब दो लाख रुपये का नोटिस मिल है। एक साथ लाखों रुपये प्रापर्टी टैक्स देख कर डेयरी संचालक भी हैरान व परेशान हो गए हैं।
यूनियन ने की थी कांप्लेक्स में मुख्य पांच सुविधाएं देने की मांग:
मामले को लेकर मिल्क डेयरी वर्कर यूनियन का प्रतिनिधिमंडल बेअंत सिंह भाटिया व सचिव राजकुमार नागपाल के नेतृत्व में बीती चार फरवरी को विधायक घनश्यामदास अरोड़ा से मिला था। इस दौरान बेअंत भाटिया व राजकुमार नागपाल ने कहा कि नगर निगम द्वारा डेयरी संचालकों को कांप्लेक्स में शिफ्टिंग के नोटिस दिए जा रहे हैं। जबकि कांप्लेक्स में सुविधाएं पूरी नहीं हैं। उन्होंने विधायक के समक्ष शिफ्टिंग से पूर्व कांप्लेक्स में मुख्य रूप से पांच सुविधाएं मुहैया कराने की मांग रखी। इनमें निकासी, पक्की सड़कें, स्ट्रीट लाइट व सफाई के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति व डॉक्टर व अन्य सुविधाओं से लेस पशु अस्पताल की सुविधाएं शामिल हैं। विधायक द्वारा 28 फरवरी तक कांप्लेक्स में तमाम सुविधाएं मुहैया कराए जाने का आश्वासन दिया गया था।
यरी शिफ्टिंग के लिए दड़वा कांप्लेक्स में सभी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए काम चल रहा है। इसके बाद औरंगाबाद कांप्लेक्स में काम शुरू कराया जाएगा।
घनश्यामदास अरोड़ा, विधायक, यमुनानगर।
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निगम का कमर्श्यल प्रोजेक्ट, न सीवरेज न पाइप लाइन:
किसी भी कमर्शियल प्रोजेक्ट में सबसे महत्वपूर्ण व आधारभूत ढांचे के तहत पेयजल पाइप लाइन और निकासी के लिए सीवरेज पाइप लाइन होती है। 12 साल से प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, लेकिन यहां पर न तो पेयजल पाइप लाइन डाली गई और न ही सीवरेज लाइन। ऐसे में डेयरी संचालक भी परेशान हैं। एक डेयरी संचालक ने बताया कि अधिकारी कहते हैं कि पेयजल पाइप लाइन है, मगर किसी भी डेयरी संचालक के पास कनेक्शन नहीं है।
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पानी निकासी के लिए इंतजाम, लेकिन अधूरे.....
नगर निगम की ओर से पानी निकासी के लिए कांप्लेक्स के बाहर दो होद और उससे आगे नाले का निर्माण करवाया गया है। योजना है कि गंदा पानी को होद में एकत्रित किया जाए। पहले होद में गोबर रह जाए और दूसरे होद से होते हुए पानी होकर आगे नाले से निकल जाए। लेकिन निगम की सारी जुगत आधी अधूरी है। निगम ने कांप्लेक्स के बाहर होद व उससे आगे नाला बनाया है। मगर होद तक गंदे पानी आने के लिए कांप्लेक्स में नालियां ही नहीं है। इसी तरह कुछ लोग ने होद पर मिट्टी के कट्टे लगाकर पानी निकासी ही रोक रखी है। ऐसे में होद भर कर ओवरफ्लो हो गए हैं और गंदा पानी कांप्लेक्स में ही फैल रहा है। एक डेयरी संचालक ने बताया कि होद व उससे आगे नाला बनाया गया है, लेकिन डेयरी से गंदे पानी की निकासी के लिए नालियां या सीवरेज लाइन नहीं है। जिस कारण अधिकतर डेयरियों का पानी इधर-उधर खाली प्लाट या गलियों में ही बह दिया जाता है।
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सबमर्सिबल से चल रहा है काम:
नगर निगम की ओर से कांप्लेक्स में पेयजल आपूर्ति के लिए नलकूप लगाने के लिए कमरा बनाया गया, लेकिन यहां नलकूप नहीं लगाया गया। ऐसे में नलकूप के कमरे में लगे ताले पर भी जंग लग गया है। जिसकी वजह से डेयरी संचालकों ने लाखों रुपये खर्च कर अपने स्तर पर सबमर्सिबल पंप लगवा रखे हैं। डेयरी संचालक ने बताया कि डेयरी शिफ्ट कर चुके हैं, इसलिए पंप भी लगवाना पड़ा। नलकूप लगाने व पाइप लाइन डालने का काम कांप्लेक्स बनने से पहले ही लगाना चाहिए था।
बेवक्त के बिजली कट से भी परेशानी:
औरंगाबाद का डेयरी कांप्लेक्स नगर निगम क्षेत्र में है, लेकिन यहां पर डेयरी संचालकों के सामने सबसे बड़ी परेशानी बिजली कट्स को लेकर है। डेयरी संचालकों ने बताया कि यहां पर बिजली की आपूर्ति ग्रामीण क्षेत्र के मुताबिक होती है। उसके बावजूद यहां पर बिजली के आने व जाने का कोई समय नही है। कई बार मवेशियों को पानी भी नहीं पिला पाते हैं। कट्स की वजह से हरे चारे की बजाए तूड़ी से काम चलना पड़ता है। गर्मियों के समय में ये परेशानी और भी बढ़ जाती है।
प्रॉपर्टी टैक्स मिलने से भी बड़ी परेशानी:
डेयरी संचालकों की परेशानी इन दिनों और भी बढ़ गई है। निगम की ओर से कांप्लेक्स में डेयरी संचालकों को प्रापर्टी टैक्स नोटिस भी भेज दिए गए हैं। पांच सौ गज वाले प्लाट के मालिक को निगम की ओर से करीब दो लाख रुपये का नोटिस मिल है। एक साथ लाखों रुपये प्रापर्टी टैक्स देख कर डेयरी संचालक भी हैरान व परेशान हो गए हैं।
यूनियन ने की थी कांप्लेक्स में मुख्य पांच सुविधाएं देने की मांग:
मामले को लेकर मिल्क डेयरी वर्कर यूनियन का प्रतिनिधिमंडल बेअंत सिंह भाटिया व सचिव राजकुमार नागपाल के नेतृत्व में बीती चार फरवरी को विधायक घनश्यामदास अरोड़ा से मिला था। इस दौरान बेअंत भाटिया व राजकुमार नागपाल ने कहा कि नगर निगम द्वारा डेयरी संचालकों को कांप्लेक्स में शिफ्टिंग के नोटिस दिए जा रहे हैं। जबकि कांप्लेक्स में सुविधाएं पूरी नहीं हैं। उन्होंने विधायक के समक्ष शिफ्टिंग से पूर्व कांप्लेक्स में मुख्य रूप से पांच सुविधाएं मुहैया कराने की मांग रखी। इनमें निकासी, पक्की सड़कें, स्ट्रीट लाइट व सफाई के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति व डॉक्टर व अन्य सुविधाओं से लेस पशु अस्पताल की सुविधाएं शामिल हैं। विधायक द्वारा 28 फरवरी तक कांप्लेक्स में तमाम सुविधाएं मुहैया कराए जाने का आश्वासन दिया गया था।
यरी शिफ्टिंग के लिए दड़वा कांप्लेक्स में सभी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए काम चल रहा है। इसके बाद औरंगाबाद कांप्लेक्स में काम शुरू कराया जाएगा।
घनश्यामदास अरोड़ा, विधायक, यमुनानगर।