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नहीं हुई हाउस मीटिंग, डीसी से खफा मेयर
ब्ूयरो/अमर उजाला, यमुनानगर
Updated Thu, 25 Jun 2015 12:35 AM IST
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नगर निगम की हाउस मीटिंग बुधवार को नहीं हुई। मेयर पक्ष के पार्षदों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अंबाला कमिश्नर नीलम कासनी से डीसी व अन्य अधिकारियों की शिकायत करने की ठान ली है। उनका आरोप है कि प्रशासन हाउस मीटिंग के लिए गंभीर नहीं है और न ही पार्षदाें को पूरी स्थिति से अवगत करवा रहा है।
उधर, सीनियर डिप्टी मेयर ने बुधवार को हाउस मीटिंग थी, इस बात का खंडन करते हुए कहा कि बिना सर्वसम्मति के एजेंडे पर मीटिंग कैसे हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेयर व उनके पक्ष के पार्षदों ने स्वयं ही एजेंडा फाइनल कर हाउस मीटिंग फिक्स कर दी जबकि इसमें सभी पार्षदों के सुझाव व प्रशासनिक मंजूरी नहीं ली गई। बुधवार को नगर निगम कार्यालय में हाउस मीटिंग पर दोनों पक्षों के यही अलग-अलग बोल सुनाई पड़े।
बता दें कि नगर निगम मेयर सरोज बाला की ओर से भेजे गए एजेंडे में शामिल 31 प्रस्तावों में छह पर डीसी डॉ. एसएस फुलिया को आपत्ति थी। मेयर समेत उनके पक्ष के पार्षदों ने इस पर ऐतराज जताया, जिनकी डीसी कार्यालय में 19 जून को एजेंडा फाइनल करने को डीसी व एसडीएम ने मीटिंग ली। इस दौरान मेयर समेत उक्त पार्षदाें ने एजेंडे से किसी भी प्रस्ताव को हटाने से मना कर दिया।
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सोमवार को इसी एजेंडे में कुछ प्रस्ताव और जोड़ उसकी कॉपी डीसी को भेज दी गई। इसमें प्रशासन से 24 जून को ग्यारह बजे लघु सचिवालय में हाउस की मीटिंग बुलाई जाने की मांग की गई। इसके जवाब में प्रशासन की ओर से मीटिंग के बुधवार होने की पुष्टि नहीं की और न एजेंडे की फाइनल कॉपी सभी पार्षदों को मिली। इसी कारण बुधवार को हाउस की मीटिंग नहीं हुई।
एक पक्ष : मीटिंग नहीं कराई, अब अंबाला कमिश्नर से मिलेंगे
मेयर पक्ष के पार्षदाें ने मेयर कार्यालय में बुधवार सुबह ग्यारह बजे पहुंचकर मीटिंग की। इसमें वार्ड नंबर-13 से पार्षद नवनीत उर्फ नीलू पंडित, 14 से निर्मल चौहान, 10 से पार्षद सतपाल व अन्य वार्ड पार्षद मौजूद रहे। बैठक में फैसला लिया कि हाउस मीटिंग न कराने के विरोध में पार्षद डीसी व अन्य अधिकारियों के खिलाफ अंबाला कमिश्नर को शिकायत देंगे। यमुनानगर विधायक पर भी कई आरोप जड़े।
उन्होंने कहा कि विधायक सरकार से विकास कार्यों के लिए ग्रांट नहीं दिला रहे व निगम के फंड को भी उनके वार्डों में नहीं लगने दे रहे हैं। कहां रखें जनता के विकास के मुद्दे : वार्ड नंबर-13 से पार्षद निर्मल चौहान ने कहा कि प्रशासन हाउस मीटिंग को लेकर जरा-भी गंभीर नहीं है।
