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Yamuna Nagar News: अतिमुक्त कुमार की कहानी से दिया ज्ञान का संदेश

Tue, 26 Aug 2025 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 26 Aug 2025 12:34 AM IST
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Message of wisdom given by Atimukt Kumar's story
प्रवचन करतीं साध्वी सुचेता व अन्य। प्रवक्ता - फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा माॅडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चतुर्मास की 47वें दिन सत्संग सुनने के लिए बड़ी संख्या में संगत उमड़ी। प्रवचन में महा साध्वी सुचेता महाराज ने पर्यूषण पर्व के दौरान अतिमुक्त कुमार की कहानी का वर्णन कर ज्ञान का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि पोलासपुर नामक एक रमणीय नगर था। उस नगर में विजय नाम का राजा की रानी थी। उनके पुत्र का नाम अतिमुक्त राजकुमार था। उस समय राजकुमार अतिमुक्त करीब आठ वर्ष के थे। भगवान महावीर स्वामी भव्य जीवों को तारते हुए, गांव गांव विचरते हुए अपने शिष्यों के समेत पोलासपुर के बाहर श्रीवन उद्यान में पहुचें। एक दिन गौतम स्वामी नगर के घरों में गोचरी हेतु परिभ्रमण कर रहे थे। तब राजमहल के पास इंद्रस्थान (बच्चों के खेलने की जगह ) में अतिमुक्त खेल रहे थे।
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अतिमुक्त ने रास्ते से गुजरते गौतम स्वामी को जाते हुए देखा। बालक को सहज कौतूहल हुआ और वह गौतम स्वामी के पास आकर पूछा कि पूज्यवर, आप कौन हैं। कहां रहते हो और इस प्रकार क्यों घूम रहे हो। गौतम स्वामी ने बताया कि हम श्रमण, निर्ग्रन्थ, ईर्यासमिति के धारक गुप्त ब्रह्मचारी हैं। भिक्षा के लिए घूम रहे हैं। अतिमुक्त उन्हें अपने घर भी लेकर गए।
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अतिमुक्त कुमार की जिज्ञासा पर, तब गौतम स्वामी ने भगवान महावीर स्वामी के विषय में बताते हुए कहा कि वे श्रीवन उद्यान में ठहरे हुए हैं। अतिमुक्त कुमार उनके साथ श्रीवन में गए और भगवान महावीर के दर्शन किए और वंदना की। भगवान महावीर के मुख से धर्म कथा सुनकर अतिमुक्त को वैराग्य हो गया। अतिमुक्त कुमार ने अपने माता-पिता से साधू बनने की आज्ञा मांगी।

उन्होंने कहा कि हे माता-पिता मैं दीक्षा लेकर इन बातों की जानकारी करना चाहता हूं और इस जन्म मृत्यु के चक्र से छूटना चाहता हूं। अत्यंत ज्ञान सभर संवाद होने के बाद बालक का दृढ़ वैराग्य देख मातापिता ने भारी मन से आज्ञा दी। फिर बहुत वर्षो तक अतिमुक्त मुनि ने श्रमण चरित्र का पालन किया। गुण रत्न संवत्सर तप की आराधना की। अंत में विपुलाचल पर्वत पर अनशन संलेखना सहित निर्वाण प्राप्त कर सिद्ध बुद्ध मुक्त हो गए।
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