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बढ़ा मुआवजा नहीं मिला तो नहीं बनने देंगे बाईपास
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Fri, 25 Sep 2015 11:59 PM IST
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ट्विनसिटी से गुजरने वाले नेशनल हाईवे को शहर से बाहर करने के लिए बाईपास निर्माण में एक बार फिर खतरे के बादल मंडराने लगे है। इसके लिए जिन किसानों की भूमि अधिगृहीत की गई थी, उन्होंने नए भूमि अधिग्रहण विधेयक के तहत मुआवजा की मांग शुरू कर दी है।
किसानों ने शुक्रवार को पीडब्ल्यूडी रेस्टहाउस में बैठक कर अपनी रणनीति तय की। फैसला लिया कि यदि उन्हें बढ़ा हुआ मुआवजा न मिला तो वे बाईपास का निर्माण नहीं होने देंगे। किसान संघर्ष समिति व भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले दर्जनों किसान पीडब्ल्यूडी रेस्टहाउस में जमा हुए और सरकार से बढ़ा हुआ मुआवजा लेने के लिए संघर्ष का ऐलान किया। किसानों ने डीसी आवास पर जाकर डीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री को अपनी मांगों का ज्ञापन भिजवाया।
किसान संघर्ष समिति के प्रधान खिलाराम व भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश सचिव हरपाल सुढल ने कहा कि दो साल पहले किसानों ने सरकार के दबाव में मुआवजा राशि ली थी। उस समय सरकार ने मध्यस्थता के लिए जिले के एडीसी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन आज तक इस मामले को लेकर किसानों के साथ एक भी मीटिंग नहीं की गई।
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उस समय किसानों को जो मुआवजा दिया गया था, नए भूमि अधिग्रहण विधेयक में वह मुआवजा करीब चार गुना बनता है। किसानों ने कहा कि यदि उन्हें बढ़ा मुआवजा नहीं मिला तो किसी भी कीमत पर बाईपास का निर्माण नहीं होने देंगे। भाकियू नेता हरपाल ने बताया कि रोड छप्पर गांव में किसानों ने बाईपास निर्माण के लिए बुर्जियां लगाए जाने का काम रुकवा दिया है। किसान किसी भी गांव में बाईपास का निर्माण नहीं होने देंगे।
बाईपास निर्माण के लिए कलानौर, तिगरी, मंडोली, करहेड़ा खुर्द, पांजूपुर, खंडवा, हरिपुर, सुखपुरा, औरंगाबाद, रोड छप्पर, हरगढ़, गोलनपुर, हरनौल, गलौली, मंडेबरी, सुढल, सुढैल, रुलाखेड़ी, कैल, भंभौली, कान्हड़ी खुर्द, गधौला, गधौली, मिल्क माजरा, लंढौरा, मंसूरपुर व सबलुपर सहित 28 गांवों की करीब 425 एकड़ जमीन एक्वायर की गई थी।
बाईपास का निर्माण पिछले करीब एक दशक से लटका हुआ है। यमुनानगर व जगाधरी शहर के लिए बाईपास का निर्माण बहुत महत्वपूर्ण है। इसके तहत यमुनानगर और जगाधरी से गुजरने वाले नेशनल हाईवे को शहर से बाहर बनाया जाना है। दोनों शहरों के बीच करीब 10 किलोमीटर लंबा नेशनल हाईवे गुजरता है। हाईवेे से गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण आए दिन जानलेवा सड़क हादसे होते रहते हैं। इन हादसों में 10 साल में 300 से अधिक व्यक्तियों की जान जा चुकी हैं। मरने वाले में कई नौजवान युवक भी शामिल हैं।
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किसानों ने शुक्रवार को पीडब्ल्यूडी रेस्टहाउस में बैठक कर अपनी रणनीति तय की। फैसला लिया कि यदि उन्हें बढ़ा हुआ मुआवजा न मिला तो वे बाईपास का निर्माण नहीं होने देंगे। किसान संघर्ष समिति व भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले दर्जनों किसान पीडब्ल्यूडी रेस्टहाउस में जमा हुए और सरकार से बढ़ा हुआ मुआवजा लेने के लिए संघर्ष का ऐलान किया। किसानों ने डीसी आवास पर जाकर डीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री को अपनी मांगों का ज्ञापन भिजवाया।
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किसान संघर्ष समिति के प्रधान खिलाराम व भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश सचिव हरपाल सुढल ने कहा कि दो साल पहले किसानों ने सरकार के दबाव में मुआवजा राशि ली थी। उस समय सरकार ने मध्यस्थता के लिए जिले के एडीसी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन आज तक इस मामले को लेकर किसानों के साथ एक भी मीटिंग नहीं की गई।
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उस समय किसानों को जो मुआवजा दिया गया था, नए भूमि अधिग्रहण विधेयक में वह मुआवजा करीब चार गुना बनता है। किसानों ने कहा कि यदि उन्हें बढ़ा मुआवजा नहीं मिला तो किसी भी कीमत पर बाईपास का निर्माण नहीं होने देंगे। भाकियू नेता हरपाल ने बताया कि रोड छप्पर गांव में किसानों ने बाईपास निर्माण के लिए बुर्जियां लगाए जाने का काम रुकवा दिया है। किसान किसी भी गांव में बाईपास का निर्माण नहीं होने देंगे।
बाईपास निर्माण के लिए कलानौर, तिगरी, मंडोली, करहेड़ा खुर्द, पांजूपुर, खंडवा, हरिपुर, सुखपुरा, औरंगाबाद, रोड छप्पर, हरगढ़, गोलनपुर, हरनौल, गलौली, मंडेबरी, सुढल, सुढैल, रुलाखेड़ी, कैल, भंभौली, कान्हड़ी खुर्द, गधौला, गधौली, मिल्क माजरा, लंढौरा, मंसूरपुर व सबलुपर सहित 28 गांवों की करीब 425 एकड़ जमीन एक्वायर की गई थी।
बाईपास का निर्माण पिछले करीब एक दशक से लटका हुआ है। यमुनानगर व जगाधरी शहर के लिए बाईपास का निर्माण बहुत महत्वपूर्ण है। इसके तहत यमुनानगर और जगाधरी से गुजरने वाले नेशनल हाईवे को शहर से बाहर बनाया जाना है। दोनों शहरों के बीच करीब 10 किलोमीटर लंबा नेशनल हाईवे गुजरता है। हाईवेे से गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण आए दिन जानलेवा सड़क हादसे होते रहते हैं। इन हादसों में 10 साल में 300 से अधिक व्यक्तियों की जान जा चुकी हैं। मरने वाले में कई नौजवान युवक भी शामिल हैं।