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नगर सुधार मंडल का एरिया न अपना न बेगाना
अमर उजाला ब्यूरो/यमुनानगर
Updated Sun, 16 Feb 2014 06:10 PM IST
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का हिस्सा होते हुए भी नगर निगम का हिस्सा नहीं है। नगर सुधार मंडल को नगर
निगम में मर्ज करने की सरकार की घोषणा से इन कॉलोनियों में विकास कार्य
बीच में ही लटकर रह गए हैं।
सरकार ने घोषणा तो कर दी लेकिन नोटिफिकेशन करना भूल गई। इससे इन कॉलोनियों के बाशिंदे अपने आपको शहर के विकास के एजेंडे से महरूम समझते हैं। क्योंकि नगर सुधार मंडल इन दिनों अंतिम सांस ले रहा है। इससे उसे भी सरकार के नोटिफिकेशन का बड़ी बेसब्री से इंतजार है।
जो सड़क टूट गई, स्ट्रीट लाइट खराब हो गई और सीवरेज ब्लॉक हो गई तो उसे ठीक करने वाला कोई नहीं है। मंडल शक्तिहीन होने से लोग समस्याओं से जूझते रहते हैं और उनकी सुनने वाला कोई नहीं होता। कभी नगर निगम की तरह अपने अधीन आने वाले क्षेत्र में विकास की बयार बहाने वाले नगर सुधार मंडल के पास कमरों के बराबर कर्मचारी भी नहीं है। यमुनानगर कार्यालय में इस समय दो कर्मचारी हैं, जबकि चार कमरे हैं।
2009 से सक्रिय नहीं मंडल
नगर सुधार मंडल वर्ष 2009 से सक्रिय नहीं है। इससे पहले नगर सुधार मंडल में आधा दर्जन के करीब सदस्य और एक चेयरमैन होता था। सदस्यों में पार्षद भी हुआ करते थे। मंडल की कमेटी में डीटीपी भी हुआ करता था। इसी कमेटी की देखरेख में मंडल के अधीन आने वाले क्षेत्र में विकास कार्य कराए जाते थे। वर्ष 2009 के बाद से न कोई कमेटी बनी और न ही चेयरमैन चुना गया। कमेटी न बनने से नगर सुधार मंडल निष्क्रिय हो गया है और उसके बाद गत वर्ष सरकार ने इसे निगम में मर्ज करने की घोषणा कर दी।
एस्टिमेट बनाने के लिए स्टाफ नहीं
सरोजनी कॉलोनी के पार्ट एक और दो में 500 प्लॉट, पार्ट दो में 16 दुकानें हैं। शास्त्री कॉलोनी में करीब 190 प्लॉट, कमला मार्केट में 25 दुकानें और एक होटल, ज्वाहर मार्केट में 84 दुकानें, एक पोस्ट ऑफिस और एक बैंक है। सरोजनी कॉलोनी, शास्त्री कॉलोनी और इंद्रा कॉलोनी में हजारों परिवार रहते हैं। अगर इन क्षेत्र में किसी तरह का विकास कार्य कराने हो तो इसके लिए एस्टिमेट बनाने के लिए भी नगर सुधार मंडल के पास स्टाफ भी नहीं है। न तो कोई इंजीनियर है और न ही कोई जेई। जो दुकानें और अन्य क्षेत्र से किराए के पैसे मंडल के पास आते हैं उन्हें भी विकास कार्यों पर नहीं खर्चा जा रहा है।
पार्षद भी हैं परेशान
इन क्षेत्र के लोगों ने नगर निगम के चुनाव में वोटिंग कर अपने क्षेत्र के पार्षद को चुना। लोग पार्षदों को विकास कराने के लिए कहते हैं। लेकिन नगर निगम का हिस्सा न होने से इस क्षेत्र का विकास नहीं करा पाते। पिछले दिनों हुई नगर निगम हाउस की दूसरी बैठक में यह मुद्दा उठा था। इसमें सीनियर डिप्टी मेयर ने शास्त्री कॉलोनी में लाइटें खराब होने की बात उठाई थी। उनका कहना था कि लाइटें कई दिनों से खराब पड़ी है। नगर निगम अधिकारियों को कहते हैं तो वे निगम का क्षेत्र न होने पर पल्ला झाड़ देते हैं, वहीं नगर सुधार मंडल के अधिकारियों से संपर्क किया जाता है तो उनकी ओर से स्टाफ न होने की बात कह दी जाती है। इसके बाद बैठक में काफी हल्ला भी हुआ था।