दो-तीन माह के अंतराल से मीटिंग हो रही है, उसमें भी प्रशासनिक अधिकारी टाल-मटोल का रवैया अपनाए हुए हैं। हाउस मीटिंग ही ऐसा माध्यम है, जहां जनता के चुने हुए प्रतिनिधि लोगाें की जरूरतों को रखकर फंड व विकास कार्यों की मांग करते हैं। वार्ड के काम रुके हुए हैं, निगम के अधिकारी व कर्मी सुनते नहीं, तो आला अधिकारी भी मीटिंग नहीं होने दे रहे हैं। अगर मीटिंग होगी ही नहीं तो आखिर पार्षद अपने मुद्दे कहां रखें।
जवाबदेही नहीं निभा सकते हैं तो दें इस्तीफा : वार्ड नंबर-14 से पार्षद नवनीत उर्फ नीलू पंडित ने कहा कि हाउस मीटिंग को लेकर प्रशासनिक अधिकारी पार्षदों को पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं करते हैं। जबकि उनकी जवाबदेही बनती है, अगर अधिकारी यह जिम्मेदारी भी नहीं निभा सकते हैं, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।
दूसरा पक्ष : मीटिंग तय ही नहीं हुई, तो होती कैसे
सीनियर डिप्टी मेयर पवन बिट्टू, वार्ड नंबर-8 से पार्षद संगीता सिंघल व अन्य कई पार्षदाें का कहना है कि बुधवार को हाउस मीटिंग थी ही नहीं, तो आखिर मीटिंग कैसे होती। उन्हाेंने कहा कि मेयर व उनके पक्ष के पार्षदों ने स्वयं ही एजेंडा फाइनल कर हाउस मीटिंग फिक्स कर दी जबकि इसमें सभी पार्षदों के सुझाव व प्रशासनिक मंजूरी नहीं ली गई। अधिकतर पार्षदों को यह तक नहीं पता कि एजेंडे में प्रस्ताव कौन से शामिल किए गए हैं। नियमानुसार हाउस मीटिंग माह में एक बार जरूर होनी चाहिए, लेकिन इसका हवाला देकर लोगों की जरूरतों को पूरा होने से नहीं रोका जा सकता है।
जिला प्रशासन द्वारा हाउस मीटिंग न कराने के विरोध में पार्षदों ने उनके समक्ष अपनी बात रखी। इस संबंध में अंबाला कमिश्नर नीलम कासनी से मिलने का फैसला लिया गया है।
सरोज बाला, मेयर, नगर निगम।
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उधर, सीनियर डिप्टी मेयर ने बुधवार को हाउस मीटिंग थी, इस बात का खंडन करते हुए कहा कि बिना सर्वसम्मति के एजेंडे पर मीटिंग कैसे हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेयर व उनके पक्ष के पार्षदों ने स्वयं ही एजेंडा फाइनल कर हाउस मीटिंग फिक्स कर दी जबकि इसमें सभी पार्षदों के सुझाव व प्रशासनिक मंजूरी नहीं ली गई। बुधवार को नगर निगम कार्यालय में हाउस मीटिंग पर दोनों पक्षों के यही अलग-अलग बोल सुनाई पड़े।
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बता दें कि नगर निगम मेयर सरोज बाला की ओर से भेजे गए एजेंडे में शामिल 31 प्रस्तावों में छह पर डीसी डॉ. एसएस फुलिया को आपत्ति थी। मेयर समेत उनके पक्ष के पार्षदों ने इस पर ऐतराज जताया, जिनकी डीसी कार्यालय में 19 जून को एजेंडा फाइनल करने को डीसी व एसडीएम ने मीटिंग ली। इस दौरान मेयर समेत उक्त पार्षदाें ने एजेंडे से किसी भी प्रस्ताव को हटाने से मना कर दिया।
