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नाबालिग के अपहरणकर्ता को सात साल कैद
ब्यूरो/अमर उजाला/यमुनानगर
Updated Sat, 27 Feb 2016 12:32 AM IST
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शादी का झांसा देकर नाबालिग का अपहरण करने के दोषी मुस्ताफाबाद निवासी अमनदीप को कोर्ट ने सात साल कैद तथा पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) डॉ. नरेश कुमार सिंहल की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब एक साल चली सुनवाई के दौरान दर्जन भर लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत शुक्रवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया।
23 नवंबर 2014 को हरिनगर (यमुनानगर) निवासी रामेश ने पुलिस को शिकायत दी थी कि वह सुबह साढे़ छह बजे अपनी पत्नी व दो बहनों के साथ ट्रेन से हरिद्वार गया था। जबकि उसकी दो बेटियां व मां घर पर ही थी। उसी दिन 10/11 बजे उसकी बेटी बिना बताए घर से कहीं चली गई। उसके भाई जंग बहादुर व मां ने उसकी आसपास तथा रिश्तेदारियों में तलाश की, लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं लगा।
शिकायकर्ता के मुताबिक कुछ दिन पहले गली में किराए पर रहे रहे अमनदीप (मुस्तफाबाद निवासी) ने उनके घर पर मोबाइल फोन फेंका था। जिस कारण उनकी लड़की को लेकर उससे झगड़ा भी हुआ था। उसने आरोप लगाया कि अमनदीप ने ही उसकी बेटी को बहला फुसला कर अगवा किया है। पुलिस ने रामेश की शिकायत पर अमनदीप के खिलाफ भादंसं की धारा 363 व 366 के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। 24 नवंबर को पुलिस ने दोनों को काबू कर लिया। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके उपरांत कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हो गई।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायधीश डॉ. नरेश कुमार सिंहल ने अमनदीप को नाबालिग के अपहरण का दोषी करार देते हुए भादंसं की धारा 366 में उसे सात साल कैद तथा तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि धारा 363 में पांच साल कैद तथा दो हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
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23 नवंबर 2014 को हरिनगर (यमुनानगर) निवासी रामेश ने पुलिस को शिकायत दी थी कि वह सुबह साढे़ छह बजे अपनी पत्नी व दो बहनों के साथ ट्रेन से हरिद्वार गया था। जबकि उसकी दो बेटियां व मां घर पर ही थी। उसी दिन 10/11 बजे उसकी बेटी बिना बताए घर से कहीं चली गई। उसके भाई जंग बहादुर व मां ने उसकी आसपास तथा रिश्तेदारियों में तलाश की, लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं लगा।
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शिकायकर्ता के मुताबिक कुछ दिन पहले गली में किराए पर रहे रहे अमनदीप (मुस्तफाबाद निवासी) ने उनके घर पर मोबाइल फोन फेंका था। जिस कारण उनकी लड़की को लेकर उससे झगड़ा भी हुआ था। उसने आरोप लगाया कि अमनदीप ने ही उसकी बेटी को बहला फुसला कर अगवा किया है। पुलिस ने रामेश की शिकायत पर अमनदीप के खिलाफ भादंसं की धारा 363 व 366 के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। 24 नवंबर को पुलिस ने दोनों को काबू कर लिया। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके उपरांत कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हो गई।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायधीश डॉ. नरेश कुमार सिंहल ने अमनदीप को नाबालिग के अपहरण का दोषी करार देते हुए भादंसं की धारा 366 में उसे सात साल कैद तथा तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि धारा 363 में पांच साल कैद तथा दो हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।