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Yamuna Nagar News: टीबी मरीज के पड़ोसियों को भी खानी पड़ेगी दवा

Sun, 11 May 2025 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 11 May 2025 12:53 AM IST
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Neighbors of TB patients will also have to take medicine
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। आपके पड़ोस में यदि किसी को टीबी है तो आप भी सावधान हो जाइए। क्योंकि अब टीबी की दवा केवल रोगी को ही नहीं बल्कि आपको भी खानी पड़ेगी। स्वास्थ्य विभाग ने निर्णय लिया है कि जिस व्यक्ति को टीबी है उसके साथ दाएं-बाएं पांच-पांच घरों में रहने वाले लोगों को भी दवा खिलाई जाएगी। यह सब टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए किया जा रहा है।
टीबी मुख्य तौर: दो मुख्य प्रकार की होती है। पहली पल्मोनरी टीबी (फेफड़ों की टीबी) और एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी (अन्य अंगों की टीबी)। पल्मोनरी टीबी में फेफड़े प्रभावित होते हैं, जबकि एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी में शरीर के अन्य अंग भी प्रभावित हो सकते हैं। जिन लोगों की टीबी बलगम की जांच में कंफर्म होती है उस केस में ही पड़ोसियों को दवा खानी पड़ेगी।
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बलगम आने पर रोगी यहां-वहां थूकता रहता है। इस बलगम से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। इससे पड़ोस में रहने वाले लोग भी टीबी की चपेट में आ सकते हैं। इससे टीबी खत्म होने के बजाय इसके और ज्यादा फैलने का खतरा बना रहता है। इसलिए पड़ोस में रहने वाले लोगों का टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) किया जाएगा।
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इसे क्षय रोग निवारक चिकित्सा भी कहा जाता है जो टीबी संक्रमण को रोकने का एक तरीका है। यह उन लोगों को दिया जाता है जो टीबी से संक्रमित हैं लेकिन उनमें रोग नहीं है या जो टीबी के संपर्क में आए हैं। टीपीटी का मुख्य उद्देश्य टीबी को सक्रिय रोग में विकसित होने से रोकना है।
जिले में फिलहाल टीबी के 1850 मरीज हैं। जिन लोगों को टीबी होती है उनमें तीन सप्ताह से ज्यादा खांसी होना, जुकाम, बुखार, वजन कम होना, भूख न लगना पांच प्रमुख लक्षण पाए जाते हैं। अब प्रत्येक टीबी रोगी को डीबीटी के रूप में हर महीना 500 रुपये के बजाय 1000 रुपये दिए जाते हैं। साथ ही टीबी रोगी को दवा खिलाने वाले को भी 250 रुपये दिए जाते हैं।

जिनमें बलगम की जांच में टीबी मिली है, उनके साथ वाले पांच-पांच घरों में लोगों का टीपीटी उपचार किया जाना है। इस दवा के खाने से व्यक्ति टीबी के संक्रमण में नहीं आएगा। इससे जिले को टीबी मुक्त करने में मदद मिलेगी। - डाॅ. अनूप गोयल, नोडल अधिकारी, टीबी उन्मूलन अभियान।
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