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Yamuna Nagar News: संत समागम में तीन कन्याओं का कराया सामूहिक विवाह
Sat, 01 Aug 2026 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 01 Aug 2026 12:46 AM IST
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श्री गुरु रविदास आश्रम नाहरपुर में नवदंपतियों को आशीर्वाद देते संत। आयोजक
- फोटो : 1
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गांव नाहरपुर स्थित श्री गुरु रविदास आश्रम में संत समागम एवं सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आश्रम के मुख्य सेवादार दास संत रवि ढलौर ने बताया कि कार्यक्रम में दूरदराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में संगत ने पहुंचकर संतों के प्रवचन सुने। इस दौरान तीन कन्याओं का सामूहिक विवाह भी करवाया गया।
संत समागम में दास संत रवि ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु रविदास जी ने अपनी वाणी में परमात्मा की भक्ति को सर्वोपरि बताया है। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी का संदेश है कि हरि रूपी हीरे को छोड़कर संसार में इधर-उधर भटकने वाला व्यक्ति दुखों का भागी बनता है। इसलिए मनुष्य को पाखंडों से दूर रहकर सतगुरु की शरण में जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस कलयुग में जीवन को सही दिशा देने का सबसे सरल माध्यम सत्संग है। संतों का संग करने से मनुष्य को अच्छे मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने संगत से आह्वान किया कि सत्संग कार्यक्रमों को केवल आयोजन या मेले तक सीमित न रखें, बल्कि यहां से जीवन में अपनाने योग्य अच्छी शिक्षाएं लेकर जाएं। दास संत रवि ने बताया कि अब तक करीब 50 जोड़ों का विवाह करवाया जा चुका है।
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यमुनानगर। गांव नाहरपुर स्थित श्री गुरु रविदास आश्रम में संत समागम एवं सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आश्रम के मुख्य सेवादार दास संत रवि ढलौर ने बताया कि कार्यक्रम में दूरदराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में संगत ने पहुंचकर संतों के प्रवचन सुने। इस दौरान तीन कन्याओं का सामूहिक विवाह भी करवाया गया।
संत समागम में दास संत रवि ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु रविदास जी ने अपनी वाणी में परमात्मा की भक्ति को सर्वोपरि बताया है। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी का संदेश है कि हरि रूपी हीरे को छोड़कर संसार में इधर-उधर भटकने वाला व्यक्ति दुखों का भागी बनता है। इसलिए मनुष्य को पाखंडों से दूर रहकर सतगुरु की शरण में जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि इस कलयुग में जीवन को सही दिशा देने का सबसे सरल माध्यम सत्संग है। संतों का संग करने से मनुष्य को अच्छे मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने संगत से आह्वान किया कि सत्संग कार्यक्रमों को केवल आयोजन या मेले तक सीमित न रखें, बल्कि यहां से जीवन में अपनाने योग्य अच्छी शिक्षाएं लेकर जाएं। दास संत रवि ने बताया कि अब तक करीब 50 जोड़ों का विवाह करवाया जा चुका है।
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