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सोमवार को इसी एजेंडे में कुछ प्रस्ताव और जोड़ उसकी कॉपी डीसी को भेज दी गई। इसमें प्रशासन से 24 जून को ग्यारह बजे लघु सचिवालय में हाउस की मीटिंग बुलाई जाने की मांग की गई। इसके जवाब में प्रशासन की ओर से मीटिंग के बुधवार होने की पुष्टि नहीं की और न एजेंडे की फाइनल कॉपी सभी पार्षदों को मिली। इसी कारण बुधवार को हाउस की मीटिंग नहीं हुई।
एक पक्ष : मीटिंग नहीं कराई, अब अंबाला कमिश्नर से मिलेंगे
मेयर पक्ष के पार्षदाें ने मेयर कार्यालय में बुधवार सुबह ग्यारह बजे पहुंचकर मीटिंग की। इसमें वार्ड नंबर-13 से पार्षद नवनीत उर्फ नीलू पंडित, 14 से निर्मल चौहान, 10 से पार्षद सतपाल व अन्य वार्ड पार्षद मौजूद रहे। बैठक में फैसला लिया कि हाउस मीटिंग न कराने के विरोध में पार्षद डीसी व अन्य अधिकारियों के खिलाफ अंबाला कमिश्नर को शिकायत देंगे। यमुनानगर विधायक पर भी कई आरोप जड़े।
उन्होंने कहा कि विधायक सरकार से विकास कार्यों के लिए ग्रांट नहीं दिला रहे व निगम के फंड को भी उनके वार्डों में नहीं लगने दे रहे हैं। कहां रखें जनता के विकास के मुद्दे : वार्ड नंबर-13 से पार्षद निर्मल चौहान ने कहा कि प्रशासन हाउस मीटिंग को लेकर जरा-भी गंभीर नहीं है।
दो-तीन माह के अंतराल से मीटिंग हो रही है, उसमें भी प्रशासनिक अधिकारी टाल-मटोल का रवैया अपनाए हुए हैं। हाउस मीटिंग ही ऐसा माध्यम है, जहां जनता के चुने हुए प्रतिनिधि लोगाें की जरूरतों को रखकर फंड व विकास कार्यों की मांग करते हैं। वार्ड के काम रुके हुए हैं, निगम के अधिकारी व कर्मी सुनते नहीं, तो आला अधिकारी भी मीटिंग नहीं होने दे रहे हैं। अगर मीटिंग होगी ही नहीं तो आखिर पार्षद अपने मुद्दे कहां रखें।
जवाबदेही नहीं निभा सकते हैं तो दें इस्तीफा : वार्ड नंबर-14 से पार्षद नवनीत उर्फ नीलू पंडित ने कहा कि हाउस मीटिंग को लेकर प्रशासनिक अधिकारी पार्षदों को पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं करते हैं। जबकि उनकी जवाबदेही बनती है, अगर अधिकारी यह जिम्मेदारी भी नहीं निभा सकते हैं, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।
दूसरा पक्ष : मीटिंग तय ही नहीं हुई, तो होती कैसे
सीनियर डिप्टी मेयर पवन बिट्टू, वार्ड नंबर-8 से पार्षद संगीता सिंघल व अन्य कई पार्षदाें का कहना है कि बुधवार को हाउस मीटिंग थी ही नहीं, तो आखिर मीटिंग कैसे होती। उन्हाेंने कहा कि मेयर व उनके पक्ष के पार्षदों ने स्वयं ही एजेंडा फाइनल कर हाउस मीटिंग फिक्स कर दी जबकि इसमें सभी पार्षदों के सुझाव व प्रशासनिक मंजूरी नहीं ली गई। अधिकतर पार्षदों को यह तक नहीं पता कि एजेंडे में प्रस्ताव कौन से शामिल किए गए हैं। नियमानुसार हाउस मीटिंग माह में एक बार जरूर होनी चाहिए, लेकिन इसका हवाला देकर लोगों की जरूरतों को पूरा होने से नहीं रोका जा सकता है।
जिला प्रशासन द्वारा हाउस मीटिंग न कराने के विरोध में पार्षदों ने उनके समक्ष अपनी बात रखी। इस संबंध में अंबाला कमिश्नर नीलम कासनी से मिलने का फैसला लिया गया है।
सरोज बाला, मेयर, नगर निगम।