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Yamuna Nagar News: ट्रैक न कोच, कहां करें साइकिलिंग
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। लगातार साइकिल यात्राओं से साइकिल चलाने का संदेश दिया जा रहा है, पर इसके लिए न खेल स्टेडियमों में अलग ट्रैक है और न ही सड़कों के साथ अलग से लेन है। इस स्पर्धा में खिलाड़ी तैयार करने के लिए खेल विभाग के पास कोच भी नहीं है। इन हालात में कैसे साइकिलिंग की सोच बनेगी, यह प्रश्नचिह्न लग रहा है।
शहर से लेकर गांवों में साइकिलिंग के लिए हर उम्र वर्ग में खासा रुझान है। कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन में अधिकांश ने खुद को स्वस्थ रखने के लिए साइकिल चलानी शुरू की। तब से अब तक कई साइकिलिंग ग्रुप व क्लब चल रहे हैं। इनके सदस्य छुट्टी के दिन कई किमी. साइकिलिंग कर रहे हैं। इनमें कई साइकिलिंग स्पर्धा की प्रतियोगिता में प्रतिभा दिखाने के भी इच्छुक हैं। बावजूद इसके न खेल स्टेडियमों में साइकिलिंग के ट्रैक हैं और न सड़कों के साथ साइकिलिंग की अलग लेन है। साइकिलिंग के कोच भी नहीं है।
लॉकडाउन में ग्रीन क्लब बनाकर साइकिल शुरू करने वाले अभि, सन्नी व बंटी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ईंधन वाले वाहनों के बजाय साइकिलिंग का उपयोग जरूरी है। इसलिए लॉकडाउन में रोज 5 से 20 तो कभी 50 किमी. साइकिलिंग की। इसके बाद रोज के बजाए ऐसा केवल रविवार को करने लगे। उन्हें यह करता देख कई सदस्य क्लब से जुड़े। अब भी क्लब के सदस्य साइकिलिंग कर रहे हैं, पर ज्यादातर सदस्य कामों में व्यस्तता व साइकिलिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी में साथ नहीं है।
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उनकी मांग है कि साइकिलिंग के लिए सड़कों के साथ अलग लेन हो। क्योंकि सड़कों पर हैवी ट्रैफिक होने के साथ गड्ढे हैं, जिसमें साइकिलिंग करने में जोखिम लगता है। साथ ही कई लोग साइकिलिंग स्पर्धा की प्रतियोगिता में भी हिस्सा लेना चाहते हैं, जिनके लिए स्टेडियमों में साइकिलिंग ट्रैक व कोच की सुविधा दी जानी चाहिए।
खेल कोचों की मांग बारे निदेशालय को लिखा है। अन्य कोई मांग सामने आती है तो उससे भी अवगत कराया जाएगा। - शिल्पा गुप्ता, जिला खेल अधिकारी।
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यमुनानगर। लगातार साइकिल यात्राओं से साइकिल चलाने का संदेश दिया जा रहा है, पर इसके लिए न खेल स्टेडियमों में अलग ट्रैक है और न ही सड़कों के साथ अलग से लेन है। इस स्पर्धा में खिलाड़ी तैयार करने के लिए खेल विभाग के पास कोच भी नहीं है। इन हालात में कैसे साइकिलिंग की सोच बनेगी, यह प्रश्नचिह्न लग रहा है।
शहर से लेकर गांवों में साइकिलिंग के लिए हर उम्र वर्ग में खासा रुझान है। कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन में अधिकांश ने खुद को स्वस्थ रखने के लिए साइकिल चलानी शुरू की। तब से अब तक कई साइकिलिंग ग्रुप व क्लब चल रहे हैं। इनके सदस्य छुट्टी के दिन कई किमी. साइकिलिंग कर रहे हैं। इनमें कई साइकिलिंग स्पर्धा की प्रतियोगिता में प्रतिभा दिखाने के भी इच्छुक हैं। बावजूद इसके न खेल स्टेडियमों में साइकिलिंग के ट्रैक हैं और न सड़कों के साथ साइकिलिंग की अलग लेन है। साइकिलिंग के कोच भी नहीं है।
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लॉकडाउन में ग्रीन क्लब बनाकर साइकिल शुरू करने वाले अभि, सन्नी व बंटी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ईंधन वाले वाहनों के बजाय साइकिलिंग का उपयोग जरूरी है। इसलिए लॉकडाउन में रोज 5 से 20 तो कभी 50 किमी. साइकिलिंग की। इसके बाद रोज के बजाए ऐसा केवल रविवार को करने लगे। उन्हें यह करता देख कई सदस्य क्लब से जुड़े। अब भी क्लब के सदस्य साइकिलिंग कर रहे हैं, पर ज्यादातर सदस्य कामों में व्यस्तता व साइकिलिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी में साथ नहीं है।
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उनकी मांग है कि साइकिलिंग के लिए सड़कों के साथ अलग लेन हो। क्योंकि सड़कों पर हैवी ट्रैफिक होने के साथ गड्ढे हैं, जिसमें साइकिलिंग करने में जोखिम लगता है। साथ ही कई लोग साइकिलिंग स्पर्धा की प्रतियोगिता में भी हिस्सा लेना चाहते हैं, जिनके लिए स्टेडियमों में साइकिलिंग ट्रैक व कोच की सुविधा दी जानी चाहिए।
खेल कोचों की मांग बारे निदेशालय को लिखा है। अन्य कोई मांग सामने आती है तो उससे भी अवगत कराया जाएगा। - शिल्पा गुप्ता, जिला खेल अधिकारी।