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संकरे रास्ते पर जाम के साथ खतरे में जान
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Thu, 10 Dec 2015 11:58 PM IST
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एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) किनारे खड़े सैकड़ों ट्रक फोग सीजन में हादसों का न्यौता देते दिख रहे हैं। खानचंद चौक से पश्चिमी यमुना नहर पुल तक करीब डेढ़ किलोमीटर मार्ग के दोनों ओर ट्रक खड़े हैं। संकरे रास्ता होने से जाम की स्थिति में हादसे का भी भय रहता है। फोग सीजन में हादसों की संभावना और अधिक बढ़ जाती है, किंतु इस दिशा में कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। जबकि बीते वर्षों में हाईवे किनारे खड़े ट्रक धुंध बढ़ने पर कई हादसों का कारण बन चुके हैं।
बता दें कि जिले में ट्रांसपोर्ट नगर न होने से हजारों ट्रक शहर से निकलते हाईवे व अन्य सड़कों के किनारे खड़े रहते हैं। सबसे अधिक ट्रक एनएच-73 खानचंद चौक से पश्चिमी यमुना नहर पुल मार्ग के दोनों ओर खड़े होते हैं। यहीं पर ही ट्रकों की मरम्मत का भी कार्य किया जाता है।
ट्रांसपोर्ट नगर की दरकार में ऐसा करना ट्रांसपोर्टरों व ट्रक मालिकों की मजबूरी बन गई है। जबकि इससे मार्ग के संकरा होने से हर वक्त जाम की दिक्कत के साथ हादसों की भी संभावना बनी रहती है। वहीं, ट्रांसपोर्टरों व ट्रक चालकों को भी ट्रक चोरी होने का भय रहता है। इस समस्या के समाधान के लिए वर्ष-1990 से प्रयास हैं कि जिले में अलग से ट्रांसपोर्ट नगर बनाया जाए, किंतु तब से ट्रांसपोर्ट नगर की फाइल अटकी हुई है।
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इस कारण समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उधर, बीते वर्ष यमुनानगर के दौरे पर आए सीएम मनोहर लाल खट्टर इस कार्य को जल्द पूरा होने घोषणा कर गए। इसके बाद से ट्रांसपोर्टरों सहित इस क्षेत्र से जुड़े तमाम लोगों को उम्मीद है कि इस दिशा में जल्द सकारात्मक पहल की जाएगी।
शहर से गुजरने वाले एनएच-73 के एक ओर शहर की आधी आबादी का एरिया पुराना हमीदा में बसा हुआ है। जहां कई दशक से सैकड़ों ट्रांसपोर्टरों सहित हजारों लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। सरकार को व्यापार से करोड़ों का राजस्व मिलने के बाद भी अलग ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बन पाया।
ऐसे में माल ढोने वाले ट्रक खानचंद चौक से पश्चिमी यमुना नहर पुल तक सड़क के दोनों ओर किनारे खड़े रहते हैं और यहीं उनके रिपेयर का भी काम होता है। इससे ट्रैफिक बढ़ने पर जाम की स्थिति में हाईवे की एक लेन पर एक बार में एक ही चारपहिया वाहन निकल पता है।
इस बीच तीन व दोपहिया वाहन चालकों सहित राहगीरों का गुजरना जोखिम भरा बन जाता है। फोग सीजन (दिसंबर-फरवरी) के बीच हादसों की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। बीते वर्षों में भी खड़े ट्रकों में टकराने व जाम के बीच ओवरटेक करते हुए कई हादसे हुए।
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बता दें कि जिले में ट्रांसपोर्ट नगर न होने से हजारों ट्रक शहर से निकलते हाईवे व अन्य सड़कों के किनारे खड़े रहते हैं। सबसे अधिक ट्रक एनएच-73 खानचंद चौक से पश्चिमी यमुना नहर पुल मार्ग के दोनों ओर खड़े होते हैं। यहीं पर ही ट्रकों की मरम्मत का भी कार्य किया जाता है।
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ट्रांसपोर्ट नगर की दरकार में ऐसा करना ट्रांसपोर्टरों व ट्रक मालिकों की मजबूरी बन गई है। जबकि इससे मार्ग के संकरा होने से हर वक्त जाम की दिक्कत के साथ हादसों की भी संभावना बनी रहती है। वहीं, ट्रांसपोर्टरों व ट्रक चालकों को भी ट्रक चोरी होने का भय रहता है। इस समस्या के समाधान के लिए वर्ष-1990 से प्रयास हैं कि जिले में अलग से ट्रांसपोर्ट नगर बनाया जाए, किंतु तब से ट्रांसपोर्ट नगर की फाइल अटकी हुई है।
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इस कारण समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उधर, बीते वर्ष यमुनानगर के दौरे पर आए सीएम मनोहर लाल खट्टर इस कार्य को जल्द पूरा होने घोषणा कर गए। इसके बाद से ट्रांसपोर्टरों सहित इस क्षेत्र से जुड़े तमाम लोगों को उम्मीद है कि इस दिशा में जल्द सकारात्मक पहल की जाएगी।
शहर से गुजरने वाले एनएच-73 के एक ओर शहर की आधी आबादी का एरिया पुराना हमीदा में बसा हुआ है। जहां कई दशक से सैकड़ों ट्रांसपोर्टरों सहित हजारों लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। सरकार को व्यापार से करोड़ों का राजस्व मिलने के बाद भी अलग ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बन पाया।
ऐसे में माल ढोने वाले ट्रक खानचंद चौक से पश्चिमी यमुना नहर पुल तक सड़क के दोनों ओर किनारे खड़े रहते हैं और यहीं उनके रिपेयर का भी काम होता है। इससे ट्रैफिक बढ़ने पर जाम की स्थिति में हाईवे की एक लेन पर एक बार में एक ही चारपहिया वाहन निकल पता है।
इस बीच तीन व दोपहिया वाहन चालकों सहित राहगीरों का गुजरना जोखिम भरा बन जाता है। फोग सीजन (दिसंबर-फरवरी) के बीच हादसों की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। बीते वर्षों में भी खड़े ट्रकों में टकराने व जाम के बीच ओवरटेक करते हुए कई हादसे हुए।