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फर्जी ई-रवाना पर स्क्रीन प्लांट में चरखी दादरी से खरीदी दिखाई खनन सामग्री, दो फंसे
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यमुनानगर। अवैध खनन करने के लिए अब फर्जी ई-रवाना तैयार किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं जिले में खनन सामग्री की कोई कमी नहीं है फिर भी अवैध कारोबार करने वाले दूसरे जिलों से खनन सामग्री को खरीदा हुआ दिखा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला खनन विभाग की जांच में सामने आया है। गांव माजरी टापू में स्क्रीन प्लांट संचालक ने जिला चरखी दादरी से फर्जी ई-रवाना पर खनन सामग्री खरीदी हुई दिखाई। करीब 260 किलोमीटर दूर से खनन सामग्री जिले में लाकर बेचना हैरान करने वाला है। पुलिस ने प्लांट संचालकों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
खनन विभाग के अधिकारी राजेश कुमार सांगवान ने थाना छप्पर पुलिस को दी शिकायत में बताया कि विभाग की तरफ से मैसर्स श्री लक्ष्मी स्क्रीनिंग प्लांट के नाम पर जिला करनाल की तहसील इंद्री के गांव शेरगढ़ निवासी राजेश्वर शर्मा को खनिज डीलर का लाइसेंस दिया था। स्क्रीनिंग प्लांट गांव माजरी टापू में स्थित है। राजेश्वर शर्मा ने स्क्रीनिंग प्लांट को करनाल के गांव गगसीना निवासी सुभाष चंद्र व जगाधरी के गांव मुसिंबल के अनिल कुमार को बेच दिया था। कब्जा लेने के बाद दोनों ने स्क्रीन प्लांट पर पहले से पड़ी 7,482 मीट्रिक टन खनन सामग्री को आठ से 12 अक्तूबर तक 218 वाहनों के माध्यम से बेच दिया।
ऑनलाइन पोर्टल से डाउनलोड किए गए विवरण के अनुसार सुभाष चंद्र व अनिल ने जिला चरखी दादरी स्थित सिद्घि विनायक आपूर्तिकर्ता (एमडीएल धारक) से 12 अक्तूबर को 2843.96 मीट्रिक टन गटका, बजरी और रेत 58 वाहनों में खरीदा हुआ दिखाया। जबकि जिला चरखी दादरी में पहले से कहीं भी गटका, बजरी और रेत मौजूद नहीं है। दूसरा 260 किलोमीटर दूर से इतनी खनन सामग्री खरीदना न तो संभव है और न ही लाभदायक। वहीं, विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार एमडीएल धारकों की एक दूसरे से खनन सामग्री की बिक्री और खरीद की अनुमति नहीं है। इससे साफ है कि दोनों ने फर्जी ई-रवाना तैयार कर खनन सामग्री की खरीद फरोख्त की है, क्योंकि जिले में खनन सामग्री प्रचुर मात्रा में है।
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मामले की जांच कर रहे सब इंस्पेक्टर जसबीर सिंह ने बताया कि सुभाष चंद्र व अनिल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में जो भी सामने आएगा उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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खनन विभाग के अधिकारी राजेश कुमार सांगवान ने थाना छप्पर पुलिस को दी शिकायत में बताया कि विभाग की तरफ से मैसर्स श्री लक्ष्मी स्क्रीनिंग प्लांट के नाम पर जिला करनाल की तहसील इंद्री के गांव शेरगढ़ निवासी राजेश्वर शर्मा को खनिज डीलर का लाइसेंस दिया था। स्क्रीनिंग प्लांट गांव माजरी टापू में स्थित है। राजेश्वर शर्मा ने स्क्रीनिंग प्लांट को करनाल के गांव गगसीना निवासी सुभाष चंद्र व जगाधरी के गांव मुसिंबल के अनिल कुमार को बेच दिया था। कब्जा लेने के बाद दोनों ने स्क्रीन प्लांट पर पहले से पड़ी 7,482 मीट्रिक टन खनन सामग्री को आठ से 12 अक्तूबर तक 218 वाहनों के माध्यम से बेच दिया।
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ऑनलाइन पोर्टल से डाउनलोड किए गए विवरण के अनुसार सुभाष चंद्र व अनिल ने जिला चरखी दादरी स्थित सिद्घि विनायक आपूर्तिकर्ता (एमडीएल धारक) से 12 अक्तूबर को 2843.96 मीट्रिक टन गटका, बजरी और रेत 58 वाहनों में खरीदा हुआ दिखाया। जबकि जिला चरखी दादरी में पहले से कहीं भी गटका, बजरी और रेत मौजूद नहीं है। दूसरा 260 किलोमीटर दूर से इतनी खनन सामग्री खरीदना न तो संभव है और न ही लाभदायक। वहीं, विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार एमडीएल धारकों की एक दूसरे से खनन सामग्री की बिक्री और खरीद की अनुमति नहीं है। इससे साफ है कि दोनों ने फर्जी ई-रवाना तैयार कर खनन सामग्री की खरीद फरोख्त की है, क्योंकि जिले में खनन सामग्री प्रचुर मात्रा में है।
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मामले की जांच कर रहे सब इंस्पेक्टर जसबीर सिंह ने बताया कि सुभाष चंद्र व अनिल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में जो भी सामने आएगा उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।