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Yamuna Nagar News: प्राथमिक पाठशाला में दी जाएगी आधुनिक शिक्षा
Sun, 05 Jan 2025 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 05 Jan 2025 11:54 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। अब राजकीय प्राथमिक पाठशालाओं में बच्चों को उन्नत किस्म की शिक्षा प्रदान की जाएगी। बच्चों को स्कूल में पढ़ाने के लिए आधुनिक शिक्षा व तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए प्राथमिक पाठशालाओं को आधुनिक बनाया जाएगा। जिले के तमाम प्राथमिक पाठशालाओं में बच्चे स्मार्ट बोर्ड व 3डी ग्राफिक्स से पढ़ते नजर आएंगे।
इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड व प्रोजेक्टर लगाए जाएंगे। स्मार्ट बोर्ड लगने से पढ़ाने व पढ़ाई का तरीका भी स्मार्ट हो जाएगा। इससे विषय अधिक रोचक व सरल बन जाएगा। जिससे बच्चों को मन भी पढ़ाई में लगेगा। नए सत्र से जिले के सभी 592 प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि जिले के कई प्राइमरी स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड व स्मार्ट एलईडी उपलब्ध है। ऐसे में विभाग ने स्मार्ट बोर्ड लगाने के लिए स्कूलों से डिमांड मांगी है। विभाग के आदेशों में पर स्कूलों ने इसकी डिमांड करना शुरू कर दिया है। बता दें कि जिले के कुल 592 प्राथमिक पाठशालाओं में से 388 ने अपनी कक्षाओं में स्मार्ट बोर्ड लगाने की डिमांड भेजी है।
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जिला विभाग की ओर से स्कूलों की डिमांड मुख्यालय को भेजी जा रही है। सब कुछ सही रहा तो नए सत्र में बच्चों को स्मार्ट एजुकेशन मिलेगी। विभाग की ओर से स्मार्ट बोर्ड की डिमांड तीन श्रेणी में मांगी है। इस दौरान स्मार्ट बोर्ड, एजुसेट की आवश्यकता, इंटरनेट की आवश्यकता तीन श्रेणियां बनाई गई हैं। चूंकि स्मार्ट बोर्ड चलाने के लिए इंटरनेट की आवश्यकता होगी। जिले के कई स्कूल ऐसे हैं जिनमें इंटरनेट नहीं है।
ऐसे में स्मार्ट बोर्ड लगने पर भी बच्चों व शिक्षकों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। जिले के 388 स्कूलों ने स्मार्ट बोर्ड लगाने की डिमांड की है। जबकि अन्य स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड व स्मार्ट एलईडी लगी हुई है। जिले की कुल 48 आदर्श संस्कृति प्राथमिक पाठशालाएं हैं और सभी में स्मार्ट बोर्ड लगे हुए हैं। करीब 200 स्कूलों के पास स्मार्ट एलईडी लगी हुई है। इसके अलावा कुछ स्कूलों की एक-एक कक्षा में स्मार्ट बोर्ड लगा हुआ है। ऐसे में विभाग डिमांड करने वाले 388 प्राथमिक पाठशालाओं में स्मार्ट बोर्ड लगाने को लेकर प्राथमिकता से काम कर रहा है।
पांच दर्जन स्कूलों में इंटरनेट की समस्या
जिले में करीब पांच दर्जन स्कूल ऐसे हैं, जहां इंटरनेट की भारी दिक्कत हैं। जिले की 55 से 60 प्राथमिक पाठशालाएं ऐसी हैं, जहां इंटरनेट की व्यवस्था ठीक नहीं है। इंटरनेट की दिक्कत के कारण इन स्कूलों में ऑनलाइन कार्य नहीं करवाए जाते हैं। यह सभी स्कूल ग्रामीण, घाड़, हिमाचल प्रदेश व उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हुए हैं। इंटरनेट की दिक्कत के कारण इन स्कूलों में सैट नहीं करवाए गए। वहीं, निपुण बाल रामलीला की वीडियो भी शिक्षकों ने अपने स्तर पर पोर्टल पर अपलोड की थी। विभाग ने इंटरनेट की समस्या से जूझ रहे स्कूलों की भी जानकारी मांगी है।
जिले की प्राथमिक पाठशालाओं में बच्चों को स्मार्ट एजुकेशन देने के लिए स्मार्ट बोर्ड लगाने की योजना है। इसके लिए स्कूलों से डिमांड मांगी गई है। वहीं, जिन स्कूलों में इंटरनेट नहीं है या दिक्कत है उनकी सूची भी मांगी गई है। नए सत्र से बच्चों को सुविधा उपलब्ध करवाने का लक्ष्य है। - संजीव सैनी, जिला एफएलएन समन्वयक।
