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एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल तय, स्वास्थ्य सेवाएं होंगी प्रभावित
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हड़ताल को लेकर जनसंपर्क अभियान चलाते स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारी।
- फोटो : Yamuna Nagar
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यमुनानगर। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर एनएचएम कर्मचारी वीरवार को हड़ताल पर रहेंगे। हड़ताल के लिए संघ की ओर से प्रशासन को पूर्व में ही नोटिस दिया जा चुका है। सिविल अस्पताल, उप नागरिक अस्पताल, सभी पीएचसी, सीएचसी, अर्बन व रूलर डिस्पेंसरी में करीब 520 एनएचएम कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें डॉक्टर से लेकर लैब टेक्नीशियन, रेडियोलॉजिस्ट, अकाउंटेंट, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं।
यह सभी कर्मचारी वीरवार को संघ के आह्वान पर हड़ताल में शामिल होंगे। वहीं संघ प्रदेश संगठन मंत्री विजय कांबोज ने कहा कि कर्मचारी आंदोलन के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा के आठ महीने बाद भी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिला है। इसे लेकर कर्मचारियों में भारी रोष है।
विजय कांबोज ने कहा की सरकार ने दीपावली पर सातवां वेतन आयोग लागू करने की घोषणा की थी लेकिन आठ महीने बाद भी इसके बारे में पत्र जारी नहीं किया है। संगठन की ओर से सरकार को कई बार सांकेतिक प्रदर्शन कर चेतावनी दी गई लेकिन कोई असर नहीं हुआ। जिसके बाद मजबूरन कर्मचारियों को हड़ताल पर जाना पड़ रहा है। इसके बाद भी यदि सरकार नहीं मानती तो कर्मचारी बड़ा आंदोलन करेंगे।
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यह हैं मुख्य मांगें
- दो नवंबर को घोषित सातवें वेतन आयोग की सिफारिश तुरंत लागू की जाए।
- मुख्यमंत्री की सहमति व चार वर्ष बीत जाने के बाद भी एनएचएम की वेतन विसंगति दूर नहीं की गई हैं, इसे दुरुस्त किया जाए।
- प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2020 में घोषित कोरोना प्रोत्साहन राशि पांच हजार रुपये सभी कर्मचारियों को जल्द से जल्द दी जाए।
- सर्व शिक्षा अभियान की तर्ज पर एनएचएम कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए।
- एनएचएम कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- एनएचएम में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों को सेवा नियमों का लाभ दिया जाए और प्रारंभिक वेतन 80,000 किया जाए।
- कर्मचारियों को 58 वर्ष तक गेस्ट अध्यापकों की तर्ज पर सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।
- एनएचएम कर्मचारियों का वर्ष 2017 व 2019 में आंदोलन व हड़ताल के दौरान काटा गया वेतन एमपीएचई हड़ताल, आंगनबाड़ी हड़ताल की भांति अवकाश मानकर जारी किया जाए।
- एनएचएम कर्मचारियों के लिए तमिलनाडु और मणिपुर राज्य की तर्ज पर रेगुलर पॉलिसी बनाई जाए।
- आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत लगाए गए कर्मचारियों को एनएचएम में शामिल किया जाए।
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यह सभी कर्मचारी वीरवार को संघ के आह्वान पर हड़ताल में शामिल होंगे। वहीं संघ प्रदेश संगठन मंत्री विजय कांबोज ने कहा कि कर्मचारी आंदोलन के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा के आठ महीने बाद भी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिला है। इसे लेकर कर्मचारियों में भारी रोष है।
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विजय कांबोज ने कहा की सरकार ने दीपावली पर सातवां वेतन आयोग लागू करने की घोषणा की थी लेकिन आठ महीने बाद भी इसके बारे में पत्र जारी नहीं किया है। संगठन की ओर से सरकार को कई बार सांकेतिक प्रदर्शन कर चेतावनी दी गई लेकिन कोई असर नहीं हुआ। जिसके बाद मजबूरन कर्मचारियों को हड़ताल पर जाना पड़ रहा है। इसके बाद भी यदि सरकार नहीं मानती तो कर्मचारी बड़ा आंदोलन करेंगे।
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यह हैं मुख्य मांगें
- दो नवंबर को घोषित सातवें वेतन आयोग की सिफारिश तुरंत लागू की जाए।
- मुख्यमंत्री की सहमति व चार वर्ष बीत जाने के बाद भी एनएचएम की वेतन विसंगति दूर नहीं की गई हैं, इसे दुरुस्त किया जाए।
- प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2020 में घोषित कोरोना प्रोत्साहन राशि पांच हजार रुपये सभी कर्मचारियों को जल्द से जल्द दी जाए।
- सर्व शिक्षा अभियान की तर्ज पर एनएचएम कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए।
- एनएचएम कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- एनएचएम में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों को सेवा नियमों का लाभ दिया जाए और प्रारंभिक वेतन 80,000 किया जाए।
- कर्मचारियों को 58 वर्ष तक गेस्ट अध्यापकों की तर्ज पर सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।
- एनएचएम कर्मचारियों का वर्ष 2017 व 2019 में आंदोलन व हड़ताल के दौरान काटा गया वेतन एमपीएचई हड़ताल, आंगनबाड़ी हड़ताल की भांति अवकाश मानकर जारी किया जाए।
- एनएचएम कर्मचारियों के लिए तमिलनाडु और मणिपुर राज्य की तर्ज पर रेगुलर पॉलिसी बनाई जाए।
- आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत लगाए गए कर्मचारियों को एनएचएम में शामिल किया जाए।