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अनदेखी : बंद हो गए 87 सामुदायिक शौचालय
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यमुनानगर। केंद्र व प्रदेश सरकार स्वच्छता पर जोर दे रही है। इधर गांवों में बने 87 सामुदायिक शौचालय बंद हो गए। इन शौचालयों में न तो पानी का बंदोबस्त है और न ही साफ सफाई का प्रबंध। इसके लिए जिला परिषद की तरफ से स्वच्छ भारत अभियान के तहत सभी गांवों में सामुदायिक शौचालयों का सर्वे कराया गया था। सर्वे में कई शौचालय बंद मिले। जिला परिषद अब सभी बंद शौचालयों को फिर से शुरू कराने के लिए प्रयास करेगी।
जिले में कुल 602 गांव हैं जबकि 42 गांव नगर निगम के क्षेत्र में आते हैं। 602 गांवों में स्वच्छ भारत अभियान के तहत कुल 269 सामुदायिक शौचालय बनाए गए थे। इन सभी शौचालयों की देखरेख की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की थी। पंचायतों को ही इनमें पानी, साफ-सफाई की व्यवस्था करवानी थी परंतु इन सामुदायिक शौचालयों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। लिहाजा कई शौचालय धीरे-धीरे बंद होने लगे। सफाई कर्मचारी इनमें सफाई नहीं करते। किसी की पानी की टंकी टूटी पड़ी है। यहां तक की कई शाैचालयों के दरवाजे भी टूट चुके हैं।
सर्वे के दौरान कुछ सरपंचों ने बजट की कमी के बारे में भी बताया। सरपंचों ने कहा कि उनके खातों में काफी समय से बजट नहीं आया है। जिस कारण वह गांवों में विकास कार्य नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसे में वह शौचालयों की देखरेख कैसे करवाएं। साफ सफाई न होने से लोगों ने इनमें जाना छोड़ दिया।
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चोरों के निशाने पर शौचालय
काफी शौचालय ऐसे भी हैं जो चोरों के निशाने पर हैं। जिला परिषद की तरफ से जब इन शौचालयों का निर्माण कराया गया था तो इनमें हैंडवाश के लिए नल भी लगाए गए थे। कुछ जगह पानी की मोटर भी रखवाई गई थी परंतु चोरों ने कहीं से नल उतार लिए तो कहीं से मोटर ही चुरा ली। जिसके बाद पंचायतों की तरफ से दोबारा उस तरफ ध्यान नहीं दिया गया।
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दोबारा शुरू करेंगे बंद शौचालय : बलिंद्र कटारिया
स्वच्छ भारत मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक बलिंद्र कटारिया का कहना है कि जिला परिषद के सीईओ वीरेंद्र ढुल के निर्देशानुसार ग्रामीण क्षेत्र के सामुदायिक शौचालयों का सर्वे किया गया है। जिनमें 87 शौचालय बंद मिले हैं। यह शौचालय फिर से लोगों के काम आ सकें इसके लिए इन्हें फिर से चलाने का प्रयास किया जा रहा है।
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जिले में कुल 602 गांव हैं जबकि 42 गांव नगर निगम के क्षेत्र में आते हैं। 602 गांवों में स्वच्छ भारत अभियान के तहत कुल 269 सामुदायिक शौचालय बनाए गए थे। इन सभी शौचालयों की देखरेख की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की थी। पंचायतों को ही इनमें पानी, साफ-सफाई की व्यवस्था करवानी थी परंतु इन सामुदायिक शौचालयों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। लिहाजा कई शौचालय धीरे-धीरे बंद होने लगे। सफाई कर्मचारी इनमें सफाई नहीं करते। किसी की पानी की टंकी टूटी पड़ी है। यहां तक की कई शाैचालयों के दरवाजे भी टूट चुके हैं।
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सर्वे के दौरान कुछ सरपंचों ने बजट की कमी के बारे में भी बताया। सरपंचों ने कहा कि उनके खातों में काफी समय से बजट नहीं आया है। जिस कारण वह गांवों में विकास कार्य नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसे में वह शौचालयों की देखरेख कैसे करवाएं। साफ सफाई न होने से लोगों ने इनमें जाना छोड़ दिया।
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चोरों के निशाने पर शौचालय
काफी शौचालय ऐसे भी हैं जो चोरों के निशाने पर हैं। जिला परिषद की तरफ से जब इन शौचालयों का निर्माण कराया गया था तो इनमें हैंडवाश के लिए नल भी लगाए गए थे। कुछ जगह पानी की मोटर भी रखवाई गई थी परंतु चोरों ने कहीं से नल उतार लिए तो कहीं से मोटर ही चुरा ली। जिसके बाद पंचायतों की तरफ से दोबारा उस तरफ ध्यान नहीं दिया गया।
दोबारा शुरू करेंगे बंद शौचालय : बलिंद्र कटारिया
स्वच्छ भारत मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक बलिंद्र कटारिया का कहना है कि जिला परिषद के सीईओ वीरेंद्र ढुल के निर्देशानुसार ग्रामीण क्षेत्र के सामुदायिक शौचालयों का सर्वे किया गया है। जिनमें 87 शौचालय बंद मिले हैं। यह शौचालय फिर से लोगों के काम आ सकें इसके लिए इन्हें फिर से चलाने का प्रयास किया जा रहा है।