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जगाधरी। अब राजकीय प्राथमिक पाठशालाओं में बच्चों को उन्नत किस्म की शिक्षा प्रदान की जाएगी। बच्चों को स्कूल में पढ़ाने के लिए आधुनिक शिक्षा व तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए प्राथमिक पाठशालाओं को आधुनिक बनाया जाएगा। जिले के तमाम प्राथमिक पाठशालाओं में बच्चे स्मार्ट बोर्ड व 3डी ग्राफिक्स से पढ़ते नजर आएंगे।
इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड व प्रोजेक्टर लगाए जाएंगे। स्मार्ट बोर्ड लगने से पढ़ाने व पढ़ाई का तरीका भी स्मार्ट हो जाएगा। इससे विषय अधिक रोचक व सरल बन जाएगा। जिससे बच्चों को मन भी पढ़ाई में लगेगा। नए सत्र से जिले के सभी 592 प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
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हालांकि जिले के कई प्राइमरी स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड व स्मार्ट एलईडी उपलब्ध है। ऐसे में विभाग ने स्मार्ट बोर्ड लगाने के लिए स्कूलों से डिमांड मांगी है। विभाग के आदेशों में पर स्कूलों ने इसकी डिमांड करना शुरू कर दिया है। बता दें कि जिले के कुल 592 प्राथमिक पाठशालाओं में से 388 ने अपनी कक्षाओं में स्मार्ट बोर्ड लगाने की डिमांड भेजी है।
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जिला विभाग की ओर से स्कूलों की डिमांड मुख्यालय को भेजी जा रही है। सब कुछ सही रहा तो नए सत्र में बच्चों को स्मार्ट एजुकेशन मिलेगी। विभाग की ओर से स्मार्ट बोर्ड की डिमांड तीन श्रेणी में मांगी है। इस दौरान स्मार्ट बोर्ड, एजुसेट की आवश्यकता, इंटरनेट की आवश्यकता तीन श्रेणियां बनाई गई हैं। चूंकि स्मार्ट बोर्ड चलाने के लिए इंटरनेट की आवश्यकता होगी। जिले के कई स्कूल ऐसे हैं जिनमें इंटरनेट नहीं है।
ऐसे में स्मार्ट बोर्ड लगने पर भी बच्चों व शिक्षकों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। जिले के 388 स्कूलों ने स्मार्ट बोर्ड लगाने की डिमांड की है। जबकि अन्य स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड व स्मार्ट एलईडी लगी हुई है। जिले की कुल 48 आदर्श संस्कृति प्राथमिक पाठशालाएं हैं और सभी में स्मार्ट बोर्ड लगे हुए हैं। करीब 200 स्कूलों के पास स्मार्ट एलईडी लगी हुई है। इसके अलावा कुछ स्कूलों की एक-एक कक्षा में स्मार्ट बोर्ड लगा हुआ है। ऐसे में विभाग डिमांड करने वाले 388 प्राथमिक पाठशालाओं में स्मार्ट बोर्ड लगाने को लेकर प्राथमिकता से काम कर रहा है।
पांच दर्जन स्कूलों में इंटरनेट की समस्या
जिले में करीब पांच दर्जन स्कूल ऐसे हैं, जहां इंटरनेट की भारी दिक्कत हैं। जिले की 55 से 60 प्राथमिक पाठशालाएं ऐसी हैं, जहां इंटरनेट की व्यवस्था ठीक नहीं है। इंटरनेट की दिक्कत के कारण इन स्कूलों में ऑनलाइन कार्य नहीं करवाए जाते हैं। यह सभी स्कूल ग्रामीण, घाड़, हिमाचल प्रदेश व उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हुए हैं। इंटरनेट की दिक्कत के कारण इन स्कूलों में सैट नहीं करवाए गए। वहीं, निपुण बाल रामलीला की वीडियो भी शिक्षकों ने अपने स्तर पर पोर्टल पर अपलोड की थी। विभाग ने इंटरनेट की समस्या से जूझ रहे स्कूलों की भी जानकारी मांगी है।
जिले की प्राथमिक पाठशालाओं में बच्चों को स्मार्ट एजुकेशन देने के लिए स्मार्ट बोर्ड लगाने की योजना है। इसके लिए स्कूलों से डिमांड मांगी गई है। वहीं, जिन स्कूलों में इंटरनेट नहीं है या दिक्कत है उनकी सूची भी मांगी गई है। नए सत्र से बच्चों को सुविधा उपलब्ध करवाने का लक्ष्य है। - संजीव सैनी, जिला एफएलएन समन्वयक।