सरकार ने घोषणा तो कर दी लेकिन नोटिफिकेशन करना भूल गई। इससे इन कॉलोनियों के बाशिंदे अपने आपको शहर के विकास के एजेंडे से महरूम समझते हैं। क्योंकि नगर सुधार मंडल इन दिनों अंतिम सांस ले रहा है। इससे उसे भी सरकार के नोटिफिकेशन का बड़ी बेसब्री से इंतजार है।
जो सड़क टूट गई, स्ट्रीट लाइट खराब हो गई और सीवरेज ब्लॉक हो गई तो उसे ठीक करने वाला कोई नहीं है। मंडल शक्तिहीन होने से लोग समस्याओं से जूझते रहते हैं और उनकी सुनने वाला कोई नहीं होता। कभी नगर निगम की तरह अपने अधीन आने वाले क्षेत्र में विकास की बयार बहाने वाले नगर सुधार मंडल के पास कमरों के बराबर कर्मचारी भी नहीं है। यमुनानगर कार्यालय में इस समय दो कर्मचारी हैं, जबकि चार कमरे हैं।
2009 से सक्रिय नहीं मंडल
नगर सुधार मंडल वर्ष 2009 से सक्रिय नहीं है। इससे पहले नगर सुधार मंडल में आधा दर्जन के करीब सदस्य और एक चेयरमैन होता था। सदस्यों में पार्षद भी हुआ करते थे। मंडल की कमेटी में डीटीपी भी हुआ करता था। इसी कमेटी की देखरेख में मंडल के अधीन आने वाले क्षेत्र में विकास कार्य कराए जाते थे। वर्ष 2009 के बाद से न कोई कमेटी बनी और न ही चेयरमैन चुना गया। कमेटी न बनने से नगर सुधार मंडल निष्क्रिय हो गया है और उसके बाद गत वर्ष सरकार ने इसे निगम में मर्ज करने की घोषणा कर दी।
एस्टिमेट बनाने के लिए स्टाफ नहीं
सरोजनी कॉलोनी के पार्ट एक और दो में 500 प्लॉट, पार्ट दो में 16 दुकानें हैं। शास्त्री कॉलोनी में करीब 190 प्लॉट, कमला मार्केट में 25 दुकानें और एक होटल, ज्वाहर मार्केट में 84 दुकानें, एक पोस्ट ऑफिस और एक बैंक है। सरोजनी कॉलोनी, शास्त्री कॉलोनी और इंद्रा कॉलोनी में हजारों परिवार रहते हैं। अगर इन क्षेत्र में किसी तरह का विकास कार्य कराने हो तो इसके लिए एस्टिमेट बनाने के लिए भी नगर सुधार मंडल के पास स्टाफ भी नहीं है। न तो कोई इंजीनियर है और न ही कोई जेई। जो दुकानें और अन्य क्षेत्र से किराए के पैसे मंडल के पास आते हैं उन्हें भी विकास कार्यों पर नहीं खर्चा जा रहा है।
पार्षद भी हैं परेशान
इन क्षेत्र के लोगों ने नगर निगम के चुनाव में वोटिंग कर अपने क्षेत्र के पार्षद को चुना। लोग पार्षदों को विकास कराने के लिए कहते हैं। लेकिन नगर निगम का हिस्सा न होने से इस क्षेत्र का विकास नहीं करा पाते। पिछले दिनों हुई नगर निगम हाउस की दूसरी बैठक में यह मुद्दा उठा था। इसमें सीनियर डिप्टी मेयर ने शास्त्री कॉलोनी में लाइटें खराब होने की बात उठाई थी। उनका कहना था कि लाइटें कई दिनों से खराब पड़ी है। नगर निगम अधिकारियों को कहते हैं तो वे निगम का क्षेत्र न होने पर पल्ला झाड़ देते हैं, वहीं नगर सुधार मंडल के अधिकारियों से संपर्क किया जाता है तो उनकी ओर से स्टाफ न होने की बात कह दी जाती है। इसके बाद बैठक में काफी हल्ला भी हुआ था।