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भागवत कथा सुनने से मिलता है मोक्ष : सुखदेव
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100 कुंडीय यज्ञ में आहुतियां डालने पहुंचे साधु संत। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
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माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। अमादलपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध सूर्यकुंड मंदिर में चल रहे 100 कुंडीय यज्ञ में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन दस वर्षीय कथा वाचक सुखदेव ऋषभदेव ने कहा कि अगर श्रद्धा और विश्वास के साथ भागवत कथा का श्रवण करें तो जीवन सुखमय हो जाता है। साथ ही मोक्ष कि प्राप्ति होती है। भागवत कथा सुनने से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
उन्होंने कहा कि मानव जब इस संसार में जन्म लेता है तो चार व्याधि उत्पन्न होती हैं। रोग, शोक, वृद्धावस्था और मौत। मानव इन्हीं चार व्याधियों से जूझता हुआ संसार से विदा होता है। सांसारिक बंधन में जितना बंधोगे, उतना ही पाप के नजदीक पहुंचेगा, इसलिए सांसारिक बंधन से मुक्त होकर परमात्मा की शरण में जाओ तभी जीवन रूपी नैय्या पार होगी। उन्होंने कहा कि कंस अपने चचेरी बहन देवकी से बहुत प्रेम करते थे, उसे विदा कर रहे तब आकाशवाणी हुई कि उसकी आठवीं संतान तेरे काल का कारण बनेगी।
देवकी को कंस मारने के लिए तैयार हुए। वासुदेव ने कहा कि उसे नहीं मारें। वे अपनी संतान को उसे सौंप देंगे। उनकी बात यकीन कर कंस ने दोनों को जेल में डाल दिया। उनकी एक के एक बाद छह संतान को मौत के घाट उतार दिया। सातवें बलराम पधारे। योग माया के द्वारा नंद की पत्नी के गर्भ में स्थापित किया। आठवां पुत्र रोहिणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण का रात 12 बजे अवतार हुआ।
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उन्होंने कहा कि जब जब पृथ्वी पर धर्म की हानि हुई है। भगवान ने अवतार लेकर अपने भक्तों की रक्षा की है। भगवान ने श्रीराम के रूप में अवतार लेकर रावण का संहार किया। वहीं, श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। उन्होंने कहा कि अहंकार ही परमात्मा का भोजन है। भगवान पृथ्वी, गाय, ब्राह्मण और संतों की भी रक्षा करते हैं।
100 कुंडीय महायज्ञ में 300 साधु संत दे रहे आहुतियां
अमादलपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध सूर्यकुंड मंदिर में चल रहे 100 कुंडीय यज्ञ में देशभर से साधु संतों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। इस दौरान 300 ब्राह्मणों एवं साधु संत यज्ञशाला में बने हवन कुंडों में आहुतियां डाल रहे हैं। मंदिर के महंत डॉ. गुण प्रकाश चैतन्य महाराज ने बताया कि महायज्ञ तीन घंटे सुबह और 3 घंटे शाम को किया जाता है। शाम 5:00 से 5:30 तक आरती कर भक्तजनों को प्रसाद वितरित किया जाता है। उन्होंने बताया कि महायज्ञ के समापन पर ब्रह्मलीन स्वामी अखिलानंद महाराज की प्रतिमा मंदिर परिसर में स्थापित की जाएगी।
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यमुनानगर। अमादलपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध सूर्यकुंड मंदिर में चल रहे 100 कुंडीय यज्ञ में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन दस वर्षीय कथा वाचक सुखदेव ऋषभदेव ने कहा कि अगर श्रद्धा और विश्वास के साथ भागवत कथा का श्रवण करें तो जीवन सुखमय हो जाता है। साथ ही मोक्ष कि प्राप्ति होती है। भागवत कथा सुनने से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
उन्होंने कहा कि मानव जब इस संसार में जन्म लेता है तो चार व्याधि उत्पन्न होती हैं। रोग, शोक, वृद्धावस्था और मौत। मानव इन्हीं चार व्याधियों से जूझता हुआ संसार से विदा होता है। सांसारिक बंधन में जितना बंधोगे, उतना ही पाप के नजदीक पहुंचेगा, इसलिए सांसारिक बंधन से मुक्त होकर परमात्मा की शरण में जाओ तभी जीवन रूपी नैय्या पार होगी। उन्होंने कहा कि कंस अपने चचेरी बहन देवकी से बहुत प्रेम करते थे, उसे विदा कर रहे तब आकाशवाणी हुई कि उसकी आठवीं संतान तेरे काल का कारण बनेगी।
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देवकी को कंस मारने के लिए तैयार हुए। वासुदेव ने कहा कि उसे नहीं मारें। वे अपनी संतान को उसे सौंप देंगे। उनकी बात यकीन कर कंस ने दोनों को जेल में डाल दिया। उनकी एक के एक बाद छह संतान को मौत के घाट उतार दिया। सातवें बलराम पधारे। योग माया के द्वारा नंद की पत्नी के गर्भ में स्थापित किया। आठवां पुत्र रोहिणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण का रात 12 बजे अवतार हुआ।
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उन्होंने कहा कि जब जब पृथ्वी पर धर्म की हानि हुई है। भगवान ने अवतार लेकर अपने भक्तों की रक्षा की है। भगवान ने श्रीराम के रूप में अवतार लेकर रावण का संहार किया। वहीं, श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। उन्होंने कहा कि अहंकार ही परमात्मा का भोजन है। भगवान पृथ्वी, गाय, ब्राह्मण और संतों की भी रक्षा करते हैं।
100 कुंडीय महायज्ञ में 300 साधु संत दे रहे आहुतियां
अमादलपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध सूर्यकुंड मंदिर में चल रहे 100 कुंडीय यज्ञ में देशभर से साधु संतों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। इस दौरान 300 ब्राह्मणों एवं साधु संत यज्ञशाला में बने हवन कुंडों में आहुतियां डाल रहे हैं। मंदिर के महंत डॉ. गुण प्रकाश चैतन्य महाराज ने बताया कि महायज्ञ तीन घंटे सुबह और 3 घंटे शाम को किया जाता है। शाम 5:00 से 5:30 तक आरती कर भक्तजनों को प्रसाद वितरित किया जाता है। उन्होंने बताया कि महायज्ञ के समापन पर ब्रह्मलीन स्वामी अखिलानंद महाराज की प्रतिमा मंदिर परिसर में स्थापित की जाएगी।